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चित्रकूट में न हुआ समतलीकरण और न खुदा तालाब पर हो गया पूरा भुगतान
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चित्रकूट। सदर विकास खंड के एक खेत में समतलीकरण व खेत में तालाब खुदाई कार्य कागजों में कर लगभग एक लाख रुपये का भुगतान कराया जा चुका है। खेत स्वामी की मानें तो धरातल पर कोई भी कार्य नहीं हुआ। किसान ने प्रदेश सरकार के ग्राम्य विकास मंत्री समेत जिले के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच कराकर दोषी लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की है। किसान का कहना है कि इस बंदरबांट पर कार्रवाई न हुई तो वह पीएम व सीएम से भी शिकायत कर जांच कराने की मांग करेंगे।
सदर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम बरवारा के किसान बुटुवा पुत्र साधो ने बताया कि उसे बताया गया था कि मनरेगा के तहत उसके खेत का समतलीकरण व तालाब की खुदाई का कार्य भी किया जाना है। दो साल से उसके खेत में ऐसा काम नहीं हुआ है। कुछ दिन पूर्व उसे पता चला कि उसके खेत पर यह काम के नाम पर सरकारी भुगतान कराया गया है जबकि हकीकत में उसके खेत में ऐसा काम हीं नहीं हुआ। उसने विभागीय अधिकारियों से इसकी जानकारी की तो पता चला कि यह कार्य 25 अगस्त 2018 से 14 अगस्त 2020 तक तालाब निर्माण का कार्य आठ मस्टर रोल में किया जाना दर्शाया गया है। जबकि वास्तव में कोई भी तालाब किसान के खेत में आज तक नहीं खोदा गया। यह भी दावा किया कि मनरेगा के तहत कथित तालाब खुदाई में मनरेगा मजदूरों को भुगतान भी कर दिया गया।
किसान के अनुसार तालाब निर्माण के लिए आहरित धनराशि 99.294 हजार रुपये को मिलकर आपसी बंदरबांट कर लिया है। किसान ने संबंधित लोगों पर आरोप लगाया कि इतना ही नहीं कई बार ऐसे लोगों के जाबकार्ड बनवा दिए हैं जिन्हें स्वयं जानकारी नहीं है कि उनका जाबकार्ड बना है और गलत तरीके से उनके खातों में बतौर मनरेगा मजदूर करने का रुपया भी आ गया है। किसान बुटुवा ने प्रकरण की जांच किसी ईमानदार अधिकारी से कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जल्द जांच नहीं कराई गई तो वह प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे। इस संबंध में सीडीओ अमित आसेरी ने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी विभागीय अधिकारी कर्मचारियों से मांगी गई है। जांच कराकर इस पर उचित कार्रवाई होगी।
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सदर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम बरवारा के किसान बुटुवा पुत्र साधो ने बताया कि उसे बताया गया था कि मनरेगा के तहत उसके खेत का समतलीकरण व तालाब की खुदाई का कार्य भी किया जाना है। दो साल से उसके खेत में ऐसा काम नहीं हुआ है। कुछ दिन पूर्व उसे पता चला कि उसके खेत पर यह काम के नाम पर सरकारी भुगतान कराया गया है जबकि हकीकत में उसके खेत में ऐसा काम हीं नहीं हुआ। उसने विभागीय अधिकारियों से इसकी जानकारी की तो पता चला कि यह कार्य 25 अगस्त 2018 से 14 अगस्त 2020 तक तालाब निर्माण का कार्य आठ मस्टर रोल में किया जाना दर्शाया गया है। जबकि वास्तव में कोई भी तालाब किसान के खेत में आज तक नहीं खोदा गया। यह भी दावा किया कि मनरेगा के तहत कथित तालाब खुदाई में मनरेगा मजदूरों को भुगतान भी कर दिया गया।
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किसान के अनुसार तालाब निर्माण के लिए आहरित धनराशि 99.294 हजार रुपये को मिलकर आपसी बंदरबांट कर लिया है। किसान ने संबंधित लोगों पर आरोप लगाया कि इतना ही नहीं कई बार ऐसे लोगों के जाबकार्ड बनवा दिए हैं जिन्हें स्वयं जानकारी नहीं है कि उनका जाबकार्ड बना है और गलत तरीके से उनके खातों में बतौर मनरेगा मजदूर करने का रुपया भी आ गया है। किसान बुटुवा ने प्रकरण की जांच किसी ईमानदार अधिकारी से कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जल्द जांच नहीं कराई गई तो वह प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे। इस संबंध में सीडीओ अमित आसेरी ने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी विभागीय अधिकारी कर्मचारियों से मांगी गई है। जांच कराकर इस पर उचित कार्रवाई होगी।
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