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कामदगिरी व गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा से मिलता पुण्य
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मानिकपुर। भगवान भाव के भूखे हैं। सच्चे मन से जो भी ईश्वर को याद करता है, भगवान उसकी पुकार सुनकर पैदल ही आ जाते है। जैसे गज व ग्राह के युद्ध में भगवान ने गज की रक्षा की। यह बात सुभाष नगर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कथावाचक आचार्य नवलेश दीक्षित ने कही।
आचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि भारत में दो ही पर्वत हैं जिसकी परिक्रमा की जाती है। एक कामदगिरी पर्वत तो दूसरा वृंदावन में गोवर्धन पर्वत है।
कथावाचक ने कहा कि गोवर्धन पर्वत व श्री कामदगिरी पर्वत दोनों भाई हैं। वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी के साथ प्रतिदिन पांच परिक्रम लगाते थे। यहां भरत जी ने भी पांच दिन तक प्रवास किया।
उन्होंने बताया कि आसमान सात खंभे के सहारे टिका हुआ है। गोमाता में 33 करोड़ देवताओं का वास होता है। कलियुग में हर मानव को गोमाता की पूजा करना चाहिए।
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आचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि भारत में दो ही पर्वत हैं जिसकी परिक्रमा की जाती है। एक कामदगिरी पर्वत तो दूसरा वृंदावन में गोवर्धन पर्वत है।
कथावाचक ने कहा कि गोवर्धन पर्वत व श्री कामदगिरी पर्वत दोनों भाई हैं। वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी के साथ प्रतिदिन पांच परिक्रम लगाते थे। यहां भरत जी ने भी पांच दिन तक प्रवास किया।
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उन्होंने बताया कि आसमान सात खंभे के सहारे टिका हुआ है। गोमाता में 33 करोड़ देवताओं का वास होता है। कलियुग में हर मानव को गोमाता की पूजा करना चाहिए।