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दादी-नानी की कहानियों तक सीमित न रह जाए गौरैया
ब्यूरो अमर उजाला चित्रकूट
Updated Sun, 20 Mar 2016 12:10 AM IST
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छत पर बच्चे को दाना खिलाती गौरैया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांवों में गौरैया को चिरैया के नाम से जाना जाता है। आधुनिकता के नाम पर पर्यावरण से हो रहे खिलवाड़ के कारण अब वह दिन दूर नहीं जब यह चिरैया महज दादी नानी की कहानियों तक ही सिमट जाएगी। पर्यावरण संतुलन में विशेष भूमिका निभाने वाली छोटी सी गौरैया को बचाने के लिए अब लोग जागरूक हो रहे हैं। इसी कारण 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया को बचाने की कवायद में दिल्ली सरकार ने गौरैया को ‘‘ राजपक्षी‘‘ घोषित किया है।
यह एक सराहनीय कदम है। स्थानीय समाजसेवी पंकज अग्रवाल, केशव शिवहरे, अजीत सिंह और शानू गुप्ता ने शनिवार को जिलेवासियों से विलुप्त होती गौरैया को पर्यावरण संतुलन के लिए बचाने की आवाज बुलंद की। सभी ने अपने घरों में इस पक्षी को दाना पानी देने के लिए जागरूक किया। गौरैया को लुप्त होने से बचाने के लिये सभी को आगे आने की आवश्यकता है।
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यह एक सराहनीय कदम है। स्थानीय समाजसेवी पंकज अग्रवाल, केशव शिवहरे, अजीत सिंह और शानू गुप्ता ने शनिवार को जिलेवासियों से विलुप्त होती गौरैया को पर्यावरण संतुलन के लिए बचाने की आवाज बुलंद की। सभी ने अपने घरों में इस पक्षी को दाना पानी देने के लिए जागरूक किया। गौरैया को लुप्त होने से बचाने के लिये सभी को आगे आने की आवश्यकता है।
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