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Chitrakoot News: गांव की महिलाओं को नहीं मिल पा रहा विशेषज्ञों से इलाज
Wed, 24 Sep 2025 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 24 Sep 2025 12:35 AM IST
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चित्रकूट। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे के बावजूद जिले में महिला और बाल रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है। सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ एक महिला रोग विशेषज्ञ और तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और बच्चों को प्राथमिक स्तर पर ही विशेषज्ञ इलाज से वंचित होना पड़ रहा है।
मानिकपुर, मऊ, रामनगर, रैपुरा, राजापुर, पहाड़ी और शिवरामपुर सीएचसी में से केवल राजापुर केंद्र पर महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता मिश्रा तैनात हैं। मानिकपुर में डॉ. स्वाति पाठक की नियुक्ति थी, लेकिन उन्होंने एक माह पूर्व इस्तीफा दे दिया। बाल रोग विशेषज्ञ सिर्फ राजापुर, मानिकपुर और पहाड़ी सीएचसी में कार्यरत हैं, जबकि बाकी केंद्रों पर पद खाली हैं।
जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ केवल एक हैं और बाल रोग विशेषज्ञ छह हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को मजबूरन जिला अस्पताल का रुख करना पड़ता है।
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मानिकपुर की घटना ने खड़े किए सवाल
हाल ही में मानिकपुर की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान सीएचसी लाया गया। महिला रोग विशेषज्ञ न होने के कारण सामान्य इलाज ही मिल पाया। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहुंचते ही महिला की मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है।
वर्जन
चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल आने वाले मरीजों का इलाज वहां तैनात चिकित्सक कर रहे हैं।
— डॉ. भूपेश द्विवेदी, सीएमओ
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मानिकपुर, मऊ, रामनगर, रैपुरा, राजापुर, पहाड़ी और शिवरामपुर सीएचसी में से केवल राजापुर केंद्र पर महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता मिश्रा तैनात हैं। मानिकपुर में डॉ. स्वाति पाठक की नियुक्ति थी, लेकिन उन्होंने एक माह पूर्व इस्तीफा दे दिया। बाल रोग विशेषज्ञ सिर्फ राजापुर, मानिकपुर और पहाड़ी सीएचसी में कार्यरत हैं, जबकि बाकी केंद्रों पर पद खाली हैं।
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जिला अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ केवल एक हैं और बाल रोग विशेषज्ञ छह हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को मजबूरन जिला अस्पताल का रुख करना पड़ता है।
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मानिकपुर की घटना ने खड़े किए सवाल
हाल ही में मानिकपुर की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान सीएचसी लाया गया। महिला रोग विशेषज्ञ न होने के कारण सामान्य इलाज ही मिल पाया। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहुंचते ही महिला की मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है।
वर्जन
चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल आने वाले मरीजों का इलाज वहां तैनात चिकित्सक कर रहे हैं।
— डॉ. भूपेश द्विवेदी, सीएमओ