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कुएं में गिरने से सांभर की मौत

Wed, 04 Jul 2018 11:07 PM IST
कुएं में गिरने से सांभर की मौत
कुएं में गिरने से सांभर की मौत Updated Wed, 04 Jul 2018 11:07 PM IST
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Sambhar death due to falling in well
The well - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ब्यूरो
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मानिक पुर। रानीपुर वन्यजीव अभ्यारण के मारकुं डी रेंज अंतर्गत डीपू गांव में जंगल से भटककर पहुंचा सांभर कुएं में गिर गया। रातभर वह कुएं में पड़ा रहा सुबह कुएं के पास पहुंचे ग्रामीणों ने अंदर झांककर देखा तो वन विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी। ग्रामीणों का आरोप है कुछ देर बाद खाली हाथ पहुंचे वनकर्मी बस खड़े तमाशा देखते रहे और ग्रामीणों ने रस्सी से किसी तरह उसे जीवित बाहर निकाला। सांभर के शरीर पर कई चोट के निशान थे जिससे वह चलने में असमर्थ था। बताया गया है कि संाभर पानी की तलाश में भटकते हुए बस्ती तक पहुंच गया था। इलाज के लिए मुख्यालय लाते समय उसकी मौत हो गई है।
  बुधवार की सुबह मारकुंडी थानाक्षेत्र के डीपू गांव के कुएं में सांभर गिरने की जानकारी होते ही सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि इसकी तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। किसी के न आने पर गांव के दीपक, जगमोहन, नारायण प्रसाद, राजा व अइलाहू ने सांभर को निकालने का प्रयास शुरू किया। गांव में अन्य संसाधन न होने से ग्रामीण रस्सी का फंदा बनाकर नीचे फेंका जो सांभर के गले में पड़ते ही उसे धीरे-धीरे ऊपर लाना शुरू किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान वन विभाग के वन दरोगा देवेंद्र गौतम, कामता प्रसाद, फारेस्ट गार्ड सियाराम, लिपिक आरके सिंह मौके पर खाली हाथ पहुंचे। ग्रामीण अपना प्रयास करते रहे लेकिन वनकर्मियों ने कोई मदद नहीं की। जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश भी रहा लेकिन सभी का ध्यान पहले सांभर को जिंदा निकालने में लगा रहा।
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 लगभग दो घंटे के प्रयास के बाद ग्रामीणों ने किसी तरह बाहर जिंदा निकाल लिया। सांभर के गले, सिर, पैर व पेट के कई स्थानों पर चोट लगने से खून भी निकल रहा था। वह चलने फिरने में असमर्थ होने के कारण कुछ दूर जाकर बैठ गया। इसके बाद वनकर्मी भी चले गए। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी जिले के आला अधिकारियों को दी है। इस मामले में मारकुंडी वन रेंजर नफीस खान ने बताया कि यह मामला रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र का है। उधर रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र के क्षेत्रीय वनाधिकारी त्रिवेणी प्रसाद ने बताया कि आरोप गलत हैं। वनकर्मियों ने उसे निकालने में मदद की लेकिन इलाज के लिए ट्रैक्टर से लाते समय उसकी मौत हो गई। उसका पोस्टमार्टम कराने के बाद शव डीएफओ कार्यालय के पीछे दफनाया गया है।
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