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मानस के बिना रामकथा अधूरी: मोरारी बापू
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चित्रकूट। आरोग्यधाम परिसर में श्रीराम कथा के दौरान संत मोरारी बापू ने कहा कि वेद की महिमा अतुलनीय है लेकिन मानस के बिना रामकथा अधूरी है।
रविवार को दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर में आयोजित रामकथा के दूसरे दिन कथा वाचक मोरारी बापू ने कहा कि भरत शब्द बोलने से पाप का नाश होता है।
चित्रकूट व मंदाकिनी की महिमा को भजन के रूप में समझाया। उन्होंने भगवान श्रीराम के चारों भाइयों में भरत की महिमा का बखान किया कहकि चारों में सबसे पहले पूज्य भरत हैं। जिस प्रकार सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा होती है उसी प्रकार इन भाइयों की वंदना पूजन में वह सबसे पहले भरत जी को ही पूज्य करते हैं। उन्होंने कहाकि श्रीराम की भक्ति व पूजन के लिए चित्रकूट जैसे तीर्थ के अलावा बताया कि गोशाला, अन्नक्षेत्र, गुफा या विशेष पेड़ के नीचे बैठकर भजन करना लाभदायक होता है। यहां तक कहा कि उन्होंने गुजरात में अपने आवास के पास श्री हनुमान मंदिर स्थल का निर्माण कराया है जिसका नाम चित्रकूट रखा है ताकि भगवान श्रीराम की कर्म धर्मभूमि चित्रकूट से जुड़ाव बना रहे।
कथा के दौरान विमल जालान वाराणसी, डीआरआई के अनिल जायसवाल, संतोष मिश्रा व राजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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रविवार को दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर में आयोजित रामकथा के दूसरे दिन कथा वाचक मोरारी बापू ने कहा कि भरत शब्द बोलने से पाप का नाश होता है।
चित्रकूट व मंदाकिनी की महिमा को भजन के रूप में समझाया। उन्होंने भगवान श्रीराम के चारों भाइयों में भरत की महिमा का बखान किया कहकि चारों में सबसे पहले पूज्य भरत हैं। जिस प्रकार सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा होती है उसी प्रकार इन भाइयों की वंदना पूजन में वह सबसे पहले भरत जी को ही पूज्य करते हैं। उन्होंने कहाकि श्रीराम की भक्ति व पूजन के लिए चित्रकूट जैसे तीर्थ के अलावा बताया कि गोशाला, अन्नक्षेत्र, गुफा या विशेष पेड़ के नीचे बैठकर भजन करना लाभदायक होता है। यहां तक कहा कि उन्होंने गुजरात में अपने आवास के पास श्री हनुमान मंदिर स्थल का निर्माण कराया है जिसका नाम चित्रकूट रखा है ताकि भगवान श्रीराम की कर्म धर्मभूमि चित्रकूट से जुड़ाव बना रहे।
कथा के दौरान विमल जालान वाराणसी, डीआरआई के अनिल जायसवाल, संतोष मिश्रा व राजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।