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830 जन्में बच्चों में एक डाउन सिंड्रोम से ग्रसित

Sat, 20 Mar 2021 10:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 10:49 PM IST
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चित्रकूट। डाउन सिंड्रोम (मानसिक व शारीरिक विकार) जिसे ट्राईसोमी 21 भी कहा जाता है। एक ऐसी स्थिति है जिसमें अतिरिक्त आनुवंशिक सामग्री एक बच्चे के मानसिक और शारीरिक रूप से विकसित होने के तरीके में देरी का कारण बनती है। चित्रकूट जिले में इस बीमारी से ग्रसित बच्चे कम हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बुंदेलखंड में यह बीमारी आज से 20 साल पहले मामूली थी पर बढ़ोत्तरी हो रही है। इसपर नियंत्रण के लिए महिलाओं को खास ध्यान व इलाज की जरूरत है। वर्तमान में जिले में एक हजार बच्चों में मात्र दस को बीमारी है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचसी अग्रवाल बताते है कि डाउन सिंड्रोम आनुवांशिक जन्मजात विकारों में से एक प्रमुख विकार है। यह बीमारी नवजात को मां के गर्भ में ही होती है। डाउन सिंड्रोम शरीर में क्रोमोसोम की असामान्य संख्या की वजह से होता है। सामान्य तौर पर व्यक्ति के शरीर में 46 क्रोमोसोम होते हैं। क्रोमोसोम का एक अतिरिक्त जोड़ा शरीर और मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है। ज्यादातर मामलों में संतान को अतिरिक्त क्रोमोसोम मां के जीन से मिलता है। अतिरिक्त क्रोमोसोम को ट्राइसोमी 21 कहते हैं। अमूमन जन्में हर 830 बच्चों में से एक डाउन सिंड्रोम से ग्रसित होता है।
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ट्रिपल टेस्टिंग से पता चल सकता है डाउन सिंड्रोम
डॉ. अग्रवाल बताते है कि गर्भावस्था के दौरान ट्रिपल टेस्टिंग और अल्ट्रा सोनोग्राफी के जरिए डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है। जांच के अनुसार यदि बच्चा डाउन सिंड्रोम से ग्रसित है तो उसका गर्भपात ही कराया जाता है। 35 वर्ष से ऊपर की आयु पर गर्भवती होनी वाली महिला को क्रोमोसोम्स एनालिसिस अवश्य करानी चाहिए। -
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इलाज
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पहाड़ी टीम के डा.कमल किशोर बताते है कि आरबीएसके के अंतर्गत आने वाले 4 डी में से एक डी डिफेक्ट एट बर्थ यानी जन्मजात विकृति में डाउन सिंड्रोम की कंडीशन भी है। ऐसे तो इस विकृति का कोई इलाज नहीं है लेकिन समस्या के अनुसार थेरेपी और मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाता है।
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डाउन सिंड्रोम की पहचान
चपटा चेहराए खासकर नाक चपटी, ऊपर की ओर झुकी हुई आंखें, छोटी गर्दन और छोटे कान, मुंह से बाहर निकलती रहने वाली जीभ, मांसपेशियों में कमजोरी ढीले जोड़ और अत्यधिक लचीलापन,चौड़े छोटे हाथ हथेली में एक लकीर, अपेक्षाकृत छोटी अंगुलियां छोटे हाथ और पांव, छोटा कद व आंख की पुतली में छोटे सफेद धब्बे।
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डाउन सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों में लक्षण
सुनने की क्षमता कम होना, कानों का संक्रमण, नजर कमजोर होना, आंखों में मोतियाबिंद होना, जन्म के समय दिल में विकृति, थॉयरॉयड, आंतों में संक्रमण, एनीमिया व मोटापा

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प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है डाउन सिंड्रोम दिवस
भारत में इस अवस्था को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। सबसे पहले इसके सामान्य लक्षणों का वर्गीकरण ब्रिटिश डाक्टर जॉन लैग्डन डाउनस ने किया था इसीलिए इनके नाम पर इस विकार का नाम रखा गया।
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