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Chitrakoot News: जिला अस्पताल बना रेफरल सेंटर, ऑक्सीजन प्लांट बंद

Sat, 03 Jan 2026 12:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jan 2026 12:04 AM IST
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District hospital becomes referral center, oxygen plant closed
फोटो 02 सीकेटीपी-05- जिला अस्पताल में बंद पड़ा ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
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फोटो-06 -इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को सांस देने के लिए रखे सिलिंडर। संवाद
- 55 लाख से स्थापित ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र छह माह से बंद



- अव्यवस्थाओं के खिलाफ व्यापारियों ने भी किया था प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। जिला अस्पताल मरीजों के लिए मात्र एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। हर दिन औसतन तीन से चार गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बाहर भेजना पड़ रहा है। ऐसे गंभीर हालात के बीच, अस्पताल परिसर में करीब 55 लाख रुपये की लागत से स्थापित ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र पिछले छह महीनों से बंद पड़ा है, जिससे यह महत्वपूर्ण मशीनरी कबाड़ होने की कगार पर पहुंच गई है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की भारी किल्लत और सैकड़ों मौतों के अनुभव को देखते हुए, वर्ष 2021-22 में जिला अस्पताल में 300 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाला एक आधुनिक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। यह प्लांट तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय की विधायक निधि और सीएसआर फंड से स्थापित किया गया था। हालांकि, दुर्भाग्यवश, पिछले लगभग छह महीनों से यह पूरी तरह से ठप है।
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ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने का सीधा और गंभीर असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों को फिलहाल सिलेंडरों के सहारे ऑक्सीजन दी जा रही है, जो अक्सर अपर्याप्त साबित होती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि महिला वार्ड में अभी तक ऑक्सीजन की पाइपलाइन तक नहीं पहुंचाई गई है।
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ऑक्सीजन सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण, कई बार 60 से 70 मरीजों को तत्काल रेफर करना पड़ता है, जिससे उनकी जान का खतरा और बढ़ जाता है। इस पूरी अव्यवस्था के बीच जिम्मेदार अधिकारी उदासीन बने हुए हैं, और ऑक्सीजन सिलेंडर बाहरी संस्थानों से मांगे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते ऑक्सीजन प्लांट को चालू कर दिया जाता, तो निश्चित रूप से कई जानें बचाई जा सकती थीं।
जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं और सुविधाओं की भारी कमी को लेकर जिले के व्यापारियों ने करीब एक महीने पहले शहर में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने जिलाधिकारी से जिला अस्पताल को रेफरल सेंटर बनने से रोकने और यहां ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की मांग की थी। इसके बावजूद, स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। व्यापारियों रामनरेश और अतुल कुमार ने बताया कि मामूली चोट लगने पर भी मरीजों को बांदा या प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। इस गंभीर मुद्दे पर कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।

बोले जिम्मेदार---
मरीजों को अच्छी सुविधा देने के लिए जिला अस्पताल में निरंतर काम हो रहा है। अस्पताल में लगा आक्सीजन प्लांट तकनीकी खराबी के कारण बंद है। इससे बनवाने के लिए कार्य भी हो रहे हैं। जल्द ही मरीजों को आक्सीजन की सुविधा उपलब्ध होगी।-शैलेंद्र सिंह, सीएमस, जिला अस्पताल
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