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अहंकार, ममता से होती परिवार में कलह
अमर उजाला ब्यूरो,चित्रकूट
Updated Wed, 08 Feb 2017 10:38 PM IST
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लैनाबाबा सरकार परिसर में चल रही श्रीरामकथा के दौरान कथा सुनातीं वक्ता प्रभाजी।
- फोटो : amar ujala
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महाकवि तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर के बेराउर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास अरविंद महराज ने प्रहलाद व श्रीकृष्ण जन्म की क था सुनाई।
कथा के दौरान बुधवार को व्यास ने बताया कि प्रहलाद की भक्ति को देखकर हिरण्य कश्यप परेशान था। कई बार भक्त प्रहलाद की जान लेने कोशिश की। उसके बावजूद भगवान की भक्ति का असर रहा कि वह जीवित रहे। भक्ति के कारण ही भगवान को स्वयं जन्म लेना पड़ा।
उन्होंने श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की लीला सुनाई। बताया कि जब गोकुल में कृष्ण जन्म की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो गांव में हर्ष व्याप्त हो गया। उन्होंने बताया कि परिवार में कलह के दो कारण होते हैं एक अहंकार दूसरा ममता। पुरुष संस्कार व महिला सभ्यता व संस्कृति की निशानी है। इस मौके पर शरद चंद्र मिश्र, लवलेश नारायण द्विवेदी, कमलेश कुमार पांडेय, भोला सोनी, शिवगुलाम, अमित कुमार, हीरालाल, गिरधारी, आेंमकार गर्ग, हरिश्चन्द्र आदि मौजूद रहे।
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उधर, शिवरामपुर स्थित प्रसिद्ध लैना बाबा सरकार आश्रम में चल रही श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के बाल लीला की छवि का वर्णन चौथे दिन कथा व्यास प्रभा जी ने किया। बताया कि भगवान राम की बाल लीला को देखने के लिये स्वयं प्रभु शंकर व माता पार्वती अयोध्या पहुंच गये थे। राक्षसों से परेशान विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को अपने साथ ले गये। जिससे ऋषियों का यज्ञ पूरा को सका।
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कथा के दौरान बुधवार को व्यास ने बताया कि प्रहलाद की भक्ति को देखकर हिरण्य कश्यप परेशान था। कई बार भक्त प्रहलाद की जान लेने कोशिश की। उसके बावजूद भगवान की भक्ति का असर रहा कि वह जीवित रहे। भक्ति के कारण ही भगवान को स्वयं जन्म लेना पड़ा।
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उन्होंने श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की लीला सुनाई। बताया कि जब गोकुल में कृष्ण जन्म की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो गांव में हर्ष व्याप्त हो गया। उन्होंने बताया कि परिवार में कलह के दो कारण होते हैं एक अहंकार दूसरा ममता। पुरुष संस्कार व महिला सभ्यता व संस्कृति की निशानी है। इस मौके पर शरद चंद्र मिश्र, लवलेश नारायण द्विवेदी, कमलेश कुमार पांडेय, भोला सोनी, शिवगुलाम, अमित कुमार, हीरालाल, गिरधारी, आेंमकार गर्ग, हरिश्चन्द्र आदि मौजूद रहे।
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उधर, शिवरामपुर स्थित प्रसिद्ध लैना बाबा सरकार आश्रम में चल रही श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के बाल लीला की छवि का वर्णन चौथे दिन कथा व्यास प्रभा जी ने किया। बताया कि भगवान राम की बाल लीला को देखने के लिये स्वयं प्रभु शंकर व माता पार्वती अयोध्या पहुंच गये थे। राक्षसों से परेशान विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को अपने साथ ले गये। जिससे ऋषियों का यज्ञ पूरा को सका।