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तीन कृषि कानून के वापसी के केंद्र सरकार के निर्णय को लेकर प्रतिक्रिया
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चित्रकूट। तीन कृषि कानून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेे वापस लिए जाने की घोषणा कर दी है। जिससे किसान संगठनों सहित गल्ला व्यापारी व राजनैतिक दलों ने अलग अलग प्रतिक्रिया दी है।
किसान नेताओं ने इसे देर से लिया फैसला बताया। वहीं ज्यादातर ने इसे भी चुनावी चाल बताया और कहा कि जब यह काला कानून ही था तो इसे क्यों लागू करने पर भाजपा अड़ी थी। किसानों को आतंकी तक कहा गया। सपा व्यापार प्रकोष्ठ ने इसे भाजपा के लिए शर्मनाक कदम बताया कहा कि भाजपा ने किसानों और व्यापारियों के साथ अन्याय किया है।
भाकियू जिलाध्यक्ष रामसिंह राही ने बताया कि कानून वापस भर से किसान खुश नही है क्योंकि किसानों के गले में फांसी का फंदा डालकर वापस लेने कि घोषणा करना क्या न्याय संगत है गांधी वादी संगठन की जीत हुई लेकिन खेद प्रकट करते हुए कहना पड़ रहा है कि अभी तक लखीमपुर खीरी के दोषी अजय टोनी को बर्खास्त क्यों नही किया गया और उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नही गई यदि सरकार किसान हितैषी बन रही तो अजय टोनी को जेल भेजें
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भाकियू जिला मीडिया प्रभारी देवेंद्र सिंह ने कानूनों को चुनावी रणनीति बताया उपचुनावों में हार की बौखलाहट व आगामी चुनाव में लुटिया डूबने की दहशत से सरकार का घमंड टूटा है देश के प्रधानमंत्री जी अपराधी है, उन 700 सौ किसानों के जिन्होंने इस आंदोलन में अपनी जान न्योछावर कर दी उनको सरकार मुआवजा दे उनके परिवार के भरण पोषण की बात करें एमएसपी पर गारंटी कानून बनाते हुए किसान आयोग का गठन करें ।
भाकियू तहसील अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि कानून को वापस किए जाने का निर्णय किसानों के हित में है। एमएसपी की लागत भी बढ़ाई ताकि किसानों को अनाज का उचित मूल्य मिल सके।
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भाकियू के महामंत्री रामेश्वर सिंह ने बताया कि इस कानून को पहले ही वापस कर देना चाहिये था। जिससे किसानों को आंदोलन न करना पड़ता। कोई भी कानून किसानों के लिए बनाए तो उससे पहले किसानों को विश्वास में जरूर ले।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष अनुज सिंह यादव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और कई उपचुनाव भाजपा हारी तो पेट्रोल डीजल के दाम कम किया अब किसानों के आंदोलन को आतंकी बताने वाले झूठी वाहवाही लेना चाहते हैं। किसानों के रास्ते में कील ठोकने और कार्टून बनाकर मजाक भाजपा ने बनाया तब भी कोई नहीं डिगा तो अब यूपी, पंजाब व हरियाणा के चुनाव नजदीक आने पर मजबूरीवश कृषि कानून किया है। सैकड़ों किसानों की मौत के दोषियों को सजा भाजपा कब दिलाएगी।
सपा व्यापार सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि भाजपा को 2022 में विधानसभा चुनाव में हार का अहसास हो चुका है इसलिए काला कृषि कानून वापस लेना पड़ा। आंदोलन में मृत किसानों की शहादत पर भाजपा व उसके समर्थकों को माफी मांगनी चाहिए। जब यह कानून गलत ही था तो जबरन इसे क्यों थोपा जा रहा था।
गल्ला व्यापार पर एकरूपता आएगी
चित्रकूट। तीन कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा को लेकर मंडी में कारोबार करने वाले गल्ला व्यापारियों ने खुशी जताई है। गल्ला व्यापार समिति के जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहाकि इस कानून के वापस होने से गल्ला व्यापार पर एकरूपता आएगी मंडी के अंदर व्यापार करने पर अलग से मंडी शुल्क देना पड़ता था। जबकि बाहर खद्यान्न बेचने पर कारोबार मेें किसी भी तरह से कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। व्यापार मंडल के महामंत्री गुलाब गुप्ता का कहना कि इस निर्णय से गल्ला व्यापार करने वाले व्यापारियों का हित होगा। संवाद
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किसान नेताओं ने इसे देर से लिया फैसला बताया। वहीं ज्यादातर ने इसे भी चुनावी चाल बताया और कहा कि जब यह काला कानून ही था तो इसे क्यों लागू करने पर भाजपा अड़ी थी। किसानों को आतंकी तक कहा गया। सपा व्यापार प्रकोष्ठ ने इसे भाजपा के लिए शर्मनाक कदम बताया कहा कि भाजपा ने किसानों और व्यापारियों के साथ अन्याय किया है।
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भाकियू जिलाध्यक्ष रामसिंह राही ने बताया कि कानून वापस भर से किसान खुश नही है क्योंकि किसानों के गले में फांसी का फंदा डालकर वापस लेने कि घोषणा करना क्या न्याय संगत है गांधी वादी संगठन की जीत हुई लेकिन खेद प्रकट करते हुए कहना पड़ रहा है कि अभी तक लखीमपुर खीरी के दोषी अजय टोनी को बर्खास्त क्यों नही किया गया और उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नही गई यदि सरकार किसान हितैषी बन रही तो अजय टोनी को जेल भेजें
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भाकियू जिला मीडिया प्रभारी देवेंद्र सिंह ने कानूनों को चुनावी रणनीति बताया उपचुनावों में हार की बौखलाहट व आगामी चुनाव में लुटिया डूबने की दहशत से सरकार का घमंड टूटा है देश के प्रधानमंत्री जी अपराधी है, उन 700 सौ किसानों के जिन्होंने इस आंदोलन में अपनी जान न्योछावर कर दी उनको सरकार मुआवजा दे उनके परिवार के भरण पोषण की बात करें एमएसपी पर गारंटी कानून बनाते हुए किसान आयोग का गठन करें ।
भाकियू तहसील अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि कानून को वापस किए जाने का निर्णय किसानों के हित में है। एमएसपी की लागत भी बढ़ाई ताकि किसानों को अनाज का उचित मूल्य मिल सके।
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भाकियू के महामंत्री रामेश्वर सिंह ने बताया कि इस कानून को पहले ही वापस कर देना चाहिये था। जिससे किसानों को आंदोलन न करना पड़ता। कोई भी कानून किसानों के लिए बनाए तो उससे पहले किसानों को विश्वास में जरूर ले।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष अनुज सिंह यादव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और कई उपचुनाव भाजपा हारी तो पेट्रोल डीजल के दाम कम किया अब किसानों के आंदोलन को आतंकी बताने वाले झूठी वाहवाही लेना चाहते हैं। किसानों के रास्ते में कील ठोकने और कार्टून बनाकर मजाक भाजपा ने बनाया तब भी कोई नहीं डिगा तो अब यूपी, पंजाब व हरियाणा के चुनाव नजदीक आने पर मजबूरीवश कृषि कानून किया है। सैकड़ों किसानों की मौत के दोषियों को सजा भाजपा कब दिलाएगी।
सपा व्यापार सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि भाजपा को 2022 में विधानसभा चुनाव में हार का अहसास हो चुका है इसलिए काला कृषि कानून वापस लेना पड़ा। आंदोलन में मृत किसानों की शहादत पर भाजपा व उसके समर्थकों को माफी मांगनी चाहिए। जब यह कानून गलत ही था तो जबरन इसे क्यों थोपा जा रहा था।
गल्ला व्यापार पर एकरूपता आएगी
चित्रकूट। तीन कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा को लेकर मंडी में कारोबार करने वाले गल्ला व्यापारियों ने खुशी जताई है। गल्ला व्यापार समिति के जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहाकि इस कानून के वापस होने से गल्ला व्यापार पर एकरूपता आएगी मंडी के अंदर व्यापार करने पर अलग से मंडी शुल्क देना पड़ता था। जबकि बाहर खद्यान्न बेचने पर कारोबार मेें किसी भी तरह से कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। व्यापार मंडल के महामंत्री गुलाब गुप्ता का कहना कि इस निर्णय से गल्ला व्यापार करने वाले व्यापारियों का हित होगा। संवाद