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Chitrakoot News: मंदाकिनी फिर लाल निशान के पार, 20 गांव पानी से घिरे
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बाढ़ में डूबे मंदिर और दुकान।
- फोटो : संवाद
मऊ/राजापुर (चित्रकूट)। जिले और आसपास के क्षेत्रों में 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश से मंदाकिनी नदी खतरे के निशान को पार कर गई है। रामघाट पर स्थित मंदिर और दुकानों में पानी भर गया है। यमुना और मंदाकिनी के बाढ़ के पानी से 45 गांव घिर गए हैं। मऊ क्षेत्र के मवई गांव 20 परिवारों, राजापुर क्षेत्र के सरधुआ गांव के 130 ग्रामीणों को परिषदीय स्कूलों में पहुंचाया गया।
यमुना नदी का जलस्तर रविवार की शाम पांच बजे 93.23 मीटर रहा जो खतरे के निशान 93.50 मीटर से थोड़ा नीचे है। शनिवार की रात जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया था। मंदाकिनी नदी खतरे के निशान 126.50 मीटर से ढाई मीटर ऊपर 128 मीटर पर बह रही है। बाढ़ प्रभावित कई गांवों में फंसे लोगों के पास राशन किट नहीं पहुंची। रपटों पर सात फीट ऊपर पानी बह रहा है। बीमारी से पीड़ित लोग दवाएं न मिलने से परेशान हैं।
यमुना नदी दो दिन से बढ़ी हुई है। मंदाकिनी नदी में दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने हालत अधिक खराब हो गए हैं। राजापुर-कमासिन मार्ग पर तीन फीट ऊपर पानी बह रहा है। क्षेत्र के 20 गांव का आपस में संपर्क कट गया है। सरधुआ गांव की दलित बस्ती के 20 घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन परिवारों को कंपोजिट विद्यालयों में ठहराया गया है। प्रधान ने भोजन की व्यवस्था कराई है।
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मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी, कर्वी विधायक अनिल प्रधान, डीएम शिवशरणप्पा, एसपी अरुण कुमार सिंह ने राजापुर व मऊ क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हाल जाना। मवई कला गांव के बाढ़ पीड़ितों को पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंचाया गया है। इन सभी के भोजन व विश्राम स्थल का इंतजाम किया गया है।
इनसेट
भदेदू संपर्क मार्ग और कनकोटा पुल का संपर्क मार्ग धंसा
राजापुर। यमुना नदी का पानी भदेदू के संपर्क मार्ग में भर जाने से रविवार को धंस गया। इससे राजापुर क्षेत्र के तिरहार क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों का आवागमन बंद हो गया है। कनकोटा के पास बन रहे पुल का संपर्क मार्ग धंस गया है। इससे आवागमन बाधित हुआ है। यह पुल अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
इनसेट
लगातार दुश्वारियां बढ़ती जा रही
मऊ/राजापुर। मवई कला गांव के राजेश कुमार ने बताया कि मवई कला गांव के पास रास्ते पर पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अस्थायी रास्ता दो महीने से खराब है। यमुना नदी में बाढ़ आने से हालात अधिक खराब हो गए है। ग्रामीण भूखे प्यासे फंसे हैं। बाढ़ प्रभावित गांव अर्की के सुनील सिंह ने बताया कि आधे से अधिक खेती व डेरा नदी के तट पर हैं। बाढ़ से खेत में पानी भर गया है। डेरों पर नहीं जा पा रहे हैं। दो दिन से खाने को लाले पड़े हैं।
सरधुआ के हेमनारायण ने बताया कि राजापुर-कमासिन मार्ग पर पानी भरा है। दो दिन से खेत पर जा नहीं पा रहे है। क्षेत्र के अतरौली, नैनी, धौरहा, बरद्वारा, चांदी, धुमाई, नैनी गांव के निवासी सबसे ज्यादा परेशान है। सरधुवा पनौटी गांव में रिहाशी इलाके में पानी भरा है। रास्तों पर पानी भरने से छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
इनसेट
बाढ़ चौकियां भगवान भरोसे
चित्रकूट। जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए चौकियां बनाई थीं लेकिन बाढ़ चौकियां भगवान भरोसे हैं। इनमें होमगार्ड, लेखपाल, व स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 24 घंटे रहने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन मौजूदा समय में होमगार्ड ही दिखाई दे रहे है। स्वास्थ्य कर्मचारियों का अता-पता नहीं है।
इनसेट
बाढ़ प्रभावित गांवों में अस्थायी कैंप लगाएं : डीएम
चित्रकूट। डीएम शिवशरणप्पा व एसपी अरुण कुमार सिंह ने राजापुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव सरधुआ, अर्की आदि गांवों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में अस्थायी कैंप लगाएं। खाने पीने की वस्तु कम नहीं होनी चाहिए।
मानिकपुर क्षेत्र की बरदहा नदी में फिर बाढ़ आ गई। इससे रास्ते पर पानी भर गया। सात से अधिक गांवों का संपर्क कट गया। चमरौहा गांव के पास रपटे पर पानी भर गया। रामपुर गांव के किशन कोल ने बताया कि इस बार नदी में चार बार बाढ़ चुकी है। हर बार रपटे पर पानी भर जाता है। इससे समस्या हो जाती है।
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यमुना नदी का जलस्तर रविवार की शाम पांच बजे 93.23 मीटर रहा जो खतरे के निशान 93.50 मीटर से थोड़ा नीचे है। शनिवार की रात जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया था। मंदाकिनी नदी खतरे के निशान 126.50 मीटर से ढाई मीटर ऊपर 128 मीटर पर बह रही है। बाढ़ प्रभावित कई गांवों में फंसे लोगों के पास राशन किट नहीं पहुंची। रपटों पर सात फीट ऊपर पानी बह रहा है। बीमारी से पीड़ित लोग दवाएं न मिलने से परेशान हैं।
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यमुना नदी दो दिन से बढ़ी हुई है। मंदाकिनी नदी में दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने हालत अधिक खराब हो गए हैं। राजापुर-कमासिन मार्ग पर तीन फीट ऊपर पानी बह रहा है। क्षेत्र के 20 गांव का आपस में संपर्क कट गया है। सरधुआ गांव की दलित बस्ती के 20 घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन परिवारों को कंपोजिट विद्यालयों में ठहराया गया है। प्रधान ने भोजन की व्यवस्था कराई है।
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मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी, कर्वी विधायक अनिल प्रधान, डीएम शिवशरणप्पा, एसपी अरुण कुमार सिंह ने राजापुर व मऊ क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हाल जाना। मवई कला गांव के बाढ़ पीड़ितों को पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंचाया गया है। इन सभी के भोजन व विश्राम स्थल का इंतजाम किया गया है।
इनसेट
भदेदू संपर्क मार्ग और कनकोटा पुल का संपर्क मार्ग धंसा
राजापुर। यमुना नदी का पानी भदेदू के संपर्क मार्ग में भर जाने से रविवार को धंस गया। इससे राजापुर क्षेत्र के तिरहार क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों का आवागमन बंद हो गया है। कनकोटा के पास बन रहे पुल का संपर्क मार्ग धंस गया है। इससे आवागमन बाधित हुआ है। यह पुल अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
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लगातार दुश्वारियां बढ़ती जा रही
मऊ/राजापुर। मवई कला गांव के राजेश कुमार ने बताया कि मवई कला गांव के पास रास्ते पर पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अस्थायी रास्ता दो महीने से खराब है। यमुना नदी में बाढ़ आने से हालात अधिक खराब हो गए है। ग्रामीण भूखे प्यासे फंसे हैं। बाढ़ प्रभावित गांव अर्की के सुनील सिंह ने बताया कि आधे से अधिक खेती व डेरा नदी के तट पर हैं। बाढ़ से खेत में पानी भर गया है। डेरों पर नहीं जा पा रहे हैं। दो दिन से खाने को लाले पड़े हैं।
सरधुआ के हेमनारायण ने बताया कि राजापुर-कमासिन मार्ग पर पानी भरा है। दो दिन से खेत पर जा नहीं पा रहे है। क्षेत्र के अतरौली, नैनी, धौरहा, बरद्वारा, चांदी, धुमाई, नैनी गांव के निवासी सबसे ज्यादा परेशान है। सरधुवा पनौटी गांव में रिहाशी इलाके में पानी भरा है। रास्तों पर पानी भरने से छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
इनसेट
बाढ़ चौकियां भगवान भरोसे
चित्रकूट। जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए चौकियां बनाई थीं लेकिन बाढ़ चौकियां भगवान भरोसे हैं। इनमें होमगार्ड, लेखपाल, व स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 24 घंटे रहने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन मौजूदा समय में होमगार्ड ही दिखाई दे रहे है। स्वास्थ्य कर्मचारियों का अता-पता नहीं है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में अस्थायी कैंप लगाएं : डीएम
चित्रकूट। डीएम शिवशरणप्पा व एसपी अरुण कुमार सिंह ने राजापुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव सरधुआ, अर्की आदि गांवों का निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में अस्थायी कैंप लगाएं। खाने पीने की वस्तु कम नहीं होनी चाहिए।
मानिकपुर क्षेत्र की बरदहा नदी में फिर बाढ़ आ गई। इससे रास्ते पर पानी भर गया। सात से अधिक गांवों का संपर्क कट गया। चमरौहा गांव के पास रपटे पर पानी भर गया। रामपुर गांव के किशन कोल ने बताया कि इस बार नदी में चार बार बाढ़ चुकी है। हर बार रपटे पर पानी भर जाता है। इससे समस्या हो जाती है।