{"_id":"5749ea2e4f1c1b2f07691faa","slug":"one-love-sharing-the-ram","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेम बांटने वन आए राम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रेम बांटने वन आए राम
अमर उजाला ब्यूरो,चित्रकूट
Updated Sun, 29 May 2016 12:27 AM IST
विज्ञापन
कथा सुनाते संत मोरारी बापू
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीर्थक्षेत्र में चल रही रीराम कथा के आठवें दिन संत मोरारी बापू ने बताया कि भगवान राम के वन में आने के कई कारण है। पहला भगवान से पूरी दुनिया को प्रेम मिले। प्रेम रूपी अमृत का मंथन कर भगवान ने राम राज्य की स्थापना की।
रामायण मेला परिसर में चल रही श्रीराम कथा में मोरारी बापू ने भरत प्रेम और भगवान राम के वनागमन के पीछे जन कल्याण को आधार बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान राम की पादुका लेकर भरतजी ने रामराज्य चलाया उसी तरह देश में किसी भी पद के लिए शपथ लेने वालों को प्रेम व जिम्मेदारी रूपी पादुका देनी चाहिए। जिससे उसे पद के अनुरूप काम करने की प्रेरणा मिलती रही।
दुनिया में प्रेम ही एक ऐसी चीज है जिसे देने वाले की इतनी जय की जाती है कि उसे लुटाना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि भरतजी का पद नहीं पादुका सत्य दर्शन है। पादुका भोगों के सामने त्याग का संकेत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि कोई भी महान पुरुष आपके सपनों में आए और मार्गदर्शन करें वो ही गुरु है। कथा के दौरान बनारस के व्यवसायी अखिलेश खेमका, कृष्ण कुमार जालान, अभय महाजन, विवेक अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, महेंद्र केशरवानी, गोपी किशन अग्रवाल, विनोद गुप्ता व संतोष बंसल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रामायण मेला परिसर में चल रही श्रीराम कथा में मोरारी बापू ने भरत प्रेम और भगवान राम के वनागमन के पीछे जन कल्याण को आधार बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान राम की पादुका लेकर भरतजी ने रामराज्य चलाया उसी तरह देश में किसी भी पद के लिए शपथ लेने वालों को प्रेम व जिम्मेदारी रूपी पादुका देनी चाहिए। जिससे उसे पद के अनुरूप काम करने की प्रेरणा मिलती रही।
विज्ञापन
दुनिया में प्रेम ही एक ऐसी चीज है जिसे देने वाले की इतनी जय की जाती है कि उसे लुटाना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि भरतजी का पद नहीं पादुका सत्य दर्शन है। पादुका भोगों के सामने त्याग का संकेत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि कोई भी महान पुरुष आपके सपनों में आए और मार्गदर्शन करें वो ही गुरु है। कथा के दौरान बनारस के व्यवसायी अखिलेश खेमका, कृष्ण कुमार जालान, अभय महाजन, विवेक अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, महेंद्र केशरवानी, गोपी किशन अग्रवाल, विनोद गुप्ता व संतोष बंसल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन