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Chitrakoot News: मंदाकिनी में गंदगी व अवैध कब्जों पर एनजीटी सख्त, सतना कलेक्टर से मांगा जवाब

Sun, 19 Apr 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Sun, 19 Apr 2026 12:16 AM IST
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NGT takes strict action against illegal encroachments and filth in Mandakini river; seeks response from Satna Collector
फोटो 18 सीकेटीपी 16 मंदाकिनी नदी-संवाद
चित्रकूट। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि की मंदाकिनी, पयस्विनी व सरयू नदी में गंदगी और अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने सतना कलेक्टर से अलग-अलग बिंदुओं पर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इसके साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित न होने एवं नगर निकाय व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सही कार्रवाई न करने पर एनजीटी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त किया है।
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अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा की राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की केंद्रीय क्षेत्र बेंच भोपाल में डाली गई याचिका पर जस्टिस शेओ कुमार सिंह व न्यायिक सदस्य प्रशांत गर्गवा विशेषज्ञ सदस्य ने चित्रकूट एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, यहां हर साल देश व विदेशों से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं कि मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के साढ़े 11 साल गुजारे हैं। राम जहां जहां रुके, वहां वहां स्थल बने हैं। मंदाकिनी नदी किनारे रामघाट पर पवित्र स्नान एवं श्राद्ध कर्म किए। अधिवक्ता ने कहा कि नगर पंचायत परिषद चित्रकूट क्षेत्र के अधिकांश नालों को गंदा पानी बिना सीवेज के नदियों में छोड़ा जाता है। इससे सभी नदियों के निर्मल जल का रंग ही बदल गया है। कहीं पर भी साफ पानी नहीं दिखाई देता हैं। इसमें लोग नहाने के साथ पीते भी हैं। रामघाट पर ही मंदाकिनी, पयस्विनी व सरयू नदी का मिलन होता है। नदी किनारे और नदी भूमि पर लोगों ने अवैध कब्जा कर मकान, होटल, धर्मशाला, आश्रम, फार्म हाउस और निजी कॉलोनियां बनवा लिए हैं। कई ने तो नदियों की जलधारा को भी रोकने का प्रयास किया है। एनजीटी ने 15 मई को अगली सुनवाई के लिए निर्धारित की है।
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याचिका पर एनजीटी ने सुनवाई में पाया कि नदियों की हालत देखने के बाद भी पर्याप्त संख्या में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्यों संचालित नहीं किए गए, नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जानते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं की है। इस पर एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए सतना कलेक्टर को आदेश दिया कि पूरे नदी क्षेत्र का सीमांकन करा कर अतिक्रमणकारियों को चिह्नित करें और सभी अवैध निर्माणों को हटवाएं। अब दोबारा नदी किनारों पर अवैध कब्जा नहीं होने चाहिए। साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदूषण की नियमित निगरानी करें। नियमों का पालन न करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जाए।
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एनजीटी ने इन बिंदुओं पर कलेक्टर से मांगा जवाब,



-चित्रकूट की कुल आबादी और त्योहारों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या,



जल उपयोग और उत्पन्न होने वाला सीवेज,



मौजूदा एसटीपी की संख्या और उनकी क्षमता,



सीवेज उपचार में कमी,



ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति,



कचरा निस्तारण के वैकल्पिक उपाय,



संवैधानिक अधिकारों का हवाला,

फोटो 18 सीकेटीपी 16 मंदाकिनी नदी-संवाद

फोटो 18 सीकेटीपी 16 मंदाकिनी नदी-संवाद

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