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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   Teacher dies due to uncontrollable tempo collision

बेकाबू टेंपो की टक्कर से बाइक सवार शिक्षक की मौत

Thu, 12 Jul 2018 10:54 PM IST
बेकाबू टेंपो की टक्कर से बाइक सवार शिक्षक की मौत
बेकाबू टेंपो की टक्कर से बाइक सवार शिक्षक की मौत Updated Thu, 12 Jul 2018 10:54 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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चित्रकूट। बाइक से विद्यालय जा रहे शिक्षक को यात्रियों से भरी बेकाबू टेंपो ने टक्कर मार दी। जिससे शिक्षक की मौत हो गई। टेंपो छोड़ चालक भाग निकला।
दीनदयाल शोध संस्थान के सुरेंद्र पाल ग्रामोदय विद्यालय के खेलकूद विभाग के शिक्षक अमानपुर निवासी श्यामलाल (50) पुत्र महावीर प्रसाद प्रतिदिन की तरह बाइक से हेलमेट लगाकर विद्यालय जा रहे थे। जैसे ही वह रामायण मेला परिसर के पास पहुंचे कि सामने से यात्रियों से भरे टेंपो ने टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही टेंपो चालक भाग निकला, यात्री चीख पुकार करते रहे और बाइक चालक शिक्षक गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर पड़ा रहा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शिक्षक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
  घटना की जानकारी होते ही विद्यालय व डीआरआई के सैकड़ों कर्मचारी, छात्र जिला अस्पताल पहुंचे। शिक्षक के परिजनों को जानकारी दी गई। उनकी मौत की जानकारी होते ही सभी ने शोक जताया। चौकी प्रभारी केपी यादव ने बताया कि टेंपो चालक की पहचान कर ली गई है। टेंपो पुलिस के कब्जे में है। परिजनों की तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। मृतक हेलमेट पहने थे लेकिन उनके शरीर के अन्य भाग में लगी चोट से खून का रिसाव ज्यादा हो गया था।
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एक घंटा पहले निकले थे श्यामलाल
चित्रकूट। विद्यालय के स्पोर्ट्स टीचर श्यामलाल गुरुवार को घर से सुबह प्रतिदिन के समय से एक घंटा पहले निकले थे। सतना में आयोजित कुश्ती व तैराकी की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में विद्यालय की टीम को लेकर जाना था।
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स्पोर्ट्स टीचर बनने के पूर्व मृतक बेहतरीन एथलीट थे। कई खेलों में उनकी सहभागिता होती थी। जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में वह रेफरी का भी काम करते थे। शिक्षक बनने के पूर्व वह खेती व प्राइवेट नौकरी भी करते थे।


बच्चे हुए अनाथ
चित्रकूट। मृतक की पत्नी का दो साल पूर्व बीमारी के चलते निधन हो चुका है। अब उनकी मौत के बाद उनके दो पुत्र एक पुत्री अनाथ हो गए हैं।

बच सकती थी जान
चित्रकूट। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क हादसे के बाद शिक्षक लहूलुहान आधे घंटे से ज्यादा समय तक सड़क पर पड़े रहे। इस दौरान किसी ने भी उन्हें उठाने का प्रयास नहीं किया। एक युवक आगे आया और कई वाहनों को रोककर उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। हेलमेट पहनने के कारण उनके सिर पर चोट नहीं आई थी लेकिन सीने व पैर से रक्तस्त्राव जारी था। समय से उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
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