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कबाड़ पर इलाज
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Tue, 05 Apr 2016 11:28 PM IST
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राजापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बगैर गद्दे के गंदे पडे़ बेड
- फोटो : अमर उजाला
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजापुर में कबाड़ के बीच इलाज हो रहा है, यह कहना गलत नहीं होगा। कुछ साल पहले करोड़ों से बनी सीएचसी में बेड टूट गए हैं। मरीजों को फटे और गंदे गद्दों पर लिटाया जा रहा है। शौचालय भी बदहाल है। पानी के लिए टंकी भी खराब पड़ी है। हालत यह है कि अव्यवस्थाओं के चलते मरीज या तो प्राइवेट चिकित्सकों के पास जा रहे हैं या फिर जिला अस्पताल की ओर रुख करने को मजबूर हैं।
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वर्तमान में इस सीएचसी में चार डाक्टर नियुक्त हैं, जिसमें 2 एमबीबीएस व 2 बीएएमएस हैं। इसके अलावा नर्स व वार्ड ब्वाय समेत दस लोगों का स्टाफ और है। जिन्हें लाखों रुपये वेतन दिया जा रहा है। इसके बावजूद मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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इलाज में हो रही आनाकानी के कारण ही मरीजों की संख्या भी घट रही है। दो साल पहले पुराने अस्पताल में 100 से 150 मरीजों का प्रतिदिन इलाज होता था। लेकिन सुविधाओं के अभाव में लोग प्राइवेट चिकित्सकों की ओर भागने लगे।
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सीएचसी में स्थित प्रसव कक्ष के कुछ बेड टूटे और धूल व गंदगी से भरे हुए हैं। कुछ बेड़ों पर न तो गद्दे हैं और न ही चादर। जिन पर है भी तो गंदे और फटे हैं। चादर व गद्दों को देखकर लगता है कि महीनों से उन्हें बदला नहीं गया।
वार्ड एक में भर्ती मरीज रूबी पत्नी राममूरत यादव व श्रीमति पत्नी राम मिलन ने बताया कि वैसे तो नियमानुसार मरीजों को नाश्ता व भोजन मिलना चाहिए लेकिन यहां कुछ नहीं मिलता। कौशिल्या पत्नी गजेंद्र पाल निवासी महुवगांव ने बताया की प्रसव के समय स्टाफ नर्स को दस्ताने तक लाकर देने पड़े। कुछ मरीजों ने बताया की सुविधा शुल्क भी लिया जाता है।