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तुलसी के राम समस्त लोगों के राम: डॉ. श्रीराम
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फोटो-15- तुलसी शोधसंस्थान में गोष्ठी के दौरान मंचासीन विद्वतजन। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग की जनजातीय लोक कला बोली विकास अकादमी व तुलसी शोध संस्थान के तत्वावधान में व्याख्यान व भक्ति गायन तुलसी भवन नयागांव में आयोजित हुआ। वरिष्ठ ललित निबंधकार डा. श्रीराम परिहार खंडवा ने कहा कि संत महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के राम समाज के समस्त लोगों के राम हैं।
निबंधकार ने कहा कि प्रभु श्रीराम की नरलीला का उद्देश्य निजी सुखों और स्वार्थ का राष्ट्र के लिए त्याग, अनीति व राक्षसों के अत्याचार से समाज को मुक्त कराने का संघर्ष और समाज के सबसे उपेक्षित गरीब जनता की सेवा रहा है। कार्यक्त्रस्म के संयोजक प्रो. अवधेश प्रसाद पांडेय ने कहा कि अयोध्या के राम ने वैभव को क्षण भर में त्यागकर चित्रकूट में तप किया।
विशिष्ट अतिथि रामानन्द सिंह ने कहा कि अस्तित्व के साथ एकाकार होने की प्रेरणा श्रोत तो राम का ही जीवन है। समाज का सुख और दु:ख वे अपना सुख दु:ख मानते हैं, इसीलिए वे सबके राम हैं।
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कार्यक्त्रस्म के द्वितीय सोपान भक्ति गायन में प्रसिद्ध लोक गायिका डा. तृप्ति नागर उज्जैन और साथी कलाकारों ने छायावादी महाकवि निराला की रचना राम की भक्ति पूजा का संवाद रचनात्मक गायन अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। कार्यक्त्रस्म अधिकारी दीपक कुमार गुप्ता व तुलसी शोध संस्थान ने उपस्थित साहित्यकार, कलाकारों, अतिथियों को सम्मानित किया। तुलसी शोध संस्थान के रामेश्वर प्रसाद पटेल, राधा मोहन मिश्र आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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निबंधकार ने कहा कि प्रभु श्रीराम की नरलीला का उद्देश्य निजी सुखों और स्वार्थ का राष्ट्र के लिए त्याग, अनीति व राक्षसों के अत्याचार से समाज को मुक्त कराने का संघर्ष और समाज के सबसे उपेक्षित गरीब जनता की सेवा रहा है। कार्यक्त्रस्म के संयोजक प्रो. अवधेश प्रसाद पांडेय ने कहा कि अयोध्या के राम ने वैभव को क्षण भर में त्यागकर चित्रकूट में तप किया।
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विशिष्ट अतिथि रामानन्द सिंह ने कहा कि अस्तित्व के साथ एकाकार होने की प्रेरणा श्रोत तो राम का ही जीवन है। समाज का सुख और दु:ख वे अपना सुख दु:ख मानते हैं, इसीलिए वे सबके राम हैं।
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कार्यक्त्रस्म के द्वितीय सोपान भक्ति गायन में प्रसिद्ध लोक गायिका डा. तृप्ति नागर उज्जैन और साथी कलाकारों ने छायावादी महाकवि निराला की रचना राम की भक्ति पूजा का संवाद रचनात्मक गायन अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। कार्यक्त्रस्म अधिकारी दीपक कुमार गुप्ता व तुलसी शोध संस्थान ने उपस्थित साहित्यकार, कलाकारों, अतिथियों को सम्मानित किया। तुलसी शोध संस्थान के रामेश्वर प्रसाद पटेल, राधा मोहन मिश्र आदि का सराहनीय सहयोग रहा।