घर-घर पूजे गए नाग देवता
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चित्रकूट। नागपंचमी का त्योहार जिले में परंपरागत तरीके से मनाया गया। घरों में सर्प के प्रतीक चिन्ह बनाकर पूजा पाठ की गई। जिले में कई स्थानों पर मेले का आयोजन किया गया। कई जगह दंगल में पहलवानों ने दांवपेंच दिखाए। सपेरों ने भी घूम-घूम पर सांपों का नृत्य दिखाया। रविवार को नागपंचमी पर सुबह महिलाएं नदियों, तालाबों में स्नान करने के बाद घरों में सर्प के प्रतीक चिन्ह बनाकर पूजापाठ किया। भगवान शिव व सर्प को दूध स्नान की भी होड़ रही। इस मौके पर जिला मुख्यालय सहित, मानिकपुर, बरगढ़, राजापुर, पहाड़ी, मऊ, भरतकूप क्षेत्रों मेें कई स्थानों में मेला का आयोजन किया गया।
मेले में खान, पान के अलावा बर्तनों और खिलौनों की दुकानें लगी रही। बच्चों के लिए झूले भी लगे रहे। बच्चों ने दुकानदारों से कार, हेलीकाप्टर, फिरंगी, बांसुरी, झुनझुना भी खरीदा। रक्षाबंधन के त्यौहार के लिए कजेलिया बोने को मिट्टी भी युवतियां मेला परिसर से ले गईं। ग्रामीण इलाकाें में सपेरे सर्प लेकर पहुंचे तो लोग घरों से दर्शन करने को निकल आए। बारिश होने के बावजूद शंकर बाजार में लगे मेले में बच्चों की भारी भीड़ रही। पं रामभवन द्विवेदी का कहना कि नागपंचमी का त्योहार बहुत ही शुभ दिन होता है। सर्प के दर्शन होने से जीवन में होने वाली हानि नहीं होती है। बनकट गांव में दंगल का भी आयोजन किया गया।