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भूगर्भ जल का दोहन भविष्य के लिए अभिशाप
चित्रकूट
Updated Sun, 11 Jun 2017 10:46 PM IST
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पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदते ग्रामीण
- फोटो : amar ujala
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। कृषि एवं जल जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन मानिकपुर विकास खंड के चुरेह केशररूआ गांव में किया गया। जिसमें जल संरक्षण व प्राकृतिक खेती की जानकारी किसानों को दी गई। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों के साथ ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संकल्प भी लिया।
अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के कार्यक्रम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सत्यप्रकाश ने कहा कि हैंडपंप व बोरवेल पानी का तत्कालीन संसाधन तो हो सकता है लेकिन यह भी भूगर्भ जल का दोहन करता है। जो भविष्य के लिए अभिशाप है। इस लिए जल का संचयन व संरक्षण करना जरूरी है।
राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के जिला विकास प्रबंधक भोला प्रसाद ने कहा कि जल,जंगल व जमीन प्रकृति की आत्मा है। कृषि जल दूतों के माध्यम से जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। संस्था के प्रबंधक गोपाल भाई ने कहा कि खाद के रूप मेे गाय के गोबर का इस्तेमाल करना चाहिए।
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पांच ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक जीवाष्म पाए जाते हैं। जो खेती के लिए बहुत उपयोगी है। किसान ने कहा इस गांव में तीन तालाब हैं इनका जीणोद्वार करवा दिया जाए तो खेत सिंचित हो जाएंगे। माया ने कहा कि छोटे प्रयास से ही जल संरक्षण के बेहतर प्रयास हो सकते हैं। ग्रामोदय विश्व विद्यालय के लल्लू राम ने जल गंगा जल बनकर देता जीवन दान गीत प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर भागवत व आशीष समेत क्षेत्र के ग्रामीण मौजूद रहे।
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चित्रकूट। कृषि एवं जल जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन मानिकपुर विकास खंड के चुरेह केशररूआ गांव में किया गया। जिसमें जल संरक्षण व प्राकृतिक खेती की जानकारी किसानों को दी गई। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों के साथ ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संकल्प भी लिया।
अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के कार्यक्रम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सत्यप्रकाश ने कहा कि हैंडपंप व बोरवेल पानी का तत्कालीन संसाधन तो हो सकता है लेकिन यह भी भूगर्भ जल का दोहन करता है। जो भविष्य के लिए अभिशाप है। इस लिए जल का संचयन व संरक्षण करना जरूरी है।
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राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के जिला विकास प्रबंधक भोला प्रसाद ने कहा कि जल,जंगल व जमीन प्रकृति की आत्मा है। कृषि जल दूतों के माध्यम से जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। संस्था के प्रबंधक गोपाल भाई ने कहा कि खाद के रूप मेे गाय के गोबर का इस्तेमाल करना चाहिए।
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पांच ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक जीवाष्म पाए जाते हैं। जो खेती के लिए बहुत उपयोगी है। किसान ने कहा इस गांव में तीन तालाब हैं इनका जीणोद्वार करवा दिया जाए तो खेत सिंचित हो जाएंगे। माया ने कहा कि छोटे प्रयास से ही जल संरक्षण के बेहतर प्रयास हो सकते हैं। ग्रामोदय विश्व विद्यालय के लल्लू राम ने जल गंगा जल बनकर देता जीवन दान गीत प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर भागवत व आशीष समेत क्षेत्र के ग्रामीण मौजूद रहे।