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भारी बारिश से तिल, मूंग व उर्द की फसल हो रही बर्बाद

Fri, 19 Aug 2016 11:01 PM IST
चित्रकूट
चित्रकूट Updated Fri, 19 Aug 2016 11:01 PM IST
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Heavy rain til, moong and urd getting crop waste
बारिश के पानी से जलमगभन खेतों से पानी निकालते किसान। - फोटो : अमर उजाला

जिले में कुछ माह पहले तक जहां खेत एक-एक बूंद पानी को तरस रहे थे वहीं अब हालात ये हैं कि खेत जलमग्न हैं। कभी सूखा तो अब अतिवृष्टि से किसान परेशान हैं। इस वर्ष भी कम बारिश की आंशका के चलते किसानों ने कम पानी लगने वाली फसलें  तिल, उर्द व मूंग खेतों में लगाई थी

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लेकिन किसानों के मनसूबों पर मूसलाधार बारिश ने पानी फेर दिया। बारिश से तिल की ज्यादातर फसल बर्बाद हो गयी। खेतों में अधिक पानी भर जाने से ज्वार बाजरा व अरहर की फसलों को भी आंशिक नुकसान हुआ।
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जिले में तीन साल लगातार सूखा पड़ने से किसानों की हालत खराब थी। मानसून आने के बाद जुलाई की शुरूआत में कम बारिश होने से किसानों को आशंका हुई कि इस वर्ष भी कम बारिश होगी। इसलिए यहां के किसानों ने कम पानी लगने वाली फसलें तिल, ज्वार, बाजारा, मूंग लगाईं।
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हालांकि मौसम विभाग ने अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की थी लेकिन किसानों को विश्वास नहीं था। जिन स्थानों पर सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं वहां के किसानों ने धान की फसल लगायी। अगस्त माह के दूसरे सप्ताह में जोरदार बारिश होने से खेतों में लबालब पानी भर गया। इसके चलते लगाई गई फसलों के पौधे गिर गये। जिससे तिल की फसल को भारी नुकसान हुआ है जबकि ज्वार, बाजारा, मूंग की भी आंशिक छति हुई है।

बेराउर के किसान रमाशंकर पाण्डेय ने बताया कि मानसून जब आया तो हल्की बारिश हो रही थी। इसलिए उन्होंने तिल की पैदावार करना ठीक समझा, साथ में ज्वार व बाजरा के बीज खेतों में बोए। लेकिन अधिक बारिश होने से तिल की फसल बर्बाद हो गयी। बनकट गांव के कुलदीप कुमार ने बताया कि खेतों में पानी भर जाने से फसलों की जडे़ सड़ चुकी हैं।

धूप निकलते ही यह पौधे सूख जाएंगे। बेलहा गांव के बड़कू ने बताया कि पिछले साल सूखा पड़ने के कारण कम पानी वाली फसलें लगाई थी। बारिश अधिक होने से तिल की फसल को अधिक नुकसान हुआ है। जबकि ज्वार व बाजरा की फसल को भी छति पहुुंची है।

रैपुरा गांव के शंकर लाल ने बताया कि लगातार छह दिनों से हो रही बारिश से एक बार फिर किसान किसी लायक नहीं बचा है। सिंहपुर गांव के शिवबालक मिश्रा ने बताया कि भारी बारिश होने से सबसे अधिक तिल की फसल को नुकसान हुआ है।

जिला कृषि अधिकारी तुलसीराम ने बताया कि उम्मीद से ज्यादा बारिश होने से तिल की फसल का बचना मुश्किल हो रहा है। इस क्षेत्र में ज्यादा तिल, मूंग व उरद का उत्पादन किसान नहीं करते लेकिन तिरहार, मऊ व मानिकपुर क्षेत्र के पांच सौ बीघे में इसकी फसल बोई गई है।


जिन किसानों के खेत समतल है वहां जलभराव से फसल को भारी नुकसान हुआ है। वहीं जिनके खेत ढलानदार हैं तो उनकी फसल काफी हद तक बची है। बारिश थमने के बाद इसका सही आंकलन हो पाएगा।

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