{"_id":"5e8a05948ebc3e77a45bb226","slug":"hundreds-of-people-are-away-from-their-own-people-even-after-reaching-the-village-in-chitrakoot-chitrakutt-news-knp5538794113","type":"story","status":"publish","title_hn":"चित्रकूट में गांव पहुंचकर भी अपनों से दूर हैं सैकड़ों लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चित्रकूट में गांव पहुंचकर भी अपनों से दूर हैं सैकड़ों लोग
विज्ञापन
फोटो नंबर- 9- अस्थाई होम क्वांरटीन बनाए गए सीपी सिंह आवासीय इंटर कालेज में मौजूद एक परिवार की सदस्य
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते जिले में बनाए गए क्वारंटीन केंद्रों में शहरों से आए 700 सौ से अधिक मजदूर परिवार को रखा गया है। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यहां खाने पीने की सुविधाएं तो दी जा रही हैं, बावजूद इसके एक-एक मिनट उन्हें भारी पड़ रहा है। भगवान से प्रार्थना करते हैं कि जल्द से जल्द लॉकडाउन खोल दिया जाए ताकि वह अपने घर जा सके। उनके परिवार के सदस्य भी चिंतित रहते हैं कि उनका लाड़ला घर आ जाए, तभी सुकून मिल पाएगा।
रोजगार के लिए जिले से पालन करने वाले युवक बड़ी संख्या में कोरोना वायरस फैलने के बाद शहरों से अपने अपने गांव लौट रहे हैं। कहीं गांवों में भी कोरोना फैल न जाए। इसके लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर ऐसे लोगों को जिले में बनाए गए क्वारंटीन केंद्रों में रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में लगभग 500 युवकों को रखा गया है। इसके अलावा कुछ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जो घर जाने के लिए परेशान रहते हैं। शहर के पास स्थित गोस्वामी तुलसीदास राजकीय महाविद्यालय में 110, सीपी आवासीय विद्यालय में 70 व बैजनाथ कालेज में 50 युवक रखे गए है। इसी तरह से राजापुर, मऊ, बरगढ़ व शिवरामपुर क्षेत्र के कालेजों व स्कूलों में रखा गया है। उन्हें बस इस बात की चिंता रहती है कि वह कई सौ किमी पैदल चलकर आए इसके बाद भी अपने गांव नहीं जा सके। परिवार के सदस्यों के बिना उनका समय नहीं कट पा रहा है।
परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार
चित्रकट। बैजनाथ भारद्वाज कालेज मेें रखे गए मजदूरों में साइपुर गांव के रामनरेश यादव, शिवाकांत, कटहेटा गांव के विजय बहादुर,पहाड़िया बुजुर्ग गांव के नत्थू प्रसाद, कौहारी गांव के इंद्रकुमार,सीपीसिंह आवासी कालेज केंद्र में रखे गए बहिलपुरा गांव के अशोक, रामनारायण आदि ने बताया कि सभी सुविधाएं होने के बाद भी एक एक दिन भारी पड़ रहा है। दिल्ली व मुंबई से अपने जनपद में आने के बाद भी घर जाने नहीं दिया जा रहा है। कई ने कहा कि वह अपने परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। बताया कि मनोरंजन के लिए केंद्रों में टेलीविजन लगा दिया जाए, जिससे समय कट जाएगा।
विज्ञापन
मेहमानों की तरह रखा जा रहा
चित्रकूट। तुलसी महाविद्यालय क्वारंटीन कें द्र में ड्यूटी में तैनात लेखपाल देवेंद्र कुमार ने बताया यहां ठहरने वाले मजदूरों को मेहमान की तरह रखा जाता है। घर की तरह ही सभी सुविधाएं दी जाती हैं। स्नान करने की सुविधाओं के साथ ही सुबह चाय, नाश्ता दिया जाता है। दोपहर को खाना, तीन से चार बजे के बीच लाइ व चना दिया जाता है। शाम को चाय नाश्ता व देर शाम को भोजन दिया जाता है। इसके अलावा यदि किसी में बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उनका इलाज भी कराया जाता है। प्रयास रहता है कि क्वारंटीन सेंटरों में रहने वालों को कोई तकलीफ न उठानी पड़ी। उनका पूरा ध्याल रखा जाता है।
विज्ञापन
रोजगार के लिए जिले से पालन करने वाले युवक बड़ी संख्या में कोरोना वायरस फैलने के बाद शहरों से अपने अपने गांव लौट रहे हैं। कहीं गांवों में भी कोरोना फैल न जाए। इसके लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर ऐसे लोगों को जिले में बनाए गए क्वारंटीन केंद्रों में रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में लगभग 500 युवकों को रखा गया है। इसके अलावा कुछ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जो घर जाने के लिए परेशान रहते हैं। शहर के पास स्थित गोस्वामी तुलसीदास राजकीय महाविद्यालय में 110, सीपी आवासीय विद्यालय में 70 व बैजनाथ कालेज में 50 युवक रखे गए है। इसी तरह से राजापुर, मऊ, बरगढ़ व शिवरामपुर क्षेत्र के कालेजों व स्कूलों में रखा गया है। उन्हें बस इस बात की चिंता रहती है कि वह कई सौ किमी पैदल चलकर आए इसके बाद भी अपने गांव नहीं जा सके। परिवार के सदस्यों के बिना उनका समय नहीं कट पा रहा है।
विज्ञापन
परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार
चित्रकट। बैजनाथ भारद्वाज कालेज मेें रखे गए मजदूरों में साइपुर गांव के रामनरेश यादव, शिवाकांत, कटहेटा गांव के विजय बहादुर,पहाड़िया बुजुर्ग गांव के नत्थू प्रसाद, कौहारी गांव के इंद्रकुमार,सीपीसिंह आवासी कालेज केंद्र में रखे गए बहिलपुरा गांव के अशोक, रामनारायण आदि ने बताया कि सभी सुविधाएं होने के बाद भी एक एक दिन भारी पड़ रहा है। दिल्ली व मुंबई से अपने जनपद में आने के बाद भी घर जाने नहीं दिया जा रहा है। कई ने कहा कि वह अपने परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। बताया कि मनोरंजन के लिए केंद्रों में टेलीविजन लगा दिया जाए, जिससे समय कट जाएगा।
विज्ञापन
मेहमानों की तरह रखा जा रहा
चित्रकूट। तुलसी महाविद्यालय क्वारंटीन कें द्र में ड्यूटी में तैनात लेखपाल देवेंद्र कुमार ने बताया यहां ठहरने वाले मजदूरों को मेहमान की तरह रखा जाता है। घर की तरह ही सभी सुविधाएं दी जाती हैं। स्नान करने की सुविधाओं के साथ ही सुबह चाय, नाश्ता दिया जाता है। दोपहर को खाना, तीन से चार बजे के बीच लाइ व चना दिया जाता है। शाम को चाय नाश्ता व देर शाम को भोजन दिया जाता है। इसके अलावा यदि किसी में बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उनका इलाज भी कराया जाता है। प्रयास रहता है कि क्वारंटीन सेंटरों में रहने वालों को कोई तकलीफ न उठानी पड़ी। उनका पूरा ध्याल रखा जाता है।