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Chitrakoot News: मंदाकिनी नदी में बने डैम पर एनजीटी ने अधिकारियों को जारी की नोटिस
Sun, 19 Apr 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:16 AM IST
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चित्रकूट। धर्मनगरी की सबसे पवित्र मंदाकिनी नदी पर बने डैम के खिलाफ सेवानिवृत्त वैज्ञानिक ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली में याचिका दायर की थी। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की प्रधान पीठ नई दिल्ली में सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सेवानिवृत्त वैज्ञानिक अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सिंचाई विभाग ने मंदाकिनी नदी में बंधोइन के पास करीब 30 से 35 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर डैम बना दिया था। इससे नदी में हमेशा पानी रहता है। डैम में सिल्ट का जमाव होता है। बहाव न होने की वजह से पानी की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है। बीओडी सामान्य 50 के सापेक्ष करीब 540 व डीओ छह की जगह आठ से 12 पहुंच गई है। जल संस्थान नदी के पानी की आपूर्ति लोगों को पीने के लिए कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पीना तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं है। बताया कि अगर डैम की जगह बैराज बनाया जाए तो हर साल सफाई भी होगी और लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिलेगा।
अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल व डॉ. अफरोज अहमद ने याचिका पर सुनवाई की और केंद्रीय निदेशालय नदी संरक्षण नई दिल्ली के साथ, यूपी के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी व अधिशासी अभियंता सिंचाई प्रखंड प्रथम को नोटिस जारी की है। अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय मांगा है। तीन अगस्त के पहले नोटिस का जवाब देने के आदेश दिए हैं।
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सेवानिवृत्त वैज्ञानिक अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सिंचाई विभाग ने मंदाकिनी नदी में बंधोइन के पास करीब 30 से 35 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर डैम बना दिया था। इससे नदी में हमेशा पानी रहता है। डैम में सिल्ट का जमाव होता है। बहाव न होने की वजह से पानी की गुणवत्ता बहुत खराब हो गई है। बीओडी सामान्य 50 के सापेक्ष करीब 540 व डीओ छह की जगह आठ से 12 पहुंच गई है। जल संस्थान नदी के पानी की आपूर्ति लोगों को पीने के लिए कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पीना तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं है। बताया कि अगर डैम की जगह बैराज बनाया जाए तो हर साल सफाई भी होगी और लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिलेगा।
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अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल व डॉ. अफरोज अहमद ने याचिका पर सुनवाई की और केंद्रीय निदेशालय नदी संरक्षण नई दिल्ली के साथ, यूपी के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी व अधिशासी अभियंता सिंचाई प्रखंड प्रथम को नोटिस जारी की है। अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय मांगा है। तीन अगस्त के पहले नोटिस का जवाब देने के आदेश दिए हैं।
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