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दरोगा की पत्नी का था शव
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट
Updated Fri, 22 May 2015 11:42 PM IST
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चित्रकूट। चित्रकूट के राजापुर में यमुना नदी पुल के पास महेवाघाट पर पड़ा मिला महिला का सिर कटा निर्वस्त्र शव प्रतापगढ़ में तैनात दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह की पत्नी ईशा था। महिला के सिर का अभी तक पता नहीं है। शुक्रवार को ईशा के परिजनों ने महेबाघाट थाना पहुंचकर शव की शिनाख्त की।
पोस्टमार्टम के बाद दोपहर को शव परिजनों को सौंप दिया गया। ईशा की मां विनीता ने तीन दिन पहले काकादेव थाने में दरोगा ज्ञानेंद्र के खिलाफ पहली शादी छिपाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ईशा चार दिन पहले ज्ञानेंद्र के साथ गई थी, तब से उसका कोई अता-पता नहीं था।
काकादेव एसओ के मुताबिक आरोपी दारोगा लाइन हाजिर चल रहा है। उसका मोबाइल फोन भी स्वीच ऑफ आ रहा है। उधर एसपी कौशांबी रतनकांत पांडेय ने फोन पर बताया कि मामला महेवाघाट और काकादेव थाने में दर्ज है। मृतका के भाई और अन्य परिजनों से बात की जा रही है। तफ्तीश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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ईशा (30)कानपुर के नवीन नगर, काकादेव निवासी विनीता सचान की बेटी थी। विनीता ने बताया कि चित्रकूट जिले के छिविलहा गांव निवासी ज्ञानेन्द्र सिंह शहर के कई थानों में बतौर थानाध्यक्ष और एसएसआई तैनात रह चुके हैं। शहर में तैनाती के दौरान दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह उनके परिवार के संपर्क में आए।
शादी का भरोसा देकर बेटी ईशा से मेलजोल बढ़ाया। वर्ष 2013 में ज्ञानेंद्र थाना मूसानगर (कानपुर देहात) में थानाध्यक्ष बने। इसके बाद 10 मार्च 2013 को ईशा से शादी कर ली। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे, दोनों के एक बेटी भी हुई। बाद में ईशा को पता चला कि ज्ञानेंद्र सिंह पहले से शादीशुदा है और उनकी पहली पत्नी नीलम है, जो मध्यप्रदेश के सतना के बछरावा की रहने वाली है। शादी की जानकारी होने पर दोनों में झगड़े बढ़े तो करीब 24 दिन पहले ईशा मायके नवीन नगर आ गईं और परिजनों को पूरी जानकारी दी।
मामला पुलिस में पहुंचने के डर से ज्ञानेंद्र सिंह ने 17 मई को ईशा के मायके पहुंचकर समझौता कर लिया था। इसके बाद 18 मई को ज्ञानेंद्र कुष्मांडा देवी मंदिर जाने की बात कहकर कार से ईशा को ले गए थे। तब से दोनों का पता नहीं है। इसकी शिकायत विनीता ने काकादेव थाने में की पर मामला विभाग से जुड़ा होने की वजह से रिपोर्ट नहीं लिखी गई। विनीता ने आईजी आशुतोष पांडेय से एसएसपी शलभ माथुर तक शिकायत दर्ज कराई। तब 19 मई को काकादेव पुलिस ने दरोगा ज्ञानेंद्र के खिलाफ पहली शादी छिपाने का मामला दर्ज किया था। पर, ईशा के गुम होने की शिकायत दर्ज नहीं की थी। ईशा के लापता होने के बाद परिवार के लोग उसकी तलाश में जुटेे थे।
इसी बीच गुरुवार को काकादेव पुलिस को कौशांबी के महेवा घाट क्षेत्र में ईशा के कद-काठी का शव मिलने की सूचना मिली। इस पर शुक्रवार को एसओ, ईशा की मां विनीता, भाई ऐश्वर्य राज चार-पांच रिश्तेदारों के साथ महेवा घाट थाने पहुंचे और वहां से पोस्टमार्टम हाउस जाकर ईशा की कलाई में बंधी घड़ी, ब्रेसलेट, बाएं बाजू में दिल के आकार टेटू देखकर शिनाख्त की। परिजनों ने दरोगा ज्ञानेंद्र पर ईशा की हत्या का आरोप लगाया।
रिजनों के शिनाख्त के बाद पुलिस ने 72 घंटे बाद शव का पोस्टमार्टम कराया। महेवाघाट एसओ ने बताया कि 19 मई को थाने से 50 मीटर दूर एक महिला का निर्वस्त्र शव मिला था। सिर धड़ से गायब था। चौकीदार की सूचना पर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। शव की पहचान होने के बाद अब पूरा मामला काकादेव थाने को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
अमर उजाला ऑनलाइन के जरिए शव की हुई शिनाख्त
ब्रिटेन में बैठे ईशा के एक रिश्तेदार ने इंटरनेट पर अमर उजाला समाचार पत्र पढ़ा। चित्रकूट और कौशांबी के अमर उजाला संस्करण में महेवा घाट क्षेत्र में एक अनजान महिला का शव मिला, समाचार प्रकाशित हुआ था। बस यहीं ईशा की पहचान का माध्यम बन गया। इसी के सहारे परिवार के लोग महेवा घाट थाने पहुंच गए। ईशा को अखिरी बार परिवार वालों के कंधे के सहारा मिल गया।
ईशा के बहनोई मनोज सिंह ब्रिटेन में रहते हैं। परिवार के लोगों ने ईशा का लापता होने की खबर 19 मई को मोबाइल के जरिए मनोज को दी। मनोज ने किसी तरह से महेवा एसओ का नंबर लिया और उनसे बातचीत करके महिला के शव की कद-काठी पूछी। इस दौरान मनोज को पता चला कि महिला के हाथ में घड़ी है, वैसी ही घड़ी उन्होंने ईशा को गिफ्ट की थी। इसके बाद मनोज ने ईशा की मां विनीता और भाई एश्वर्य राज को शव की पहचान के लिए महेवा घाट भेजा था। विनीता ने पूरा वाकया काकादेव एसओ को बताया। इसके बाद सभी महेवाघाट थाने पहुंचे।
बीवी की हत्या का आरोपी दरोगा निलंबित
दूसरी बीवी की हत्या के आरोपी दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को प्रतापगढ़ पुलिस अधीक्षक बलिकरन सिंह यादव ने शुक्रवार शाम निलंबित कर दिया। प्रतापगढ़ संवाददाता ने बताया कि आरोपी दरोगा की तलाश में प्रतापगढ़ पुलिस भी लगी है। आसपुर देवसरा थाने से लाइन हाजिर होने के बाद दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह पुलिस लाइन में था और क्यूआरटी ड्यूटी कर रहा था। 14 मई से वह गैरहाजिर है। कानपुर पुलिस ने एसपी से दरोगा की गिरफ्तारी में सहयोग मांगा है। जिले की पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
डीएनए जांच को भेजे गए ईशा के नाखून
परिजनों की शिनाख्त के बाद भी पुलिस कानूनी दांवपेंच से बचने के लिए ईशा का डीएनए कराएगी। इसके लिए पोस्टमार्टम के दौरान शव के नाखून और ब्लड के सैंपल सुरक्षित रख लिए गए हैं। इसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
शातिर है दरोगा
जानकारों की माने तो हत्यारे ने ईशा का धड़ महेवा घाट क्षेत्र में फेंका और सिर दूसरी जगह फेंका। हत्यारे का इरादा था कि पुख्ता तरीके से शव की शिनाख्त नहीं होने पर इसका लाभ उसे मिल जाएगा। पुलिस की माने ने सिर कहां फेंका गया इसका पता चलना बाकी है। आरोपी दारोगा के गिरफ्त में आने के बाद ही ईशा के सिर के बारे में पचा चल सकेगा।
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पोस्टमार्टम के बाद दोपहर को शव परिजनों को सौंप दिया गया। ईशा की मां विनीता ने तीन दिन पहले काकादेव थाने में दरोगा ज्ञानेंद्र के खिलाफ पहली शादी छिपाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ईशा चार दिन पहले ज्ञानेंद्र के साथ गई थी, तब से उसका कोई अता-पता नहीं था।
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काकादेव एसओ के मुताबिक आरोपी दारोगा लाइन हाजिर चल रहा है। उसका मोबाइल फोन भी स्वीच ऑफ आ रहा है। उधर एसपी कौशांबी रतनकांत पांडेय ने फोन पर बताया कि मामला महेवाघाट और काकादेव थाने में दर्ज है। मृतका के भाई और अन्य परिजनों से बात की जा रही है। तफ्तीश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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ईशा (30)कानपुर के नवीन नगर, काकादेव निवासी विनीता सचान की बेटी थी। विनीता ने बताया कि चित्रकूट जिले के छिविलहा गांव निवासी ज्ञानेन्द्र सिंह शहर के कई थानों में बतौर थानाध्यक्ष और एसएसआई तैनात रह चुके हैं। शहर में तैनाती के दौरान दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह उनके परिवार के संपर्क में आए।
शादी का भरोसा देकर बेटी ईशा से मेलजोल बढ़ाया। वर्ष 2013 में ज्ञानेंद्र थाना मूसानगर (कानपुर देहात) में थानाध्यक्ष बने। इसके बाद 10 मार्च 2013 को ईशा से शादी कर ली। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे, दोनों के एक बेटी भी हुई। बाद में ईशा को पता चला कि ज्ञानेंद्र सिंह पहले से शादीशुदा है और उनकी पहली पत्नी नीलम है, जो मध्यप्रदेश के सतना के बछरावा की रहने वाली है। शादी की जानकारी होने पर दोनों में झगड़े बढ़े तो करीब 24 दिन पहले ईशा मायके नवीन नगर आ गईं और परिजनों को पूरी जानकारी दी।
मामला पुलिस में पहुंचने के डर से ज्ञानेंद्र सिंह ने 17 मई को ईशा के मायके पहुंचकर समझौता कर लिया था। इसके बाद 18 मई को ज्ञानेंद्र कुष्मांडा देवी मंदिर जाने की बात कहकर कार से ईशा को ले गए थे। तब से दोनों का पता नहीं है। इसकी शिकायत विनीता ने काकादेव थाने में की पर मामला विभाग से जुड़ा होने की वजह से रिपोर्ट नहीं लिखी गई। विनीता ने आईजी आशुतोष पांडेय से एसएसपी शलभ माथुर तक शिकायत दर्ज कराई। तब 19 मई को काकादेव पुलिस ने दरोगा ज्ञानेंद्र के खिलाफ पहली शादी छिपाने का मामला दर्ज किया था। पर, ईशा के गुम होने की शिकायत दर्ज नहीं की थी। ईशा के लापता होने के बाद परिवार के लोग उसकी तलाश में जुटेे थे।
इसी बीच गुरुवार को काकादेव पुलिस को कौशांबी के महेवा घाट क्षेत्र में ईशा के कद-काठी का शव मिलने की सूचना मिली। इस पर शुक्रवार को एसओ, ईशा की मां विनीता, भाई ऐश्वर्य राज चार-पांच रिश्तेदारों के साथ महेवा घाट थाने पहुंचे और वहां से पोस्टमार्टम हाउस जाकर ईशा की कलाई में बंधी घड़ी, ब्रेसलेट, बाएं बाजू में दिल के आकार टेटू देखकर शिनाख्त की। परिजनों ने दरोगा ज्ञानेंद्र पर ईशा की हत्या का आरोप लगाया।
रिजनों के शिनाख्त के बाद पुलिस ने 72 घंटे बाद शव का पोस्टमार्टम कराया। महेवाघाट एसओ ने बताया कि 19 मई को थाने से 50 मीटर दूर एक महिला का निर्वस्त्र शव मिला था। सिर धड़ से गायब था। चौकीदार की सूचना पर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। शव की पहचान होने के बाद अब पूरा मामला काकादेव थाने को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
अमर उजाला ऑनलाइन के जरिए शव की हुई शिनाख्त
ब्रिटेन में बैठे ईशा के एक रिश्तेदार ने इंटरनेट पर अमर उजाला समाचार पत्र पढ़ा। चित्रकूट और कौशांबी के अमर उजाला संस्करण में महेवा घाट क्षेत्र में एक अनजान महिला का शव मिला, समाचार प्रकाशित हुआ था। बस यहीं ईशा की पहचान का माध्यम बन गया। इसी के सहारे परिवार के लोग महेवा घाट थाने पहुंच गए। ईशा को अखिरी बार परिवार वालों के कंधे के सहारा मिल गया।
ईशा के बहनोई मनोज सिंह ब्रिटेन में रहते हैं। परिवार के लोगों ने ईशा का लापता होने की खबर 19 मई को मोबाइल के जरिए मनोज को दी। मनोज ने किसी तरह से महेवा एसओ का नंबर लिया और उनसे बातचीत करके महिला के शव की कद-काठी पूछी। इस दौरान मनोज को पता चला कि महिला के हाथ में घड़ी है, वैसी ही घड़ी उन्होंने ईशा को गिफ्ट की थी। इसके बाद मनोज ने ईशा की मां विनीता और भाई एश्वर्य राज को शव की पहचान के लिए महेवा घाट भेजा था। विनीता ने पूरा वाकया काकादेव एसओ को बताया। इसके बाद सभी महेवाघाट थाने पहुंचे।
बीवी की हत्या का आरोपी दरोगा निलंबित
दूसरी बीवी की हत्या के आरोपी दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को प्रतापगढ़ पुलिस अधीक्षक बलिकरन सिंह यादव ने शुक्रवार शाम निलंबित कर दिया। प्रतापगढ़ संवाददाता ने बताया कि आरोपी दरोगा की तलाश में प्रतापगढ़ पुलिस भी लगी है। आसपुर देवसरा थाने से लाइन हाजिर होने के बाद दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह पुलिस लाइन में था और क्यूआरटी ड्यूटी कर रहा था। 14 मई से वह गैरहाजिर है। कानपुर पुलिस ने एसपी से दरोगा की गिरफ्तारी में सहयोग मांगा है। जिले की पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
डीएनए जांच को भेजे गए ईशा के नाखून
परिजनों की शिनाख्त के बाद भी पुलिस कानूनी दांवपेंच से बचने के लिए ईशा का डीएनए कराएगी। इसके लिए पोस्टमार्टम के दौरान शव के नाखून और ब्लड के सैंपल सुरक्षित रख लिए गए हैं। इसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
शातिर है दरोगा
जानकारों की माने तो हत्यारे ने ईशा का धड़ महेवा घाट क्षेत्र में फेंका और सिर दूसरी जगह फेंका। हत्यारे का इरादा था कि पुख्ता तरीके से शव की शिनाख्त नहीं होने पर इसका लाभ उसे मिल जाएगा। पुलिस की माने ने सिर कहां फेंका गया इसका पता चलना बाकी है। आरोपी दारोगा के गिरफ्त में आने के बाद ही ईशा के सिर के बारे में पचा चल सकेगा।