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Chitrakoot News: जेल निर्माण सामग्री का भी हुआ बंदरबांट
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चित्रकूट। जिला जेल रगौली के निर्माण शुरु होने से लेकर अभी तक कई बार यह विवादों व चर्चा के घेरे में रही। बसपा शासन काल 2009 से शुरु हुआ निर्माण कई बार रुका। कभी ठेकेदारों ने भुगतान को लेकर हंंगामा किया तो कभी निर्माण कराने वाली कंपनी अपना बोरिया बिस्तर बांध कर अधूरा काम छोड़कर चली गई। करोड़ों रुपये की डंप पड़ी निर्माण सामग्री पर भी लगभग 50 लाख रुपये का जेल अधिकारियों व वार्डरों पर खेल करने के आरोप लगे हैं। सन 2022 में ही तीन ट्रक निर्माण सामग्र्री की चोरी से कानपुर बांदा तक पहुंंचाने की शिकायत हुई थी।
हैदराबाद की कॉस्टल कंपनी ने जिला जेल का 129 करोड़ की लागत से निर्माण कराना शुरु कराया था। चार साल तक कंपनी ने आसपास के कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट व प्रयागराज जिले के कई पेटी कांट्रेक्टरों से काम कराया। 2013 में कंपनी ने लाखों का घाटा बताकर अचानक काम बंद कर दिया। तो पेटी कांट्रेक्टरों ने अपने लाखों के बकाए के भुगतान के लिए कई दिनों तक आंदोलन किया था। इसके बाद निर्माण निगम ने यह काम शुरु कराया था। निर्माण निगम के तत्कालीन अधिकारी व कई जिलों के पेट्री कांट्रेक्टरों ने बताया कि उनका बकाया भुगतान कॉस्टल कंपनी के पड़ी करोड़ों रुपये की सामग्री से कराया जाना तय हुआ था। यही सामग्री आज भी जेल के तीन स्थानों पर रखी है।
2022 में आरोप लगा कि इसी सामग्री को चोरी चुपके जेल के अधिकारियों व वार्डर ने मिलीभगत कर ठिकाने लगाना शुरू किया था। तीन ट्रक सामान, जिसकी कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई थी, वह यहां से गायब हुआ है। निर्माण निगम के तत्कालीन जेई विजय गौतम इस शिकायत पर जांच करने जेल गए थे तो वहां पर जेलर संतोष कुमार व वार्डर जगमोहन ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी थी। यह भी बताया था कि सीसीटीवी फुटेज भी नहीं दिखाए गए थे। इसकी जांच भी ठंंडे बस्ते में है।
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अब 2023 में इन्हीं जेल अधिकारियों पर मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी कर विधायक अब्बास अंसारी व उसकी पत्नी निखत को कई बार जेल में मिलाने व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की रिपोर्ट दर्ज हुई है। जेलर संतोष पर तो आरोप है कि इसके एवज में 16 लाख रुपये की कार गिफ्ट में मिली है। इन सबकी जांच भी हो रही है। वार्डर जगमोहन कई मामलों में चर्चित रहा है। इस मामले में भी वह नामजद है। उधर, इस मामले में गुरुवार को एसपी वृंदा शुक्ला कह चुकी हैं कि सभी नामजदों से सभी बिंदुओं पर पूछताछ हो रही है। जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
हैदराबाद की कॉस्टल कंपनी ने जिला जेल का 129 करोड़ की लागत से निर्माण कराना शुरु कराया था। चार साल तक कंपनी ने आसपास के कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट व प्रयागराज जिले के कई पेटी कांट्रेक्टरों से काम कराया। 2013 में कंपनी ने लाखों का घाटा बताकर अचानक काम बंद कर दिया। तो पेटी कांट्रेक्टरों ने अपने लाखों के बकाए के भुगतान के लिए कई दिनों तक आंदोलन किया था। इसके बाद निर्माण निगम ने यह काम शुरु कराया था। निर्माण निगम के तत्कालीन अधिकारी व कई जिलों के पेट्री कांट्रेक्टरों ने बताया कि उनका बकाया भुगतान कॉस्टल कंपनी के पड़ी करोड़ों रुपये की सामग्री से कराया जाना तय हुआ था। यही सामग्री आज भी जेल के तीन स्थानों पर रखी है।
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2022 में आरोप लगा कि इसी सामग्री को चोरी चुपके जेल के अधिकारियों व वार्डर ने मिलीभगत कर ठिकाने लगाना शुरू किया था। तीन ट्रक सामान, जिसकी कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई थी, वह यहां से गायब हुआ है। निर्माण निगम के तत्कालीन जेई विजय गौतम इस शिकायत पर जांच करने जेल गए थे तो वहां पर जेलर संतोष कुमार व वार्डर जगमोहन ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी थी। यह भी बताया था कि सीसीटीवी फुटेज भी नहीं दिखाए गए थे। इसकी जांच भी ठंंडे बस्ते में है।
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अब 2023 में इन्हीं जेल अधिकारियों पर मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी कर विधायक अब्बास अंसारी व उसकी पत्नी निखत को कई बार जेल में मिलाने व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की रिपोर्ट दर्ज हुई है। जेलर संतोष पर तो आरोप है कि इसके एवज में 16 लाख रुपये की कार गिफ्ट में मिली है। इन सबकी जांच भी हो रही है। वार्डर जगमोहन कई मामलों में चर्चित रहा है। इस मामले में भी वह नामजद है। उधर, इस मामले में गुरुवार को एसपी वृंदा शुक्ला कह चुकी हैं कि सभी नामजदों से सभी बिंदुओं पर पूछताछ हो रही है। जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।