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Chitrakoot News: मिट्टी की बनी गणेश लक्ष्मी की मूर्तियों की मांग बढ़ी, कई जिलों में आपूर्ति

Sat, 18 Oct 2025 02:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Sat, 18 Oct 2025 02:19 AM IST
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Demand for idols of Ganesh Lakshmi made of clay increased, supply in many districts
12 सीकेटीपी-8- परिचय- मिटटी के भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति बनाती महिला। संवाद
चित्रकूट। दिवाली पर्व के लिए शहर के द्वारिकापुरी मोहल्ले में 30 से अधिक परिवार के सदस्य पुश्तैनी काम में भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति बनाने में जुटे हुए हैं। मिट्टी की मूर्तियों की पूजा के लिए मान्यता अधिक होने से इनकी मांग कानपुर, प्रयागराज, सतना, कटनी व रींवा में अधिक है। प्रतिवर्ष यहां से पांच मिनी ट्रकों में मूर्तियां इन जिलों के व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं।
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द्वारिकापुरी मोहल्ले के गनेश प्रजापति ने बताया कि मोहल्ले में 30 से अधिक परिवार दिवाली पर्व के तीन माह पहले से ही भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने के कार्य में हर साल की तरह इस बार भी जुटे हैं। आसपास के खेतों से मिट्टी लाने के बाद सांचे के सहायता से मूर्तियां तैयार करते हैं। मूर्तियों को रंगने के लिए कानपुर से विशेष रंग लाते हैं।
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मूर्तियों में लगाए जाने वाला गोल्डन रंग एक किलो 1200 में मिलता है। मूर्तियों में चमक लाने के लिए सिप रंग लगाते हैं। एक परिवार के सदस्य दिवाली पर्व में लगभग तीन हजार से अधिक मूर्तियां तैयार कर करता है। मूर्तियां बनने के पहले कई व्यापारी अग्रिम धनराशि दे जाते हैं।
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मूर्तिकार परिवार के सदस्य बताते हैं कि यह उनका पुश्तैनी काम है। छोटी मूर्ति 40 रुपये, इससे बड़ी मूर्ति 100 रुपये व इससे बड़ी मूर्तियां दो सौ से ढाई सौ रुपये में मिलती हैं। छोटी मूर्ति एक मूर्ति में 10 रुपये व बड़ी मूर्तियों 50 रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है। इससे साल भर का खर्च निकलता है। साथ ही साल भर अन्य खिलौने व पशुपक्षियों की मूर्तियां भी बनाते हैं। इन मूर्तियों की मप्र के समीपवर्ती समेत प्रयागराज व कानपुर जिले में मांग होने से यहीं से काफी माल की आपूर्ति होती है। विकास प्रजापति, सोनू, मोनू, कंधी, मुन्ना, नारायन प्रजापति, राकेश, राजेश, अंकित आदि परिवार के सदस्य इस काम को करते है। इन्होंने बताया कि मिट्टी के खिलौने बनाने का कार्य उनकी कई पीढ़ियां करती आ रही हैं। इसके बाद समझदारी आने पर गणेश लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने का कार्य करने लगे। इस कार्य में घर की महिलाएं भी सहयोग करती हैं।

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बडे़ मुश्किल से मिलती मिट्टी

चित्रकूट। अंकित प्रजापति, सोनू कुमार ने बताया कि पहले की बात अलग थी अब बडे़ मुश्किल से मिट्टी मिलती है। महंगी मिट्टी लेने की मजबूरी होती है। रंग भी महंगे होते जा रहे हैं । मूर्तियां बेचने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से कोई प्रोत्साहन भी नहीं मिल रहा हैं।

12 सीकेटीपी-8- परिचय- मिटटी के भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति बनाती महिला। संवाद

12 सीकेटीपी-8- परिचय- मिटटी के भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति बनाती महिला। संवाद

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