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केशलोंच कष्ट नहीं, साधना की परीक्षा है: मुनि श्री
Sat, 03 Oct 2026 11:07 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 03 Oct 2026 11:07 PM IST
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चित्रकूट। वर्षायोग समापन पर कुंथुनाथ दिगंबर जैन मंदिर बरगढ़ में मुनि श्री सोमदत्त सागर महाराज का मंगल केशलोंच संपन्न हुआ। वे आचार्य निर्भय सागर महाराज के शिष्य हैं।
गुरु भक्त आनंद भैया ने बताया कि दिगंबर मुनि कैंची-उस्तरे से बाल नहीं कटवाते, बल्कि हर ढाई से तीन माह में अपने हाथों से केशलोंच करते हैं। दिगंबर मुनि कोई परिग्रह नहीं रखते। यह केशलोंच आत्मा की शुद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन मुनि उपवास रखते हैं। वैसे भी वे दिन में एक बार ही आहार लेते हैं।
आहार में बाल या जीव आ जाए तो छोड़ देते हैं। मुनि श्री ने बताया कि बढ़े बालों में सूक्ष्म जीव पनपते हैं, जिससे साधना में विघ्न होता है। मन की स्थिरता और अहिंसा के लिए केशलोंच जरूरी है। (संवाद)
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गुरु भक्त आनंद भैया ने बताया कि दिगंबर मुनि कैंची-उस्तरे से बाल नहीं कटवाते, बल्कि हर ढाई से तीन माह में अपने हाथों से केशलोंच करते हैं। दिगंबर मुनि कोई परिग्रह नहीं रखते। यह केशलोंच आत्मा की शुद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन मुनि उपवास रखते हैं। वैसे भी वे दिन में एक बार ही आहार लेते हैं।
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आहार में बाल या जीव आ जाए तो छोड़ देते हैं। मुनि श्री ने बताया कि बढ़े बालों में सूक्ष्म जीव पनपते हैं, जिससे साधना में विघ्न होता है। मन की स्थिरता और अहिंसा के लिए केशलोंच जरूरी है। (संवाद)
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