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Chitrakoot News: जांच तेज, अन्य आरोपियों और बिचौलियों पर कसेगा शिकंजा
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कोषागार घोटाला
बुधवार को राजापुर पुलिस की मदद से वांछितों की तलाश में दी दबिश
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। करोड़ों रुपये के कोषागार घोटाले की जांच में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एक और बिचौलिए की गिरफ्तारी के साथ अब तक कुल 33 आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। एसआईटी की सक्रियता से यह उम्मीद जताई जा रही है कि घोटाले में शामिल अन्य मुख्य आरोपी और बिचौलिए भी जल्द ही गिरफ्तार होंगे।
हाल ही में एसआईटी ने तीन अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की, हालांकि वांछित व्यक्ति हाथ नहीं लगे। इसके बावजूद, जांच टीम ने छह नए बिचौलियों के बयान दर्ज किए हैं। इन बिचौलियों को जिला छोड़कर न जाने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने सहायक कोषाधिकारी और एकाउंटेंट की मिलीभगत से कमीशन लेकर मोटी रकम संबंधित लोगों तक पहुंचाई। यह घोटाला 2014 से जांच के दायरे में है, लेकिन अभी तक पांच खातों से लगभग चार करोड़ रुपये की गड़बड़ी का पूरा खुलासा नहीं हो पाया है।
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सूत्रों के अनुसार, इन छह बिचौलियों ने घोटाले में पहले से गिरफ्तार विभागीय एटीओ, रिटायर्ड एटीओ और एकाउंटेंट के सहयोग की बात कबूल की है। उन्होंने बताया कि इन्हीं की मदद से वे पेंशनरों को समझाकर बैंकों से पैसे निकालते थे। इस प्रक्रिया में यह भी सामने आया कि 20 प्रतिशत राशि बिचौलियों को मिलती थी, जबकि 80 प्रतिशत राशि कोषागार के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। कुछ बिचौलियों ने तो यह भी बताया कि नामजद अधिकारी और कर्मचारी अपना हिस्सा लेने के लिए उनके घर तक आते थे।
जांच टीम ने हाल ही में राजापुर के अतरसुई से बिचौलिया अजय यादव को गिरफ्तार किया है। उसके भाई अजीत की भी तलाश जारी है, जिस पर बिचौलिये के रूप में कोषागार विभाग से अवैध धन खाते में लेने और कमीशन पहुंचाने का आरोप है। इस गिरफ्तारी से अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की अटकलें तेज हो गई हैं।
सीओ सिटी अरविंद वर्मा ने बताया कि बुधवार को राजापुर पुलिस की मदद से वांछितों की तलाश में दबिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। एसपी अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जिन पर संदेह है और जिनके खातों में अतिरिक्त धनराशि पाई गई है, उनसे पूछताछ जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ में सहयोग न मिलने पर अब और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
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बुधवार को राजापुर पुलिस की मदद से वांछितों की तलाश में दी दबिश
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। करोड़ों रुपये के कोषागार घोटाले की जांच में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एक और बिचौलिए की गिरफ्तारी के साथ अब तक कुल 33 आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। एसआईटी की सक्रियता से यह उम्मीद जताई जा रही है कि घोटाले में शामिल अन्य मुख्य आरोपी और बिचौलिए भी जल्द ही गिरफ्तार होंगे।
हाल ही में एसआईटी ने तीन अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की, हालांकि वांछित व्यक्ति हाथ नहीं लगे। इसके बावजूद, जांच टीम ने छह नए बिचौलियों के बयान दर्ज किए हैं। इन बिचौलियों को जिला छोड़कर न जाने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
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पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने सहायक कोषाधिकारी और एकाउंटेंट की मिलीभगत से कमीशन लेकर मोटी रकम संबंधित लोगों तक पहुंचाई। यह घोटाला 2014 से जांच के दायरे में है, लेकिन अभी तक पांच खातों से लगभग चार करोड़ रुपये की गड़बड़ी का पूरा खुलासा नहीं हो पाया है।
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सूत्रों के अनुसार, इन छह बिचौलियों ने घोटाले में पहले से गिरफ्तार विभागीय एटीओ, रिटायर्ड एटीओ और एकाउंटेंट के सहयोग की बात कबूल की है। उन्होंने बताया कि इन्हीं की मदद से वे पेंशनरों को समझाकर बैंकों से पैसे निकालते थे। इस प्रक्रिया में यह भी सामने आया कि 20 प्रतिशत राशि बिचौलियों को मिलती थी, जबकि 80 प्रतिशत राशि कोषागार के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। कुछ बिचौलियों ने तो यह भी बताया कि नामजद अधिकारी और कर्मचारी अपना हिस्सा लेने के लिए उनके घर तक आते थे।
जांच टीम ने हाल ही में राजापुर के अतरसुई से बिचौलिया अजय यादव को गिरफ्तार किया है। उसके भाई अजीत की भी तलाश जारी है, जिस पर बिचौलिये के रूप में कोषागार विभाग से अवैध धन खाते में लेने और कमीशन पहुंचाने का आरोप है। इस गिरफ्तारी से अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की अटकलें तेज हो गई हैं।
सीओ सिटी अरविंद वर्मा ने बताया कि बुधवार को राजापुर पुलिस की मदद से वांछितों की तलाश में दबिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। एसपी अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जिन पर संदेह है और जिनके खातों में अतिरिक्त धनराशि पाई गई है, उनसे पूछताछ जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ में सहयोग न मिलने पर अब और गिरफ्तारियां की जाएंगी।