{"_id":"628292a4d737b76794092113","slug":"lecture-given-on-the-role-of-lakshman-in-the-cultural-evening-chitrakoot-news-knp697151235","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांस्कृतिक संध्या लक्ष्मण की भूमिका पर दिया व्याख्यान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांस्कृतिक संध्या लक्ष्मण की भूमिका पर दिया व्याख्यान
विज्ञापन
फोटो- 6- तुलसी भवन नयागांव में भक्ति कार्यक्रम में श्रीरामचरित मानस कीकथा में भगवान श्रीराम के जन?
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट/खोही। प्रमोद वन स्थित तुलसी शोध संस्थान के सभागार में भक्ति सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। विद्धानों ने रामकथा में लक्ष्मण की भूमिका पर व्याख्यान दिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। जिसमें राम और लक्ष्मण और सीता की भूमिकाओं का मंचन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री रामानंद सिंह ने किया।
कार्यक्रम में गीत नाटिका पतित पावन राम आयोजित किया गया। जिसमें रामचरित मानस दो प्रमुख चरित्रों अहिल्या उद्वार एवं लक्ष्मण रेखा पर केंद्रित रहा। लोकलाओं व आल्हा के माध्यम से श्रीराम के जन्म से लेकर सीता हरण की कथा का मंचन किया। नाटिका निदेशक अशोक सागर मिश्र, कलाकार रमेश बेल, नूतन कला संस्थान बालघाट के अध्यक्ष रूपकुमार ने प्रस्तुति दी।
विद्वानों ने श्रीराम कथा को लेकर व्याख्यान भी दिए। जिसमें भोपाल के राष्ट्रपति से पुरस्कृत विद्वान डॉ. रघुवीर प्रसाद गोस्वामी कहा कि कहा कि लक्ष्मण चरित्र संपूर्ण रामकथा का मेरुदण्ड है। चित्रकूूट में श्रीराम-सीता व लक्ष्मण का आगमन एक संयोग ही नहीं था, ब्रह्मा जी की पूर्व लौकिक योजना थी। लक्ष्मण ने श्रीराम के प्रत्येक कार्य में सहयोग किया। लक्ष्मण ने निस्वार्थ भाव से कार्य किया है। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन, अवधेश प्रसाद पांडेय, दीपक कुमार गुप्ता, कमलेश थापक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यक्रम में गीत नाटिका पतित पावन राम आयोजित किया गया। जिसमें रामचरित मानस दो प्रमुख चरित्रों अहिल्या उद्वार एवं लक्ष्मण रेखा पर केंद्रित रहा। लोकलाओं व आल्हा के माध्यम से श्रीराम के जन्म से लेकर सीता हरण की कथा का मंचन किया। नाटिका निदेशक अशोक सागर मिश्र, कलाकार रमेश बेल, नूतन कला संस्थान बालघाट के अध्यक्ष रूपकुमार ने प्रस्तुति दी।
विज्ञापन
विद्वानों ने श्रीराम कथा को लेकर व्याख्यान भी दिए। जिसमें भोपाल के राष्ट्रपति से पुरस्कृत विद्वान डॉ. रघुवीर प्रसाद गोस्वामी कहा कि कहा कि लक्ष्मण चरित्र संपूर्ण रामकथा का मेरुदण्ड है। चित्रकूूट में श्रीराम-सीता व लक्ष्मण का आगमन एक संयोग ही नहीं था, ब्रह्मा जी की पूर्व लौकिक योजना थी। लक्ष्मण ने श्रीराम के प्रत्येक कार्य में सहयोग किया। लक्ष्मण ने निस्वार्थ भाव से कार्य किया है। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन, अवधेश प्रसाद पांडेय, दीपक कुमार गुप्ता, कमलेश थापक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन