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Chitrakoot News: धूल-मिट्टी ने बिगाड़ी शहर की हवा
Fri, 23 Oct 2026 11:13 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:13 PM IST
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चित्रकूट। दिवाली से पहले जिले की हवा जहरीली हो गई है। सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक ने खतरे की घंटी बजा दी है। धूल-मिट्टी ने शहर की हवा बिगाड़ दी है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के मझगवां में वायु गुणवत्ता सूचकांक 141 रहा, जो लोगों के लिए ठीक नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के जिला मुख्यालय कर्वी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार 300 से ऊपर का एक्यूआई फेफड़ों के लिए खतरनाक है। जांच में हवा में पीएम 2.5 कणों की मात्रा सबसे अधिक पाई गई है। ये कण इंसानी बाल से तीस गुना छोटे होते हैं और सीधे खून में घुल जाते हैं।
चिकित्सकों ने बताया कि 305 वायु गुणवत्ता सूचकांक वाली हवा में एक दिन सांस लेना पंद्रह से बीस सिगरेट पीने के बराबर है। जानकारों के मुताबिक चित्रकूट की भौगोलिक स्थिति ही प्रदूषण बढ़ा रही है। चारों तरफ पहाड़ होने से हवा एक जगह रुक जाती है और धूल बाहर नहीं निकल पाती। दूसरी बड़ी वजह जिले में पत्थर की सैकड़ों खदानें हैं, जिनकी उड़ती धूल पूरे जिले की हवा में घुल रही है।
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तीसरा, यूपी-एमपी सीमा से रोजाना गुजरने वाले हजारों ट्रकों का धुआं और चौथा सड़क निर्माण व खेतों में पराली जलाना है।
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बंद करें सुबह की सैर, एन-95 मास्क पहनें
शुक्रवार सुबह से ही शहर धुंध और धुएं की चादर में लिपटा रहा। बाजार में निकले लोगों ने आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत की। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर आरबी लाल ने सुबह नौ बजे तक सैर बंद करने की सलाह दी है। उन्होंने एन95 मास्क अनिवार्य रूप से लगाने को कहा है। लोगों को डर है कि दिवाली पर पटाखे जलने के बाद स्थिति और भयावह हो जाएगी। इसलिए प्रशासन को अभी से पानी का छिड़काव और कचरा जलाने पर रोक लगानी होगी।
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वायु गुणवत्ता सूचकांक का मानक
- 0-50 अच्छा
-101-200 मध्यम
-300 से ऊपर बेहद खराब
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ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के मझगवां में वायु गुणवत्ता सूचकांक 141 रहा, जो लोगों के लिए ठीक नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के जिला मुख्यालय कर्वी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार 300 से ऊपर का एक्यूआई फेफड़ों के लिए खतरनाक है। जांच में हवा में पीएम 2.5 कणों की मात्रा सबसे अधिक पाई गई है। ये कण इंसानी बाल से तीस गुना छोटे होते हैं और सीधे खून में घुल जाते हैं।
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चिकित्सकों ने बताया कि 305 वायु गुणवत्ता सूचकांक वाली हवा में एक दिन सांस लेना पंद्रह से बीस सिगरेट पीने के बराबर है। जानकारों के मुताबिक चित्रकूट की भौगोलिक स्थिति ही प्रदूषण बढ़ा रही है। चारों तरफ पहाड़ होने से हवा एक जगह रुक जाती है और धूल बाहर नहीं निकल पाती। दूसरी बड़ी वजह जिले में पत्थर की सैकड़ों खदानें हैं, जिनकी उड़ती धूल पूरे जिले की हवा में घुल रही है।
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तीसरा, यूपी-एमपी सीमा से रोजाना गुजरने वाले हजारों ट्रकों का धुआं और चौथा सड़क निर्माण व खेतों में पराली जलाना है।
बंद करें सुबह की सैर, एन-95 मास्क पहनें
शुक्रवार सुबह से ही शहर धुंध और धुएं की चादर में लिपटा रहा। बाजार में निकले लोगों ने आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत की। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर आरबी लाल ने सुबह नौ बजे तक सैर बंद करने की सलाह दी है। उन्होंने एन95 मास्क अनिवार्य रूप से लगाने को कहा है। लोगों को डर है कि दिवाली पर पटाखे जलने के बाद स्थिति और भयावह हो जाएगी। इसलिए प्रशासन को अभी से पानी का छिड़काव और कचरा जलाने पर रोक लगानी होगी।
वायु गुणवत्ता सूचकांक का मानक
- 0-50 अच्छा
-101-200 मध्यम
-300 से ऊपर बेहद खराब