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Chitrakoot News: बिचौलियों व अफसरों में दो माह में 1000 बार हुई बात
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सुधीर अग्रवाल
चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में जांच टीम ने पेंशनर व बिचौलियों समेत विभागीय आरोपी अधिकारियों के फोन कॉल डिटेल निकाले हैं। पहले दिन इसमें सबसे ज्यादा तीन बिचौलियों की आरोपी अधिकारियों से दो माह में एक हजार बार बातचीत करने का डिटेल सामने आया है। एक बिचौलिए ने तो आरोपी एटीओ से एक माह में 207 बार फोन पर बातचीत हुई है।
जिले के कोषागार विभाग में 43.13 करोड़ के हुए घोटाला मामले में 99 आरोपी के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज हुआ है। इसमें विभाग के एटीओ विकास सचान, एकाउंटेंट अशोक वर्मा(जेल में बंद), रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह(अग्रिम जमानत पर) व एटीओ संदीप श्रीवास्तव(अब मृत) शामिल हैं। कुल आरोपियों में 32 जेल में हैं।
कुल तीन करोड़ 60 लाख से अधिक की रिकवरी भी हो चुकी है। कई बार जांच में दो और एकाउंटेंट के नाम संदेह के घेरे में हैं। एसआईटी की जांच में बुधवार को खुलासा हुआ कि बिचौलियों के माध्यम से विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने पेंशनर तक पैठ बनाई। कई पेंशनरों से भी इन कर्मचारियों की सीधी सांठगांठ का खुलासा हो चुका है।
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एसआईटी की जांच में एक और खुलासा हुआ कि तीन बिचौलिए दीपक पांडेय, अमृतलाल व रणविजय ऐसे मिले हैं जिनकी विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से दो माह में एक हजार बार फोन पर बातचीत हुई है। इसमें रणविजय नामक बिचौलिए की एटीओ संदीप श्रीवास्तव(अब मृत) से 207 बार फोन पर बातचीत का रिकार्ड मिला है।
बिचौलियों में अमृतलाल के खाते में लगभग चार करोड़ रुपये मिले हैं। दीपक व रणविजय के खाते में मिलाकर लगभग पांच करोड़ मिले हैं। इसी से अंदाजा लगता है कि यह बिचौलिए इस घोटाले में कितने शातिर तरीके से शामिल थे।
इनकी विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से गहरी सांठगांठ थी। यह सब मिलकर पेंशनरों से उनके खाते से रुपये निकालकर लाते थे और विभागीय अधिकारियों तक एक निश्चित कमीशन काटने के बाद पहुंचाते थे।
एसआईटी प्रभारी अरविंद वर्मा व जांच अधिकारी अजीत पांडेय ने बताया कि कॉल डिटेल का अभी लंबा रिकार्ड है। बिचौलियों के अलावा कई पेंशनर भी ऐसे हैं जो सीधे आरोपी एटीओ व एकाउंटेंट के संपर्क में थे। इस रिकार्ड को लेकर संबधितों से पूछताछ भी की जा रही है। जिन तीन बिचौलियों का सबसे ज्यादा कॉल डिटेल मिला है
वह सब जेल में हैं। (संवाद)
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चित्रकूट। कोषागार घोटाला मामले में जांच टीम ने पेंशनर व बिचौलियों समेत विभागीय आरोपी अधिकारियों के फोन कॉल डिटेल निकाले हैं। पहले दिन इसमें सबसे ज्यादा तीन बिचौलियों की आरोपी अधिकारियों से दो माह में एक हजार बार बातचीत करने का डिटेल सामने आया है। एक बिचौलिए ने तो आरोपी एटीओ से एक माह में 207 बार फोन पर बातचीत हुई है।
जिले के कोषागार विभाग में 43.13 करोड़ के हुए घोटाला मामले में 99 आरोपी के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज हुआ है। इसमें विभाग के एटीओ विकास सचान, एकाउंटेंट अशोक वर्मा(जेल में बंद), रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह(अग्रिम जमानत पर) व एटीओ संदीप श्रीवास्तव(अब मृत) शामिल हैं। कुल आरोपियों में 32 जेल में हैं।
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कुल तीन करोड़ 60 लाख से अधिक की रिकवरी भी हो चुकी है। कई बार जांच में दो और एकाउंटेंट के नाम संदेह के घेरे में हैं। एसआईटी की जांच में बुधवार को खुलासा हुआ कि बिचौलियों के माध्यम से विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने पेंशनर तक पैठ बनाई। कई पेंशनरों से भी इन कर्मचारियों की सीधी सांठगांठ का खुलासा हो चुका है।
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एसआईटी की जांच में एक और खुलासा हुआ कि तीन बिचौलिए दीपक पांडेय, अमृतलाल व रणविजय ऐसे मिले हैं जिनकी विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से दो माह में एक हजार बार फोन पर बातचीत हुई है। इसमें रणविजय नामक बिचौलिए की एटीओ संदीप श्रीवास्तव(अब मृत) से 207 बार फोन पर बातचीत का रिकार्ड मिला है।
बिचौलियों में अमृतलाल के खाते में लगभग चार करोड़ रुपये मिले हैं। दीपक व रणविजय के खाते में मिलाकर लगभग पांच करोड़ मिले हैं। इसी से अंदाजा लगता है कि यह बिचौलिए इस घोटाले में कितने शातिर तरीके से शामिल थे।
इनकी विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से गहरी सांठगांठ थी। यह सब मिलकर पेंशनरों से उनके खाते से रुपये निकालकर लाते थे और विभागीय अधिकारियों तक एक निश्चित कमीशन काटने के बाद पहुंचाते थे।
एसआईटी प्रभारी अरविंद वर्मा व जांच अधिकारी अजीत पांडेय ने बताया कि कॉल डिटेल का अभी लंबा रिकार्ड है। बिचौलियों के अलावा कई पेंशनर भी ऐसे हैं जो सीधे आरोपी एटीओ व एकाउंटेंट के संपर्क में थे। इस रिकार्ड को लेकर संबधितों से पूछताछ भी की जा रही है। जिन तीन बिचौलियों का सबसे ज्यादा कॉल डिटेल मिला है
वह सब जेल में हैं। (संवाद)