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भारतीय संस्कृति वाली शिक्षाप्रणाली से ही बचेगा सनातन धर्म

Wed, 07 Aug 2019 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Aug 2019 11:09 PM IST
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Sanatan Dharma will be saved from the education system of Indian culture
Sanatan Dharma will be saved from the education system of Indian culture - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी जय मिश्रा का तिलक लगाकर व अंगवस्त्र पहनाकर वैदिक रीति रिवाज से कई पीठाधीश्वर व संत महंतों की मौजूदगी में रामचंद्रदास नामकरण किया गया। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर आयोजित पट्टाभिषेक कार्यक्रम में जगद्गुरु ने कहा कि आधुनिक युग में चाटुकारिता हावी है जिससे भारतीय संस्कृति लोग भूल रहे हैं। सनातन धर्म की रक्षा के लिए वह जीवनपर्यंत काम करते रहेंगे। योगगुरु बाबा रामदेव ने पुरानी मैकाले शिक्षाप्रणाली को हटाकर भारतीय शिक्षा परिषद के अधीन भारतीय संस्कृति की शिक्षा की वकालत की। जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित राज्य घोषित किए जाने पर प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह को बधाई देते हुए कहा कि पहले हुई एतिहासिक गलतियों को सुधारने का समय चल रहा है।
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बुधवार को धर्मनगरी के प्रमोदवन स्थित श्रीतुलसी पीठ सभागार में पट्टाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी महराज व योग बाबा रामदेव ने जगद्गुरुरामभद्राचार्य के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जगदगुरु ने अपने शिष्य जयमिश्रा को नयानाम रामचंद्र दास देकर उत्तराधिकारी का पट्टाधारण कराया। सभी संत महंतों ने रामचंद्रदास का तिलक कर अंगवस्त्र पहनाए। जगदगुरु ने लिखित उत्तराधिकारी पत्र भी दिया। कहा अभी उन्हें देश हित में कई काम करने हैं। खासकर विकलांग विश्वविद्यालय को केंद्रीय विवि बनवाने के लिए प्रयास जारी हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री ने भी समिति बना दी है। कई किताबों की रचना कर देश में संस्कृति बचाने की शिक्षा दिए जाने का प्रयास करना है। योगगुरु बाबारामदेव ने कहा कि आज देश में युवा चरित्रवान व योग्य साधुओं की कमी होती जा रही है। उन्होंने हिंदु संस्कृति को बचाने के लिए पुरजोर कोशिश की जा रही है। जगदगुरु रामभद्राचार्य की हस्तलिखित पुस्तकों को पतंजलि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्र्रम में शामिल किया जा रहा है। विदेशी शिक्षण प्रणाली पर करारा प्रहार कर कहा कि मुस्लिम में सिर्फ कुरान व ईसाई में सिर्फ बाइबिल ही हैं जिन्हें दो तीन माह में पढ़कर लोग याद कर सकते हैं लेकिन हिंदू धर्म में चार वेद गीता, रामचरित मानस व महाभारत जैसे ग्रंथ हैं जिन्हें जीवन पर्यंत पढ़ने के बाद भी कंठस्थ नहीं कर सकते।
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कार्यक्रम में जगदगुरु श्रीराघवाचार्य अयोध्या, वृंदावन के विख्यात कथा वक्ता कौशल महराज, वृंदावन मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य, राजस्थान के श्यामशरण देवाचार्य के पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महराज, मथुरा के गोकुलधाम के रमणरेती महराज, विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश शर्मा, अयोध्या के कमलनयनदास, दिगंबर अखाड़ा के दिव्यजीवन दास, शिवश्ंाकर दास, प्रदेश के मंत्री मोती सिंह, संजय जोशी, सांसद प्रभात झा, नवलेश दीक्षित, मदनदास, राम हृदयदास ने कहा कि जगद्गुुरु ने सदैव सनातन धर्म की रक्षा के लिए समाजोपयोगी काम किया है। उनसे सभी प्रेरणा लेते हैं। उन्होंने जो विकलांग विश्वविद्यालय का संचालन कराया है वह अद्भुत है। अब उन्होंने अपना उत्तराधिकारी बनाकर जीवन में उपयोगी किताबों के लेखन व विवि को आगे बढ़ाने का जो संकल्प लिया है वह पूरा होगा। सभी ने उत्तराधिकारी रामचंद्रदास को साधु संतों की दुनिया के नियमों का पालन कर श्रीतुलसी पीठ का सम्मान बढ़ाने की हिदायत भी दी।
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