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Chitrakoot News: राष्ट्रपति ने डॉ. बीके जैन को दिया पद्मश्री सम्मान
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पुरस्कार लेते बीके जैन।
- फोटो : स्वयं
चित्रकूट/खोही। नेत्र चिकि त्सालय जानकीकुंड के निदेशक व ट्रस्टी डॉ. बीके जैन को मंगलवार की शाम नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्म ने पद्मश्री सम्मान दिया। इस पर स्थानीय निवासियों ने खुशी जताई है।
डाॅ. जैन जानकीकुंड अस्पताल में पांच दशक से अंधत्व निवारण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वह 1970 में चित्रकूट आए थे। उनके परिश्रम व दूरदर्शिता से सदगुरू नेत्र चिकित्सालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की।
डाॅ. जैन के नेतृत्व में हर साल आंखों के करीब 1.55 लाख ऑपरेशन किए जा रहे हैं। 17 लाख से अधिक लोगों तक नेत्र चिकित्सा की सुविधाएं हर साल उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस चिकित्सालय से यूपी व एमपी क्षेत्र में 130 प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र भी संचालित होते हैं।
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विशेष उपलब्धि के तौर पर डाॅ. जैन को पांच जिलों को मोतियाबिंद रहित क्षेत्र बनाने का भी श्रेय है। इसमें पन्ना्, सतना, बांदा, हमीरपुर व फतेहपुर जिले शामिल हैं। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने पद्यश्री सम्मान दिया है।
डॉ. जैन को इसके पूर्व कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके इस काम में पत्नी ऊषा जैन व पुत्र डॉ. इलेश जैन बखूबी भूमिका निभा रहे हैं। दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, कामदगिरि प्रमुख द्वार के संत मदन गोपाल दास, दिव्य जीवनदास आदि ने इस पर खुशी जताई है।
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डाॅ. जैन जानकीकुंड अस्पताल में पांच दशक से अंधत्व निवारण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वह 1970 में चित्रकूट आए थे। उनके परिश्रम व दूरदर्शिता से सदगुरू नेत्र चिकित्सालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की।
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डाॅ. जैन के नेतृत्व में हर साल आंखों के करीब 1.55 लाख ऑपरेशन किए जा रहे हैं। 17 लाख से अधिक लोगों तक नेत्र चिकित्सा की सुविधाएं हर साल उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस चिकित्सालय से यूपी व एमपी क्षेत्र में 130 प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र भी संचालित होते हैं।
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विशेष उपलब्धि के तौर पर डाॅ. जैन को पांच जिलों को मोतियाबिंद रहित क्षेत्र बनाने का भी श्रेय है। इसमें पन्ना्, सतना, बांदा, हमीरपुर व फतेहपुर जिले शामिल हैं। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने पद्यश्री सम्मान दिया है।
डॉ. जैन को इसके पूर्व कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके इस काम में पत्नी ऊषा जैन व पुत्र डॉ. इलेश जैन बखूबी भूमिका निभा रहे हैं। दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, कामदगिरि प्रमुख द्वार के संत मदन गोपाल दास, दिव्य जीवनदास आदि ने इस पर खुशी जताई है।