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Chitrakoot News: सहालग में फूलों का बाजार बिखेर रहा खुशबू

Mon, 17 Nov 2025 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Mon, 17 Nov 2025 12:10 AM IST
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Flower market in Sahalag is spreading fragrance
28 सीकेटीपी-13- परिचय-शहर में सजी फूलों की दुकान । संवाद
चित्रकूट। फूलों का बाजार सहागल में अपनी खुशबू बिखेर रहा है। शादी वाले घरों में मांग पर फूलों के कारोबारी प्रयागराज समेत से विभिन्न किस्म के साथ गुलदस्ते और जयमाल बनाने के लिए गुलाब के फूल को खरीदकर लाते हैं और यहां पर उन्हें बेचते हैं। इससे उनकी अच्छी कमाई भी हो जाती है। खास बात तो यह है कि साज-सज्जा के लिए आर्टीफिशियल फूलों की मांग भी बढ़ी है। ज्यादातर पार्टियों में सजावट के लिए यही फूल इस्तेमाल में लाए जाते हैं।
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जिले में गेंदा, गुलाब सहित अन्य किस्मों के फूलों की खेती होती है। यहां होने वाले गुलाब से सामान्य माला बनता है। गुलदस्ते और जयमाल के लिए बाहर से मंगाना पड़ता है। सहालग में हर तरह के फूल की मांग बढ़ जाती है। इससे फूलों की कीमत भी बढ़ गई हैं। बड़ी पार्टियों में सजावट के लिए इन फूलाें का इस्तेमाल हाे रहा है। बाकी आर्टीफिशियल फूलों से काम चला रहे हैं। जयमाल, सेहरा, दूल्हे के वाहन आदि की सजावट के लिए गुलाब के फूल की खपत तेजी से बढ़ी है। आम दिनों में जहां गुलाब और गेंदा मिलाकर दो क्विंटल की खपत होती है। सहालग के समय यह पांच से सात क्विंटल हो जाती है। हालांकि, बाहर से आने वाले फूल महंगे होते हैं। शादी की खुशी में लोग महंगाई की परवाह किए बगैर दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं।
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आज के समय में लोग मंडप पुराने पद्धति का ही पसंद करते हैं। कारीगर इसके लिए आर्टीफिशियल सजावट का सामान मंगाकर इन्हें सजाते हैं। धर्मनगरी चित्रकूट के रामघाट में 10 से अधिक युवक व महिलाएं फूलों के कारोबार से जुड़ी हैं। माली रामलाल, श्याम लाल ने बताया कि कई साल से वह लोग यह कार्य कर रहे हैं। धर्मनगरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। रोजाना 40 से 50 श्रद्धालु उनसे फूल व माला खरीदते हैं। अमावस्या व अन्य पर्व में इनकी संख्या बढ़ जाती है। इससे अच्छी आमदनी होती है।
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जिला मुख्यालय के प्रमुख मंदिरों व चौराहों पर भी सुबह होते ही फूल व माला लेने के लिए लाइनें लग जाती है। सुरेश सेनी, महेश साहू ने बताया कि इस समय एक हजार से 15 सौ रुपये तक के जयमाल की बिक्री हो रही है। इससे महंगा कोई नहीं खरीदता है। विशेष आर्डर पर 25 सौ तक के जयमाल तैयार करते हैं। दुकानदार राजेश गुप्ता ने बताया कि छोटे माले यहां पैदा होने वाले गुलाब के बन जाते हैं। बड़े माले तैयार करने के लिए प्रयागराज से आने वाले फूलों का इस्तेमाल होता है।
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