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खेत तैयार, खाद खरीदने के लिए पैसे नहीं
ब्यूरो अमर उजाला चित्रकूट
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:14 AM IST
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बैंक से रूपये निकालने के लिए लाइन में खड़े लोग
- फोटो : amarujala
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नोटबंदी का असर रबी की फसल की तैयारी करने वाले किसानों पर खासा पड़ रहा है। किसानों को बीज, खाद, सिंचाई के लिए रुपये की सख्त जरूरत है लेकिन नगदी न होने से बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। बैंकों में जब दो हजार रुपये का नोट थमा दिया जाता है तो वे निराश होकर घर लौट जाते हैं।
किसानों ने नवंबर माह में रबी की फसल की तैयारी शुरू कर दी थी। अचानक आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा होते ही किसानों को बीज व खाद खरीदने की चिंता सताने लगी। बैंकों के बाहर घंटों लाइन में खड़ा किसान खेतों की बुआई को लेकर लाचार हैं। फिर पता चला कि बैंकों से नोट बदलने पर चार हजार रुपये दिए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक पहुंचने पर एक हजार से दो हजार रुपये ही जब किसानों को मिले तो मानसिक रूप से किसान परेशान हो गए। किसानों को इस समय बीज, खाद, सिंचाई के लिए रुपये की सख्त जरूरत है।
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इसके बाद अब सहकारी बैंकों में भी नोट जमा करने और बदलने की मनाही होने पर किसान हलाकान हैं। खोह के गत्तू प्रसाद व वीरेंद्र सिंह व बसहर के राममूरत ने बताया कि उनके खाते इन्हीं बैंकों में है।
खाद आदि की खरीददारी समितियों से होती है जहां पुराने नोट न चलने से सामग्री खरीद नहीं पा रहे हैं और इसका असर खेती पर भी पड़ रहा है।
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किसानों ने नवंबर माह में रबी की फसल की तैयारी शुरू कर दी थी। अचानक आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा होते ही किसानों को बीज व खाद खरीदने की चिंता सताने लगी। बैंकों के बाहर घंटों लाइन में खड़ा किसान खेतों की बुआई को लेकर लाचार हैं। फिर पता चला कि बैंकों से नोट बदलने पर चार हजार रुपये दिए जाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक पहुंचने पर एक हजार से दो हजार रुपये ही जब किसानों को मिले तो मानसिक रूप से किसान परेशान हो गए। किसानों को इस समय बीज, खाद, सिंचाई के लिए रुपये की सख्त जरूरत है।
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इसके बाद अब सहकारी बैंकों में भी नोट जमा करने और बदलने की मनाही होने पर किसान हलाकान हैं। खोह के गत्तू प्रसाद व वीरेंद्र सिंह व बसहर के राममूरत ने बताया कि उनके खाते इन्हीं बैंकों में है।
खाद आदि की खरीददारी समितियों से होती है जहां पुराने नोट न चलने से सामग्री खरीद नहीं पा रहे हैं और इसका असर खेती पर भी पड़ रहा है।