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दहशत के लिए डकैतों के लिए मुफीद रहा टिकरिया स्टेशन
अमर उजाला ब्यूरो चित्रकूट
Updated Mon, 18 Jan 2016 11:33 PM IST
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दस्यु प्रभावित व जंगल से सटा होने के कारण मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग का यह टिकरिया स्टेशन डकैतों की वारदातों का गवाह है। कुख्यात डाकू ददुआ के जमाने में भी इसी स्टेशन के आसपास माल गाड़ियों में लूट व रेल यात्रियों का अपहरण हुआ है। वर्ष 2014 में साढ़े छह लाख के इनामी मारे गए डकैत बलखड़िया ने टिकरिया स्टेशन पर धावा बोलकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। यात्रियों को बंदूक की बटों से पीटा और लूटपाट की थी।
टिकरिया के अलावा मानिकपुर, बरगढ़, मारकुंडी, बारामाफी, बांसा पहाड़ रेलवे स्टेशन भी जंगल में बसे हैं। मगर इनके बीच टिकरिया स्टेशन बेहद सूनसान स्थान पर है। जंगल से सटा होने के कारण दहशत फैलाने के लिए डकैत साल में एक बार यहां जरूर धावा बोलते है। रविवार की रात रेलवे स्टेशन पर धावा करने वाले डकैत बबुली कोल का यहां से एक किमी दूर डोडा माफी गांव कर रहने वाला है। डोडामाफी से लगे अमचुर नेरुआ व जमुनिहाई गांव हैं।
स्टेशन से सटा जंगल है। बबुली का इसी क्षेत्र में गांव होने के कारण अक्सर डकैतों का यहां आवाजाही रहती है। वहीं दुर्गम रास्तों के कारण चाह कर भी पुलिस समय पर नहीं पहुंच सकती है। साथ ही बबुली का गांव नजदीक होने के कारण ग्रामीण भी भयवश शांत रहते हैं। कई दशक से डकैत इस स्टेशन पर वारदातें कर अपना वर्चस्व दिखाते रहे हैं। ददुआ ने भी इस मार्ग से गुजरने वाली ट्रेनों में लूट व अपहरण की थी। ज्यादातर डाकू ददुआ की तर्ज पर ही काम करने का प्रयास करते रहे हैं। मारे गए डाकू रागिया, बलखड़िया ने भी टिकरिया व मारकुंडी स्टेशन के आसपास कई वारदात की है।
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टिकरिया के अलावा मानिकपुर, बरगढ़, मारकुंडी, बारामाफी, बांसा पहाड़ रेलवे स्टेशन भी जंगल में बसे हैं। मगर इनके बीच टिकरिया स्टेशन बेहद सूनसान स्थान पर है। जंगल से सटा होने के कारण दहशत फैलाने के लिए डकैत साल में एक बार यहां जरूर धावा बोलते है। रविवार की रात रेलवे स्टेशन पर धावा करने वाले डकैत बबुली कोल का यहां से एक किमी दूर डोडा माफी गांव कर रहने वाला है। डोडामाफी से लगे अमचुर नेरुआ व जमुनिहाई गांव हैं।
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स्टेशन से सटा जंगल है। बबुली का इसी क्षेत्र में गांव होने के कारण अक्सर डकैतों का यहां आवाजाही रहती है। वहीं दुर्गम रास्तों के कारण चाह कर भी पुलिस समय पर नहीं पहुंच सकती है। साथ ही बबुली का गांव नजदीक होने के कारण ग्रामीण भी भयवश शांत रहते हैं। कई दशक से डकैत इस स्टेशन पर वारदातें कर अपना वर्चस्व दिखाते रहे हैं। ददुआ ने भी इस मार्ग से गुजरने वाली ट्रेनों में लूट व अपहरण की थी। ज्यादातर डाकू ददुआ की तर्ज पर ही काम करने का प्रयास करते रहे हैं। मारे गए डाकू रागिया, बलखड़िया ने भी टिकरिया व मारकुंडी स्टेशन के आसपास कई वारदात की है।
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