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जिला अस्पताल के डाक्टर, नर्स समेत तीन के खिलाफ एफआईआर
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संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। प्रसव दर्द से पीड़ित प्रसूता व उसके पति के साथ अभद्रता कर धमकी देने के मामले में कोर्ट के आदेश पर जिला अस्पताल के एक डाक्टर व नर्स समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मौजूद स्टाफ की लापरवाही से प्रसूता का पेट दबाने से गर्भस्थ शिशु की मौत भी हो गई है। सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू की गई है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के दुर्गाकुंज तरौंहा निवासी मंजू देवी पत्नी संतकुमार ने बताया कि 29 अप्रैल की रात को तेज प्रसव दर्द होने पर परिजन जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर व स्टाफ ने तेज दर्द के बाद भी उसका सही इलाज नहीं किया। पति द्वारा इसकी शिकायत करने पर स्टाफ ने अभद्रता कर अपशब्द भी कहे। आरोप लगाया कि उसके पेट को गलत तरीके से दबाया गया जिससे उसके शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई। इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत कर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में विशेष न्यायधीश (एससी/एसटी एक्ट) के आदेश पर जिला अस्पताल के डा. गिरीश कुमार, नर्स उमापाल व उपचारिका मधुदेवी के खिलाफ धारा- 315, 504,506, 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। कोतवाल अरुण पाठक ने बताया कि अदालत के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच सीओ सिटी रजनीश यादव कर रहे हैं। इस मामले में सीएमएस डा. आरके गुप्ता ने बताया कि अभी उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली है। संबंधित स्टाफ से जानकारी की जा रही है। उधर डा. गिरीश कुमार ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जांच में सब सामने आ जाएगा। उन्होंने प्रसूता व उनके पति के खिलाफ ऐसा व्यवहार नहीं किया है।
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चित्रकूट। प्रसव दर्द से पीड़ित प्रसूता व उसके पति के साथ अभद्रता कर धमकी देने के मामले में कोर्ट के आदेश पर जिला अस्पताल के एक डाक्टर व नर्स समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मौजूद स्टाफ की लापरवाही से प्रसूता का पेट दबाने से गर्भस्थ शिशु की मौत भी हो गई है। सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू की गई है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के दुर्गाकुंज तरौंहा निवासी मंजू देवी पत्नी संतकुमार ने बताया कि 29 अप्रैल की रात को तेज प्रसव दर्द होने पर परिजन जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर व स्टाफ ने तेज दर्द के बाद भी उसका सही इलाज नहीं किया। पति द्वारा इसकी शिकायत करने पर स्टाफ ने अभद्रता कर अपशब्द भी कहे। आरोप लगाया कि उसके पेट को गलत तरीके से दबाया गया जिससे उसके शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई। इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत कर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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इस मामले में विशेष न्यायधीश (एससी/एसटी एक्ट) के आदेश पर जिला अस्पताल के डा. गिरीश कुमार, नर्स उमापाल व उपचारिका मधुदेवी के खिलाफ धारा- 315, 504,506, 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। कोतवाल अरुण पाठक ने बताया कि अदालत के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच सीओ सिटी रजनीश यादव कर रहे हैं। इस मामले में सीएमएस डा. आरके गुप्ता ने बताया कि अभी उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली है। संबंधित स्टाफ से जानकारी की जा रही है। उधर डा. गिरीश कुमार ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जांच में सब सामने आ जाएगा। उन्होंने प्रसूता व उनके पति के खिलाफ ऐसा व्यवहार नहीं किया है।
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