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निलंबित डिप्टी डायरेक्टर व इंजीनियर पर जालसाजी व धोखाधड़ी की भी रिपोर्ट
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चित्रकूट। शहर के गल्लामंडी में निर्माण कार्य में बिना काम कराए ठेकेदार को आठ करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान करने के मामले में उप निदेशक व दो इंजीनियरों को निलंबित कर देने पर जिले में हड़कंप मच गया है। सदर कोतवाली में इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज में अब जालसाजी व धोखाधड़ी की भी धाराएं बढ़ा दी गई हैं। इसके पूर्व इन पर गबन व झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
सपा शासन काल में कर्वी स्थित गल्लामंडी में सपा शासन काल में विशिष्ट मंडी स्थल बनाने का निर्णय लिया था। इस परियोजना की कुल लागत 57.89 रुपये स्वीकृत की गई थी। परियोजना को मई 2015 तक पूरा कराना था। जिसमें संबंधित ठेकेदार को 8 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया। इस मामले में अवैध रूप से पेमेंट के दोषी तत्कालीन उप निदेशक निर्माण एमएस कांत, तत्कालीन सहायक अभियंता अनिल त्रिपाठी और अवर अभियंता रामेंद्र सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा संबंधित फर्म पर अनुबंध रद्द कर 4 .85 करोड़ रुपये की पेनाल्टी भी लगाई गई है। कहा जा रहा है इस मामले में अभी अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने 15 व 17 अक्तूबर को इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर मामले को सबके सामने लाया था। 16 नवंबर को सदर कोतवाली में इन अधिकारियों के खिलाफ गबन व झूठी रिपोर्ट भेजने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसी आधार पर इनका निलंबन किया गया है। अब इन तीनों पर धोखाधड़ी व जालसाजी करने की धारा 420,467,468 व 471 की धारा बढ़ा दी गई है। शहर कोतवाल अनिल सिंह ने बताया कि पूरे मामले में जांच टीम गठित की गई है। जल्द ही आरोपियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
गल्लामंडी के निर्माण कार्य में घटिया कार्य भी किया गया
चित्रकूट। शहर के गल्लामंडी में जब से निर्माण कार्य शुरू हुआ था उसी समय से घटिया निर्माण को लेकर कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने मामला उठाया था। जिसमें आरोप लगाया था मंडी परिषद में घटिया कार्य किया जा रहा है। आवाज तो उठी लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। इसके लिए 57.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके तहत इसके तहत दुकानें, नीलामी के चबूतरे, गोदाम, कैंटीन, जलाशय, कृषक विश्राम गृह आदि का निर्माण कार्य किया गया है। जिसको लेकर पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, माकपा के मंडल सचिव रुद्र प्रसाद मिश्र सहित किसान नेताओं ने आरोप लगाया था कि मंडी परिषद में घटिया कार्य किया जा रहा है। इसके बाद भी मामला दबा दिया गया। भाजपा की सरकार बनने के बाद पता चला कि निर्माण कार्य करने वाली फर्म को एडवंास भुगतान 8 करोड़ रुपये कर दिए गए। पर दोषी इंजीनियरों व फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई। नेताओं व समाज सेवियों ने आरोप लगाया कि मंडी परिषद के निर्माण कार्य की भी जांच कराई जाए।
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सपा शासन काल में कर्वी स्थित गल्लामंडी में सपा शासन काल में विशिष्ट मंडी स्थल बनाने का निर्णय लिया था। इस परियोजना की कुल लागत 57.89 रुपये स्वीकृत की गई थी। परियोजना को मई 2015 तक पूरा कराना था। जिसमें संबंधित ठेकेदार को 8 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया। इस मामले में अवैध रूप से पेमेंट के दोषी तत्कालीन उप निदेशक निर्माण एमएस कांत, तत्कालीन सहायक अभियंता अनिल त्रिपाठी और अवर अभियंता रामेंद्र सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा संबंधित फर्म पर अनुबंध रद्द कर 4 .85 करोड़ रुपये की पेनाल्टी भी लगाई गई है। कहा जा रहा है इस मामले में अभी अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने 15 व 17 अक्तूबर को इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर मामले को सबके सामने लाया था। 16 नवंबर को सदर कोतवाली में इन अधिकारियों के खिलाफ गबन व झूठी रिपोर्ट भेजने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसी आधार पर इनका निलंबन किया गया है। अब इन तीनों पर धोखाधड़ी व जालसाजी करने की धारा 420,467,468 व 471 की धारा बढ़ा दी गई है। शहर कोतवाल अनिल सिंह ने बताया कि पूरे मामले में जांच टीम गठित की गई है। जल्द ही आरोपियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
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गल्लामंडी के निर्माण कार्य में घटिया कार्य भी किया गया
चित्रकूट। शहर के गल्लामंडी में जब से निर्माण कार्य शुरू हुआ था उसी समय से घटिया निर्माण को लेकर कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने मामला उठाया था। जिसमें आरोप लगाया था मंडी परिषद में घटिया कार्य किया जा रहा है। आवाज तो उठी लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। इसके लिए 57.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके तहत इसके तहत दुकानें, नीलामी के चबूतरे, गोदाम, कैंटीन, जलाशय, कृषक विश्राम गृह आदि का निर्माण कार्य किया गया है। जिसको लेकर पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, माकपा के मंडल सचिव रुद्र प्रसाद मिश्र सहित किसान नेताओं ने आरोप लगाया था कि मंडी परिषद में घटिया कार्य किया जा रहा है। इसके बाद भी मामला दबा दिया गया। भाजपा की सरकार बनने के बाद पता चला कि निर्माण कार्य करने वाली फर्म को एडवंास भुगतान 8 करोड़ रुपये कर दिए गए। पर दोषी इंजीनियरों व फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई। नेताओं व समाज सेवियों ने आरोप लगाया कि मंडी परिषद के निर्माण कार्य की भी जांच कराई जाए।
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