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Chitrakoot News: भाई को तिलक लगाकर बहनों ने लिया रक्षा का संकल्प
Thu, 23 Oct 2025 10:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Thu, 23 Oct 2025 10:56 PM IST
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12 सीकेटीपी-13- परिचय-भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने के बाद मिठाई खिलाती बहन । संवाद
चित्रकूट। भैयादूज का पर्व परंपरागत व हर्षोल्लास के साथ मनाया। बहनों ने भाइयों के माथे में तिलक कर मिष्ठान खिलाकर दीर्घायु की कामना की। भाईयों ने भी उपहार देकर आशीर्वाद लिया।
भैयादूज पर बहनों ने भाईयों को तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना की। शहर में पूरे दिन चहल-पहल देखी गई। खासकर मिठाई की दुकानाें में भीड़ बनी रही। व्यापारियों ने दुकानाें में पूजा-पाठ कर व्यवसाय शुरू किया। कायस्थ समाज ने कलम पूजन कराया। सवेरे से शहर में मिठाई की दुकानाें में भारी भीड़ लगी रही। नए कपड़े पहने छोटे-छोटे बच्चों ने जमकर मिठाई की खरीददारी की। घरों में पूजन-पाठ के बाद बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया।
मिठाई खिलाकर दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी समुचित उपहार देकर बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। बुद्धिजीवी वर्ग ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर सांगोपांग विधि से पूजन किया और विद्यादायिनी मां से आशीर्वाद लिया। इसी क्रम में ही व्यापारियों ने भी प्रतिष्ठानों में पूजन-पाठ कराया। सवेरे से दुकानों में साफ-सफाई कर मां सरस्वती की मूर्ति रखकर कागज-कलम, दवात की पूजा की और धनिया- गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद अर्पण किया।
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भैयादूज पर बहनों ने भाईयों को तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना की। शहर में पूरे दिन चहल-पहल देखी गई। खासकर मिठाई की दुकानाें में भीड़ बनी रही। व्यापारियों ने दुकानाें में पूजा-पाठ कर व्यवसाय शुरू किया। कायस्थ समाज ने कलम पूजन कराया। सवेरे से शहर में मिठाई की दुकानाें में भारी भीड़ लगी रही। नए कपड़े पहने छोटे-छोटे बच्चों ने जमकर मिठाई की खरीददारी की। घरों में पूजन-पाठ के बाद बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया।
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मिठाई खिलाकर दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी समुचित उपहार देकर बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। बुद्धिजीवी वर्ग ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर सांगोपांग विधि से पूजन किया और विद्यादायिनी मां से आशीर्वाद लिया। इसी क्रम में ही व्यापारियों ने भी प्रतिष्ठानों में पूजन-पाठ कराया। सवेरे से दुकानों में साफ-सफाई कर मां सरस्वती की मूर्ति रखकर कागज-कलम, दवात की पूजा की और धनिया- गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद अर्पण किया।
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