{"_id":"57ec07dc4f1c1ba774573ee9","slug":"if-the-gang-celebrate-the-victory-did-not-come","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीत का जश्न मनाने तो नहीं आया था गैंग ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीत का जश्न मनाने तो नहीं आया था गैंग
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:41 PM IST
विज्ञापन
डोडामाफी गांव में घटना की पूछतांछ करते पुलिस अधीक्षक केके चौधरी।
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचायत चुनाव में डोडामाफी गांव के प्रधान गया कोल की पांच माह के बाद मौत हो जाने के बाद हुए उपचुनाव में मंगलवार को निर्विरोध प्रधान पद पर राज्जन कोल कीजीत की घोषणा हुई। डाकू बबुली कोल का यही पैतृक गांव भी है और उसी के दबाव में प्रधान पद के उपचुनाव में रज्जन के खिलाफ किसी ने नामांकन भी नहीं किया था।
विज्ञापन
इसी जीत का जश्न मनाने डाकू बबुली कोल पूरे गैंग के साथ रात में ही आ धमका था। मोबाइल टावर के पास डेरा जमाकर रात भर शराब पी गई। हालांकि प्रधान रज्जन कोल का कहना है कि गैंग से उसके कोई संबंध नहीं है। गांव में 23 सितंबर को पंचायत के उपचुनाव कराए गए थे।
विज्ञापन
कभी ददुआ का शार्गिद और रागिया, बलखड़िया जैसे कुख्यात डाकुओं का विश्वसनीय रहा डाकू बबुली कोल पाठा में दहशत का दूसरा नाम बनता जा रहा है। अभी तक ढाई लाख का ईनामी डाकू जल्द ही अपने पुराने आकाओं की श्रेणी में पांच लाख का ईनामी हो सकता है। इनाम की राशि बढ़ाने के लिए डीआजी स्तर से फाइल जुलाई माह में ही डीजीपी कार्यालय भेजी जा चुकी है। इस पर हत्या, लूट, डकैती व फिरौती के 50 मामले दर्ज हैं।
विज्ञापन
पाठा क्षेत्र में डाकुओं का वरदहस्त चार दशकों से रहा है। कभी ददुआ, ठोकिया, रागिया व बलखड़िया के बाद अब बबुली कोल गैंग प्रशासन के साथ ही आम जनमानस के लिए खासा सिरदर्द है। पुलिस से लेकर एसटीएफ और प्रदेश की सरकारों ने इस दस्यु समस्या का समाधान कराने के काफी प्रयास किए हैं। जिसमें काफी सफलता भी मिली है, लेकिन इन दिनों ढाई लाख का ईनामी डाकू बबुली कोल गैंग नई समस्या है।
थानाध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जानकारी हुई है कि गैंग मंगलवार रात ही गांव पहुंच गया था। रात में ही शराब व खाना पानी हुआ। गैंग से मिलने गांव के कुछ लोग भी गए थे। इसकी जांच की जा रही है।
एसपी केके चौधरी ने बताया कि 20 जुलाई 2016 को डाकू बबुली पर इनाम पांच लाख का करने की संस्तुति कर फाइल डीआईजी कार्यालय भेजी गई है। अब यह फाइल संस्तुति के लिए डीजीपी कार्यालय में है। इस पर नौ हत्याओं समेत 50 लूट, अपहरण व डकैती के मामले यूपी-एमपी क्षेत्र के थानों में दर्ज हैं।
चुनाव में दहशत फैलना तो मकसद नहीं
पाठा क्षेत्र के विधानसभा व पंचायत चुनावों में बदमाशों का दखल रहता है। इस समय विधानसभा चुनाव नजदीक भी आ गए हैं। पिछले चुनावों में देखें तो यहां डकैतों का फरमान चलता रहा है। जानकारों की माने तो हो सकता है कि डोडामाफी में किसान की गोली मारकर हत्या के पीछे भी गैंग का मकसद चुनाव से पहले दहशत फैलाना हो। मानिकपुर विधानसभा चुनाव में कई दशक से बदमाशों का दखल रहा है।
माना जाता है कि इनके रहमों करम पर ही इस क्षेत्र से कई विधायक चुने भी गए हैं। बबुली कोल भी विधानसभा चुनाव में खासा असर डाल सकता है। बबुली कोल गैंग के अधिकतर सदस्य कोल जाति के हैं। मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र में कोल बिरादरी अच्छी खासी है। प्रधान चुनाव में भी इस जाति के कई प्रधान बने हैं। कहा जाता है कि दस्यु बबुली भी अपनी राजनीतिक ताकत मजबूतकरने के लिए विधानसभा चुनाव में दखल दे सकता है।