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सूबों की सरहद में नहीं बंधेगी श्रीराम की कर्मस्थली
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 23 Oct 2017 12:48 PM IST
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अयोध्या में दीपावली मनाने के बाद सीधे धर्मनगरी चित्रकूट आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट को सूबों की सरहद में नहीं बंधने देंगे। इसे ‘फ्री जोन’ बनाकर सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यह बात मुख्यमंत्री श्री योगी ने रविवार को देर शाम निर्मोही अखाड़ा में साधू-संतों के साथ बैठक में कही।
सूर्यास्त के समय चरखारी (महोबा) से हेलीकाप्टर से यहां आए मुख्यमंत्री श्री योगी ने यहां सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्मोही अखाड़ा के सभागार में संतों के साथ बैठक की। इसमें यहां के मुख्य 7 अखाड़ों और 11 मंदिर के महंत शामिल थे। लगभग 30 मिनट तक चली यह बैठक पूरी तरह गोपनीय रही।
मीडिया को इससे दूर रखा गया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे निर्मोही अखाड़ा के महंत ओंकारदास ने मुख्यमंत्री से चित्रकूट की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह धर्मनगरी यूपी और एमपी में बंटी हुई है। इससे दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं को काफी असुविधा हो रही है। साथ ही धर्मनगरी का विकास अवरुद्ध हो रहा है। महंतों ने बेबाकी से कहा कि राजनीतिक नेता चुनाव के समय संतों से भी तमाम वादे कर जाते हैं।
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बाद में उन पर अमल नहीं होता। बुंदेलखंड की सबसे ज्वलंत समस्या अन्ना प्रथा और किसानों के अन्य मुद्दों पर भी महंतों ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया।सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने संतों को भरोसा दिलाया कि धर्मनगरी चित्रकूट की समस्याएं जो उन्होंने उनके संज्ञान में लाईं हैं उनका जल्द निदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यहां राम की नगरी में बुनियादी सुविधाओं का रामराज्य लाया जाएगा।
बिजली-पानी भरपूर मिलेगा। उन्होंने मंदाकिनी नदी के प्रदूषण पर कहा कि इसे सरयू नदी की तरह दूर कराया जाएगा। भगवान श्रीराम की कर्मस्थली का विकास जन्मस्थली अयोध्या की तर्ज पर होगा। सरकार सही मंशा से काम कर रही है। मंदाकिनी यहां की जीवन रेखा है। भगवान राम साढ़े 11 साल तक यहां रहे इसका आज भी आभास होता है। इसके पूर्व मुख्यमंत्री को संतों ने 21 सूत्री ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने निर्मोही अखाड़ा के गोलोकवासी महंत रामाश्रय दास की समाधि पर पुष्प चढ़ाए।
कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर की बात
चित्रकूट (ब्यूरो)। साधू-संतों की बैठक में अयोध्या मुद्दा अछूता नहीं रहा। अपने बीच मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संतों ने सवाल किया कि आयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा ? मुख्यमंत्री ने नपे-तुले अंदाज में समझाया कि फिलहाल यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। इसलिए इसमें अभी वह कुछ नहीं कह सकते। न्यायालय का फैसला आने के बाद देखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश के धर्मस्थलों का मान-सम्मान बरकरार रखा जाएगा।
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सूर्यास्त के समय चरखारी (महोबा) से हेलीकाप्टर से यहां आए मुख्यमंत्री श्री योगी ने यहां सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्मोही अखाड़ा के सभागार में संतों के साथ बैठक की। इसमें यहां के मुख्य 7 अखाड़ों और 11 मंदिर के महंत शामिल थे। लगभग 30 मिनट तक चली यह बैठक पूरी तरह गोपनीय रही।
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मीडिया को इससे दूर रखा गया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे निर्मोही अखाड़ा के महंत ओंकारदास ने मुख्यमंत्री से चित्रकूट की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह धर्मनगरी यूपी और एमपी में बंटी हुई है। इससे दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं को काफी असुविधा हो रही है। साथ ही धर्मनगरी का विकास अवरुद्ध हो रहा है। महंतों ने बेबाकी से कहा कि राजनीतिक नेता चुनाव के समय संतों से भी तमाम वादे कर जाते हैं।
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बाद में उन पर अमल नहीं होता। बुंदेलखंड की सबसे ज्वलंत समस्या अन्ना प्रथा और किसानों के अन्य मुद्दों पर भी महंतों ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया।सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने संतों को भरोसा दिलाया कि धर्मनगरी चित्रकूट की समस्याएं जो उन्होंने उनके संज्ञान में लाईं हैं उनका जल्द निदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यहां राम की नगरी में बुनियादी सुविधाओं का रामराज्य लाया जाएगा।
बिजली-पानी भरपूर मिलेगा। उन्होंने मंदाकिनी नदी के प्रदूषण पर कहा कि इसे सरयू नदी की तरह दूर कराया जाएगा। भगवान श्रीराम की कर्मस्थली का विकास जन्मस्थली अयोध्या की तर्ज पर होगा। सरकार सही मंशा से काम कर रही है। मंदाकिनी यहां की जीवन रेखा है। भगवान राम साढ़े 11 साल तक यहां रहे इसका आज भी आभास होता है। इसके पूर्व मुख्यमंत्री को संतों ने 21 सूत्री ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने निर्मोही अखाड़ा के गोलोकवासी महंत रामाश्रय दास की समाधि पर पुष्प चढ़ाए।
कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर की बात
चित्रकूट (ब्यूरो)। साधू-संतों की बैठक में अयोध्या मुद्दा अछूता नहीं रहा। अपने बीच मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संतों ने सवाल किया कि आयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा ? मुख्यमंत्री ने नपे-तुले अंदाज में समझाया कि फिलहाल यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। इसलिए इसमें अभी वह कुछ नहीं कह सकते। न्यायालय का फैसला आने के बाद देखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश के धर्मस्थलों का मान-सम्मान बरकरार रखा जाएगा।