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उजड़े आशियानों को निहारते रहे पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Tue, 26 Apr 2016 11:54 PM IST
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खुले आसमान के नीचे करौंदिहाई पुरवा के अग्निपीड़ित परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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करौंदिहाई पुरवा में चारों तरफ सिर्फ राख के ढेर ही दिखाई दे रहे हैं। 60 से ज्यादा परिवार के महिलाएं व बच्चे खुले आसमान के नीचे बची सामग्री को तकिया बनाकर सो रहे हैं। उनकी निगाहें अपने राख हुए घरों की ओर जाती है तो आंखों से आंसू बहने लगते हैं।
थाना क्षेत्र के अर्की के करौंदिहाई पुरवा में मंगलवार को अग्निकांड से पीड़ित परिवार को दो वक्त के भोजन की व्यवस्था तो प्रधान से लेकर जिला प्रशासन और राजनीतिक दलों के लोगों ने करा दी, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।
घर राख होने के बाद सभी खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। सूखे की विभीषिका को झेल रहे पुरवा वासियों को भीषण गर्मी में धूप व उमस की परवाह नहीं है। बस उन्हें आशियाने की तलाश हैं। रात को भी कुछ परिवार स्कूल भवन के अंदर रहते हैं। पीड़ितों के लिए दोनों पहर का भोजन प्राथमिक विद्यालय में ही बनाया जा रहा है।
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कहने को तो पुरवा के घरों में लगी आग बुझ गई है, लेकिन दूसरे दिन जब इन घरों के आसपास अमर उजाला की टीम पहुंची तो कई स्थानों पर आग सुलगती मिली। खासकर लकड़ी की सामग्री मेें आग लगी है, लेकिन पूरी तरह 60 घर राख होने के कारण गृहस्वामी उधर जाने की भी नहीं सोच रहे। बस दूर से ही अपने उजडे़ आशियाने को देख लेते हैं।
आग से बची सामग्री को सहेजने में सभी परिवार लगे हैं। कुछ अधजली सामग्री को संभालकर रखते हुए चुनकी देवी ने कहा कि उनकी पुरखों की निशानी है, थोड़ी जल गई तो क्या हुआ इसे सहेज कर रखेंगी। इसके आलावा पुरवा के एक हिस्से में घरों का जला सामान पड़ा है। जहां छोटे बच्चे जाकर कुछ तलाश करते देखे गए।
पुरवा में अग्निपीड़ितों में कल्याण की पुत्री का विवाह तो हो गया। अब सबको 28 अप्रैल को कमलेश की पुत्री नीता के विवाह की चिंता है। देखना है कि उसका विवाह तय समय पर होता है या नहीं। फिलहाल अभी तक तो यही बताया गया है कि सभी मिलकर उसी तारीख को उसका भी विवाह संगीता की तरह कराएंगे।
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थाना क्षेत्र के अर्की के करौंदिहाई पुरवा में मंगलवार को अग्निकांड से पीड़ित परिवार को दो वक्त के भोजन की व्यवस्था तो प्रधान से लेकर जिला प्रशासन और राजनीतिक दलों के लोगों ने करा दी, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।
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घर राख होने के बाद सभी खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। सूखे की विभीषिका को झेल रहे पुरवा वासियों को भीषण गर्मी में धूप व उमस की परवाह नहीं है। बस उन्हें आशियाने की तलाश हैं। रात को भी कुछ परिवार स्कूल भवन के अंदर रहते हैं। पीड़ितों के लिए दोनों पहर का भोजन प्राथमिक विद्यालय में ही बनाया जा रहा है।
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कहने को तो पुरवा के घरों में लगी आग बुझ गई है, लेकिन दूसरे दिन जब इन घरों के आसपास अमर उजाला की टीम पहुंची तो कई स्थानों पर आग सुलगती मिली। खासकर लकड़ी की सामग्री मेें आग लगी है, लेकिन पूरी तरह 60 घर राख होने के कारण गृहस्वामी उधर जाने की भी नहीं सोच रहे। बस दूर से ही अपने उजडे़ आशियाने को देख लेते हैं।
आग से बची सामग्री को सहेजने में सभी परिवार लगे हैं। कुछ अधजली सामग्री को संभालकर रखते हुए चुनकी देवी ने कहा कि उनकी पुरखों की निशानी है, थोड़ी जल गई तो क्या हुआ इसे सहेज कर रखेंगी। इसके आलावा पुरवा के एक हिस्से में घरों का जला सामान पड़ा है। जहां छोटे बच्चे जाकर कुछ तलाश करते देखे गए।
पुरवा में अग्निपीड़ितों में कल्याण की पुत्री का विवाह तो हो गया। अब सबको 28 अप्रैल को कमलेश की पुत्री नीता के विवाह की चिंता है। देखना है कि उसका विवाह तय समय पर होता है या नहीं। फिलहाल अभी तक तो यही बताया गया है कि सभी मिलकर उसी तारीख को उसका भी विवाह संगीता की तरह कराएंगे।