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Chitrakoot News: गेहूं की फसल पर जल संकट का साया, नहरों की उपेक्षा से किसान परेशान
Thu, 08 Jan 2026 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:36 PM IST
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फोटो 6- ओहन नहर की बछरन गांव की टूटी नहर। संवाद।
चित्रकूट। सर्दी के मौसम में बारिश की कमी के कारण लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बोआई करने वाले किसानों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की परेशानी को नहरों के अपर्याप्त संचालन और रखरखाव की कमी और बढ़ा रही है। विभागीय दावे किए जा रहे हैं कि 435 किमी से अधिक लंबी नहरों की सफाई कराई गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
जिले के लगभग सभी तहसील क्षेत्रों में गेहूं की फसल मुख्य रूप से उगाई जाती है, जो किसानों के लिए साल भर के भोजन का प्रमुख स्रोत है। पानी की कमी के बावजूद किसान गेहूं की खेती पर निर्भर हैं। हालांकि, नहरों में पानी की कमी और उनकी जर्जर स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के जिला मीडिया प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि कई नहरों में लाखों रुपये का बजट आने के बावजूद उनकी सफाई तक नहीं कराई गई है। इससे पानी न मिलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। प्रगतिशील किसान योगेश जैन कहते हैं कि इस समय गेहूं की फसल पूरे जिले में बोई गई है। सर्दी का मौसम फसल के लिए अनुकूल है लेकिन बारिश न होने के कारण वे सरकारी सिंचाई और निजी ट्यूबवेल पर निर्भर हैं।
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सफाई पर व्यय हुए सवा करोड़
चित्रकूट में कुल 613 किमी नहरों की लंबाई है, जिसमें से 423.806 किमी की सफाई कराकर पानी का संचालन किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस सफाई कार्य पर लगभग सवा करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। विभागीय अधिकारी यह भी दावा कर रहे हैं कि सभी प्रमुख नहरों में पानी टेल तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, किसानों की व्यथा और नहरों की मौजूदा स्थिति इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। (संवाद)
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गेहूं की फसल के लिए पानी की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी सर्दी पड़ने से खेती को फायदा हो रहा है और कोई खास नुकसान नहीं है। वहीं, जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने सभी नहरों की सफाई कराने और गंदी व टूटी नहरों की पहचान करने के आदेश जारी किए हैं।
- राजकुमार, उपकृषि निदेशक
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सोनेपुर, बनकट, पश्चिम पताई और लामियारी पंप नहरों में आधुनिकीकरण और मरम्मत के कार्य कराए जाने हैं। जिससे सोनेपुर और बनकट पंप नहरों का संचालन 15 जनवरी से 15 फरवरी तक बंद रहेगा। पश्चिम पताई और लामियारी पंप नहरों का संचालन 12 जनवरी से 15 फरवरी तक बंद रहेगा। नहरों के संचालन में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए यह कार्य कराया जा रहा है, जिसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है।
- अखिल कुमार अधिशासी अभियंता, लघु डाल नहर खंड बांदा
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जिले के लगभग सभी तहसील क्षेत्रों में गेहूं की फसल मुख्य रूप से उगाई जाती है, जो किसानों के लिए साल भर के भोजन का प्रमुख स्रोत है। पानी की कमी के बावजूद किसान गेहूं की खेती पर निर्भर हैं। हालांकि, नहरों में पानी की कमी और उनकी जर्जर स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के जिला मीडिया प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि कई नहरों में लाखों रुपये का बजट आने के बावजूद उनकी सफाई तक नहीं कराई गई है। इससे पानी न मिलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। प्रगतिशील किसान योगेश जैन कहते हैं कि इस समय गेहूं की फसल पूरे जिले में बोई गई है। सर्दी का मौसम फसल के लिए अनुकूल है लेकिन बारिश न होने के कारण वे सरकारी सिंचाई और निजी ट्यूबवेल पर निर्भर हैं।
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सफाई पर व्यय हुए सवा करोड़
चित्रकूट में कुल 613 किमी नहरों की लंबाई है, जिसमें से 423.806 किमी की सफाई कराकर पानी का संचालन किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस सफाई कार्य पर लगभग सवा करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। विभागीय अधिकारी यह भी दावा कर रहे हैं कि सभी प्रमुख नहरों में पानी टेल तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, किसानों की व्यथा और नहरों की मौजूदा स्थिति इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। (संवाद)
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गेहूं की फसल के लिए पानी की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी सर्दी पड़ने से खेती को फायदा हो रहा है और कोई खास नुकसान नहीं है। वहीं, जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने सभी नहरों की सफाई कराने और गंदी व टूटी नहरों की पहचान करने के आदेश जारी किए हैं।
- राजकुमार, उपकृषि निदेशक
सोनेपुर, बनकट, पश्चिम पताई और लामियारी पंप नहरों में आधुनिकीकरण और मरम्मत के कार्य कराए जाने हैं। जिससे सोनेपुर और बनकट पंप नहरों का संचालन 15 जनवरी से 15 फरवरी तक बंद रहेगा। पश्चिम पताई और लामियारी पंप नहरों का संचालन 12 जनवरी से 15 फरवरी तक बंद रहेगा। नहरों के संचालन में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए यह कार्य कराया जा रहा है, जिसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है।
- अखिल कुमार अधिशासी अभियंता, लघु डाल नहर खंड बांदा

फोटो 6- ओहन नहर की बछरन गांव की टूटी नहर। संवाद।

फोटो 6- ओहन नहर की बछरन गांव की टूटी नहर। संवाद।