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Chitrakoot News: तुलसी लीला देख दर्शक मंत्रमुग्ध
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राजापुर (चित्रकूट)। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली में जन्मोत्सव कार्यक्रम की धूम है। तुलसी मंदिर में सुबह से रामचरित मानस पाठ का आयोजन किया जा रहा है। वृंदावन से आए कलाकारों की टीम ने नाट्य रूपांतरण कर तुलसी की लीला प्रस्तुत की। इसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गये।
तुलसी जन्मोत्सव के आठवें दिन तुलसी घाट में गोस्वामी तुलसीदास पर आधारित लीलाओं का वृंदावन के कलाकारों ने संगीतमय अभिनय के माध्यम से किया। इसमें तुलसीदास व रत्नावली के पूरे जीवन को लोगों के सामने रखा। बताया कि पत्नी रत्नावली की वजह से तुलसीदास का ह्दय परिवर्तन हुआ। रत्नावली की फटकर ने तुलसीदास को महान बनने में सहायता की थी।
तुलसीदास ने चित्रकूट के रामघाट पर प्रभु दर्शन के लिए डेरा जमाया था। माघ महीने की मौनी अमावस्या को सुबह तुलसीदास जब रामघाट पर लोगोंं को चंदन लगा रहे थे। तभी बालक रूप में भगवान राम उनके पास पहुंचे थे। भगवान राम ने स्वयं तुलसीदास का हाथ पकड़कर तिलक लगा लिया था। रामघाट में उनको प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए थे।
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महोत्सव के आयोजक वृंदावन के संत रामदास महराज ने कहा कि ईश्वर को प्राप्त करना कठिन है। उनको अहंकार धन, छल, और बल से प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि ईश्वर के प्रति लगन, आस्था, प्रेम भक्ति व सरल भाव से ही दर्शन मिल सकते हैं। गोस्वामी तुलसीदास के काव्य का दार्शनिक आधार भक्ति है। संसार असत्य है, प्रभु भक्ति ही सत्य है।
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तुलसी जन्मोत्सव के आठवें दिन तुलसी घाट में गोस्वामी तुलसीदास पर आधारित लीलाओं का वृंदावन के कलाकारों ने संगीतमय अभिनय के माध्यम से किया। इसमें तुलसीदास व रत्नावली के पूरे जीवन को लोगों के सामने रखा। बताया कि पत्नी रत्नावली की वजह से तुलसीदास का ह्दय परिवर्तन हुआ। रत्नावली की फटकर ने तुलसीदास को महान बनने में सहायता की थी।
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तुलसीदास ने चित्रकूट के रामघाट पर प्रभु दर्शन के लिए डेरा जमाया था। माघ महीने की मौनी अमावस्या को सुबह तुलसीदास जब रामघाट पर लोगोंं को चंदन लगा रहे थे। तभी बालक रूप में भगवान राम उनके पास पहुंचे थे। भगवान राम ने स्वयं तुलसीदास का हाथ पकड़कर तिलक लगा लिया था। रामघाट में उनको प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए थे।
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महोत्सव के आयोजक वृंदावन के संत रामदास महराज ने कहा कि ईश्वर को प्राप्त करना कठिन है। उनको अहंकार धन, छल, और बल से प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि ईश्वर के प्रति लगन, आस्था, प्रेम भक्ति व सरल भाव से ही दर्शन मिल सकते हैं। गोस्वामी तुलसीदास के काव्य का दार्शनिक आधार भक्ति है। संसार असत्य है, प्रभु भक्ति ही सत्य है।