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अंडरपास में भरा पानी, जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर

Mon, 03 Sep 2018 10:52 PM IST
अंडरपास में भरा पानी, जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर
अंडरपास में भरा पानी, जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर Updated Mon, 03 Sep 2018 10:52 PM IST
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Water in underpass, life is risked and forced to leave
रेलवे अंडरपास से गुजरते वाहन - फोटो : amarujala

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 अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। रेलवे विभाग ने करोड़ों रुपये की लागत से अंडरपास तो बना दिया, लेकिन नाली नहीं बनने से एक दर्जन से अधिक गांव के लोगों का आवागमन प्रभावित है। रेलवे क्रासिंग को पूरी तरह बंद कर दिया गया है इसी रास्ते से ही आवागमन होता है। कई बार स्थानीय लोगों ने पुल में पानी निकासी का इंतजाम कराने की मांग रेल अधिकारी व जिलाधिकारी से किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लगातार झमाझम बारिश के बाद हालात यह है कि पुल में पानी के बीच से वाहन या पैदल गुजरना पड़ता है।
सदर ब्लाक क्षेत्र के रैपुरवा माफी, तरावं, बगलई भसौंधा, इटखरी गोबरिया, वीरा, गोपालपुर, रमयापुर, हिनौता, कादरगंज के ग्रामवासियों को शिवरामपुर कस्बे से लेकर हाईवे को जोड़ने के लिए रेल विभाग ने अंडरपास का निर्माण कराया है। एक साल पूर्व बने अंडरपास में पानी निकासी का इंतजाम नहंी है। रैपुरवा निवासी दामोदर प्रसाद, मनोज कुमार, गयाप्रसाद, जगजीवन प्रसाद, कल्ला निवासी वीरेंद्र पटेल, जगदीश वैद्य आदि ने बताया कि कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर इस पुल से पानी निकासी का इंतजाम कराने को कहा गया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पानी भरे रास्ते से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। कई बार साइकिल सवार ग्रामीण इसमें गिर चुके हैं। कुछ चार पहिया वाहन अचानक पानी में फंसकर बंद हो जाते हैं तो जाम लग जाता है। इस रास्ते के अलावा गांव की ओर जाने का अन्य कोई मार्ग नहीं है।
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 इस मामले में उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि अंडरपास में एक नाली बनाई गई है। जो शायद मिट्टी के कारण चोक(बंद) हो गई होगी। इसी कारण पानी भरा रहता है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई है। जल्द ही इसका समाधान कराया जाएगा।
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कई बार हो चुका है विवाद
चित्रकूट। अंडरपास का निर्माण शुरू होते ही विवाद हो गया था। बिना मानव रेल क्रासिंग वाले इस स्थान पर कई घटनाएं होती थी। जिसे रोकने के लिए रेलवे ने पहले अस्थाई केबिन बनवाकर एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई। इसके बावजूद घटनाएं हुई। जिस पर अंडरपास निर्माण स्वीकृत कराकर रेलवे ने बनवाना शुरू किया। जिसका आसपास के ग्रामीणों ने विरोध किया था लेकिन इसका प्रभाव नहीं पड़ा। अब ऊपर रेल क्रासिंग का मार्ग पूरा बंद करा दिया गया है। जिससे अंडरपास से ही एक दर्जन गांव के लोगाें का आवागनमन होता है।
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