{"_id":"6740d311146c8bc42506e3b4","slug":"playing-with-hospital-blanket-weight-reduced-by-half-a-kilo-length-and-width-also-reduced-chitrakoot-news-c-215-1-sknp1043-111224-2024-11-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: अस्पताल के कंबल में खेल, आधा किलो कम मिला वजन, लंबाई और चाैड़ाई भी कम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: अस्पताल के कंबल में खेल, आधा किलो कम मिला वजन, लंबाई और चाैड़ाई भी कम
विज्ञापन
चित्रकूट। 100 बेड वाले जिला अस्पताल में मरीजों के लिए कंबल तो पर्याप्त होने का दावा किया गया है, लेकिन सर्दी पड़ने के बाद भी मरीजों को बेड में कंबल नहीं मिले। कई मरीज के तीमारदार घरों से कंबल लेकर आए हैं। कंबल की खरीद व क्वालिटी में भी फर्क मिला है। नियमानुसार कंबल के वजन से लगभग पांच सौ ग्राम प्रत्येक कंबल कम मिला है। यहां तक कि लंबाई चौड़ाई में भी कुछ अंतर सामने आया है।
जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड से लेकर भर्ती होने वाले मरीजों के वार्ड में कंबल नजर नहीं आते हैं। इतना जरूर है कि जननी सुरक्षा योजना वाले प्रसव कक्ष के हर बेड में कंबल मौजूद रहता है यह स्थिति अन्य वार्ड के बेड में नहीं दिखती है। यहां तक कि हालत तो यह भी होती है कि कई मरीज अपने बेड में घर से लाये कंबलों से सर्दी काट रहे हैं। इन कंबलों के वजन व लंबाई चौडाई समेत क्वालिटी को लेकर शासन की गाइड लाइन है। इस गाइडलाइन के आसपास कंबलों की स्थिति नहीं है।
उप्र शासन के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने जिलाधिकारियों को जारी पत्र में इस मामले को संज्ञान में लेने के लिए कहा है। पत्र के अनुसार अस्पतालों के लिए जेम पोर्टल से खरीदारी में मानक वजन दो किलो दो सौ ग्राम होनी चाहिए। इसमें ऊन की मात्रा 70 प्रतिशत होनी चाहिए। लंबाई दो सौ पैंतीस व चौड़ाई एक सौ चालीस सेंटीमीटर होनी चाहिए। इस मानक को लेकर जिला अस्पताल में जब जानकारी की गई तो सब कुछ सामान्य नहीं मिला। दो कंबलों की तौल कराई गई तो उनका वजन एक किलो छह सौ ग्राम व दूसरे का एक किलो सात सौ ग्राम मिला। लंबाई चौड़ाई में भी कुछ अंतर मिला। लगभग आधा किलो कम वजन के कंबल की आपूर्ति हुई है।
विज्ञापन
इनसेट
सीएमएस डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल में कंबलों को पर्याप्त स्टॉक है। अभी ज्यादा सर्दी नहीं पड़ रही है ऐसे में जिस मरीज या तीमारदार द्वारा कंबल मांगा जाता है उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए मॉनीटरिंग भी की जा रही है। कंबलों के मानक की बात पर कहा कि यह पहले की खरीदारी है। उनके कार्यकाल में यह नहीं हुआ है। इसकी जानकारी की जा रही है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड से लेकर भर्ती होने वाले मरीजों के वार्ड में कंबल नजर नहीं आते हैं। इतना जरूर है कि जननी सुरक्षा योजना वाले प्रसव कक्ष के हर बेड में कंबल मौजूद रहता है यह स्थिति अन्य वार्ड के बेड में नहीं दिखती है। यहां तक कि हालत तो यह भी होती है कि कई मरीज अपने बेड में घर से लाये कंबलों से सर्दी काट रहे हैं। इन कंबलों के वजन व लंबाई चौडाई समेत क्वालिटी को लेकर शासन की गाइड लाइन है। इस गाइडलाइन के आसपास कंबलों की स्थिति नहीं है।
विज्ञापन
उप्र शासन के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने जिलाधिकारियों को जारी पत्र में इस मामले को संज्ञान में लेने के लिए कहा है। पत्र के अनुसार अस्पतालों के लिए जेम पोर्टल से खरीदारी में मानक वजन दो किलो दो सौ ग्राम होनी चाहिए। इसमें ऊन की मात्रा 70 प्रतिशत होनी चाहिए। लंबाई दो सौ पैंतीस व चौड़ाई एक सौ चालीस सेंटीमीटर होनी चाहिए। इस मानक को लेकर जिला अस्पताल में जब जानकारी की गई तो सब कुछ सामान्य नहीं मिला। दो कंबलों की तौल कराई गई तो उनका वजन एक किलो छह सौ ग्राम व दूसरे का एक किलो सात सौ ग्राम मिला। लंबाई चौड़ाई में भी कुछ अंतर मिला। लगभग आधा किलो कम वजन के कंबल की आपूर्ति हुई है।
विज्ञापन
इनसेट
सीएमएस डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल में कंबलों को पर्याप्त स्टॉक है। अभी ज्यादा सर्दी नहीं पड़ रही है ऐसे में जिस मरीज या तीमारदार द्वारा कंबल मांगा जाता है उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए मॉनीटरिंग भी की जा रही है। कंबलों के मानक की बात पर कहा कि यह पहले की खरीदारी है। उनके कार्यकाल में यह नहीं हुआ है। इसकी जानकारी की जा रही है।