{"_id":"0f79ef3c546f70feae73ac6ca2c0b942","slug":"its-neccessary-to-conserve-valuable-medicines-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बहुमूल्य औषधियों के संरक्षण की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बहुमूल्य औषधियों के संरक्षण की जरूरत
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट।
Updated Sat, 23 May 2015 11:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं उसकी उपयोगिता को लेकर उद्यमिता विद्यापीठ में शनिवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर जानकारों ने कहा कि चित्रकूट में 780 बहुमूल्य औषधीय प्रजातियों के पौधे पाए जाते हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्धन की जरूरत है।
विज्ञापन
एमपी विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. प्रमोद कुमार वर्मा, डा. अनिल मंगल वरिष्ठ वैज्ञानिक राष्ट्रीय शोध संस्थान आयुर्वेद सिद्धा ग्वालियर, डॉ. पीके गुप्ता विकास अधिकारी केवीआईसी पटना तथा दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने धनवंतरि भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला की शुरुआत की। संचालक आयुर्वेद फार्मेसी चित्रकूट रसशाला के प्रबंधक डॉ. विजय प्रताप सिंह ने कहा कि जो दवाइयां बनें, उसकी गुणवत्ता व सुरक्षा को लेकर चिंतन जरूरी है।
विज्ञापन
डॉ. रामलखन सिंह सिकरवार ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों पर कार्य करने के लिए चित्रकूट बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। रामायण में कामदगिरि पर्व पर ही 34 तरह के दुर्लभ औषधीय पौधे बताए गए हैं। डॉ. अनिल मंगल ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य औषधियों की गुणवत्ता पर चर्चा है। डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि केवीआईसी के अंतर्गत ग्रामोद्योग की तरह एक आयुर्वेदिक विभाग है। उसमें जड़ी बूटियों का संग्रहण और आयुर्वेद दवाओं का निर्माण होता है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत लोगों को इस क्षेत्र में कार्य के लिए सब्सिडी के माध्यम से उपक्रम खोलने के लिए प्रेरित किया जाता है। मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद वर्मा ने कहा कि आयुर्वेद एक विषय नहीं बल्कि जीवनशैली है। आयुर्वेद के विद्यार्थियों के लिए चित्रकूट बहुत महत्वपूर्ण है। आयुष की आवश्यकता को सरकार ने समझा और उसे बढ़ावा देने का काम चल रहा है। एमपी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और दीनदयाल शोध संस्थान मिलकर चित्रकूट में एक टिश्यू कल्चर लैब बनाने की तैयारी में हैं।
अभय महाजन ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में निकले निष्कर्ष देश के विकास में सहभागी बनेंगे। कार्यशाला में भारतीय मेडिसिन एवं होम्योपैथी फार्मेकोसिया कमीशन गाजियाबाद के संयुक्त निदेशक डॉ. एमबी शंकर, हैदराबाद के विट्स पिलानी की डॉ. सुमन कपूर, सीएसआईआर लखनऊ के डॉ. सैय्यद खातून, सीसीआरएएस नई दिल्ली के डॉ. रवींद्र सिंह, एमपी विज्ञान प्रोद्योगिकी परिषद के डॉ. राजेश सक्सेना तथा आयुष भोपाल के डॉ. पीसी शर्मा, सीएसआईआर लखनऊ के मदन पांडेय भी जानकारी साझा करेंगे।