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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   Krishna kumar reached Chitrakoot by traveling 66 thousand 720 KM on scooter, giving Bharat Darshan to mother

MP News: स्कूटर से 66 हजार 720 KM की यात्रा कर चित्रकूट पहुंचा शख्स, नौकरी छोड़ मां को करा रहा भारत दर्शन

Wed, 05 Apr 2023 03:41 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 05 Apr 2023 03:41 PM IST
सार

मां चूड़ारत्ना को लेकर चित्रकूट पहुंचे कृष्ण कुमार ने बताया कि वह एक मल्टी नेशनल कंपनी में टीम लीडर के रूप में कार्यरत थे। इसके बाद मैंने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया और स्वर्गीय पिता द्वारा 20 साल पहले दिए गए स्कूटर पर सवार होकर 16 जनवरी 2018 को मां के साथ भारत भ्रमण शुरू कर दिया।

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Krishna kumar reached Chitrakoot by traveling 66 thousand 720 KM on scooter, giving Bharat Darshan to mother
मां को भारत दर्शन कराने स्कूटर से निकले कृष्ण कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक मैसूर के रहने वाले कृष्ण कुमार (42) अपनी वृद्ध मां चूड़ारत्ना (72) को स्कूटर पर भारत भ्रमण कराने के लिए निकले हैं। कृष्ण अभी तक अपनी मां के साथ स्कूटर से 66 हजार 720 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा में तीन देशों क्रमशः नेपाल, भूटान और म्यांमार की यात्राएं भी शामिल हैं।

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अपनी मां चूड़ारत्ना के साथ मध्यप्रदेश के चित्रकूट पहुंचे कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री की है। वह एक मल्टी नेशनल कंपनी में टीम लीडर के रूप में कार्यरत थे। उनका कर्नाटक राज्य के मैसूर में 10 लोगों का संयुक्त परिवार है, जिसमें उनकी मां घर के सारे काम करती थी। उन्होंने कहा कि एक दिन कंपनी से घर आकर मैंने कुछ प्रमुख मंदिरों के नाम गिनाते हुए मां से पूछा कि कभी इन मंदिरों के दर्शन करने गई हो। इस पर मां ने कहा कि बेटा मैं आज तक अपने घर के पास वाले मंदिर भी नहीं जा सकी।
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कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्हें अपनी मां की बात सुनकर बहुत ही दुख हुआ। तभी मेरे मन में अपनी मां को भारत भ्रमण कराने की इच्छा हुई। मैंने मां से कहा कि मैं तुझे सारे देश के मंदिरों का दर्शन भ्रमण कराऊंगा। इसके बाद मैंने नौकरी से त्याग पत्र दे दिया और स्वर्गीय पिता द्वारा 20 साल पहले दिए गए स्कूटर पर सवार होकर 16 जनवरी 2018 को मां के साथ भारत भ्रमण प्रारंभ कर दिया था।
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कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने मां के सपने को पूरा करने के लिए आजीवन ब्रह्मचारी अथवा अविवाहित रहने का फैसला कर लिया। यह पूछने पर कि आप समाज को खासकर युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे, इस पर कृष्ण कुमार ने कहा कि माता-पिता धरती के भगवान हैं। माता-पिता हमें जन्म देते हुए जिस प्रकार हमारा लालन-पालन करते हैं, उसी प्रकार से हमें भी अपने माता-पिता का वृद्धावस्था में लालन-पालन करना चाहिए।


उन्होंने कहा कि कुछ लोग घर में माता-पिता की फोटो लगाकर उस पर चंदन टीका लगाते हैं। उससे कुछ भी नहीं होने वाला है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि जिस प्रकार माता-पिता बचपन में हमारा खयाल रखते हैं, वृद्धावस्था में हमें अपने माता-पिता का खयाल रखना चाहिए।

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