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यमुना पयस्वनी नदी में बाढ़ से कार्य हो रहे प्रभावित
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फोटो-6- यमुना नदी का पानी अर्की सरधुआ तक आने के बाद नाव से सुरक्षित स्थान पर जाते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
मऊ/राजापुर(चित्रकूट)। यमुना व पयस्वनी नदी में जलस्तर बढ़ने से नदी-नाले भी उफान पर है। जिससे कई कार्य प्रभावित हो रहे है। फसल में पानी भर जाने से किसानों की फसलें भी बर्बाद हो रही है।
मऊ क्षेत्र के गांव से कस्बों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा है। मंडौर गांव के दुधिया राकेश कुमार, मवई कला गांव के अर्जुन प्रसाद ने बताया कि बाढ़ की समस्या के कारण दूध बेचने नहीं जा पा रहे है। मजदूर सुनील कुमार, आरती व मोनू ने बताया कि गांव से मजदूरी करने के लिए वह लोग रोजना मऊ कस्बा जाते थे। इस समय कार्य बंद है। सबसे अधिक नुकसान सब्जी उगाने वाले किसानों का हुआ है। राजापुर के तिरहार क्षेत्र के तटवर्ती के दर्जनों गांव की बिजली दो दिन से बंद है। लोग बरसात के समय रात में टार्चों के सहारे यमुना के बढ़ते हुए पानी को देखने को मजबूर है। जिला प्रशासन ग्रामीणों के आने जाने के लिए कई स्थानों पर नाव चलवा रही है। शनिवार को शाम सात बजे तक 90.48 मीटर तक पहुंच गया था। खतरे का निशान 93.20 मीटर है।
खेतों में पानी भरने से फसल हुई खराब
मऊ/राजापुर। यमुना नदी में बाढ़ आने किसानों की फसलें डूब गई है। किसान दयाशंकर त्रिपाठी, देव नाथ उमेश त्रिपाठी, राजेश व इंद्रेश त्रिपाठी ने बताया कि खाद, बीज जोताई करने में फसल तैयार करने में इस समय अधिक लागत लगती है। यमुना में बाढ़ आने से उनकी तिल की फसल पूरी तरह से डूब गई। वही राजापुर क्षेत्र में अर्की व विलास गांव के कुछ किसानों की खेतों में पानी भर जाने से खरीफ की फसल को नुकसान हुआ है। तिरहार क्षेत्र के भारतीय किसान यूनियन के जिला संयोजक छोटे पिढ़िया ने बताया कि लगभग डेढ़ दर्जन गांव की खरीफ की फसलें पूरी तरह से डूबकर सड़ गई हैं। ग्राम पंचायत भेदहदू के पूर्व प्रधान राजकुमार त्रिपाठी ने बताया कि मूड़े हार में बोई खरीफ की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं
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मऊ क्षेत्र के गांव से कस्बों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा रहा है। मंडौर गांव के दुधिया राकेश कुमार, मवई कला गांव के अर्जुन प्रसाद ने बताया कि बाढ़ की समस्या के कारण दूध बेचने नहीं जा पा रहे है। मजदूर सुनील कुमार, आरती व मोनू ने बताया कि गांव से मजदूरी करने के लिए वह लोग रोजना मऊ कस्बा जाते थे। इस समय कार्य बंद है। सबसे अधिक नुकसान सब्जी उगाने वाले किसानों का हुआ है। राजापुर के तिरहार क्षेत्र के तटवर्ती के दर्जनों गांव की बिजली दो दिन से बंद है। लोग बरसात के समय रात में टार्चों के सहारे यमुना के बढ़ते हुए पानी को देखने को मजबूर है। जिला प्रशासन ग्रामीणों के आने जाने के लिए कई स्थानों पर नाव चलवा रही है। शनिवार को शाम सात बजे तक 90.48 मीटर तक पहुंच गया था। खतरे का निशान 93.20 मीटर है।
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खेतों में पानी भरने से फसल हुई खराब
मऊ/राजापुर। यमुना नदी में बाढ़ आने किसानों की फसलें डूब गई है। किसान दयाशंकर त्रिपाठी, देव नाथ उमेश त्रिपाठी, राजेश व इंद्रेश त्रिपाठी ने बताया कि खाद, बीज जोताई करने में फसल तैयार करने में इस समय अधिक लागत लगती है। यमुना में बाढ़ आने से उनकी तिल की फसल पूरी तरह से डूब गई। वही राजापुर क्षेत्र में अर्की व विलास गांव के कुछ किसानों की खेतों में पानी भर जाने से खरीफ की फसल को नुकसान हुआ है। तिरहार क्षेत्र के भारतीय किसान यूनियन के जिला संयोजक छोटे पिढ़िया ने बताया कि लगभग डेढ़ दर्जन गांव की खरीफ की फसलें पूरी तरह से डूबकर सड़ गई हैं। ग्राम पंचायत भेदहदू के पूर्व प्रधान राजकुमार त्रिपाठी ने बताया कि मूड़े हार में बोई खरीफ की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं

फोटो-5- यमुना नदी के पानी से सब्जी की फसल बर्बाद होने पर दिखाता किसान। संवाद- फोटो : CHITRAKOOT
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