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फसलें बर्बाद, मुआवजे का भी नियम नहीं

Mon, 13 Apr 2015 11:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट।
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट। Updated Mon, 13 Apr 2015 11:25 PM IST
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crops were ruined, no rule for relief fund

खेत अधिया या ठेके पर लेने वाले भूमिहीन किसानों के सामने बड़ा संकट है। किसी ने दस बीघा, किसी ने पांच बीघा खेत बटाई में लिया था। बारिश और ओलावृष्टि में इनकी भी फसल बर्बाद हो गई। अब समस्या ये है कि ऐसे किसानों को मुआवजे का भी कोई नियम नहीं है। उनके सामने परिवार का खर्च चलाने की समस्या है। ऐसे में उनकी पीड़ा को कौन समझे।

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 ये किसान तीन से पांच हजार रुपये प्रति बीघा में काश्तकार का खेत ठेके में लेते हैं और फिर उसमें अपने खर्च पर बुआई, रोपाई, जुताई, सिंचाई आदि कराते हैं। ऐसे में अगर किसी वजह से फसल में घाटा हुआ तो यह भी सहना पड़ता है। अधिया में लेने पर खेत में फसल बोने का खर्च आधा काश्तकार को और आधा बटाईदार को सहन करना पड़ता है।
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यूं बताई पीड़ा
बेराउर गांव निवासी लालबाबू ने बताया कि उसने ठेके पर दस बीघे जमीन ली थी। इसमें गेहूं, अरहर, मसूर आदि बोई थी। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने सब बर्बाद कर दिया। अब तो लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं।
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बेराउर के ही दिनेश ने बताया कि उसने दो बीघा जमीन अधिया में लेकर टमाटर लगाया था। बेमौसम बरसात ने पूरी सब्जी खराब कर दी। टमाटर के पौधे सड़ गए। सब्जी बर्बाद होने से सभी बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।

रायपुर के कल्लू ने बताया कि उसने अधिया में छह बीघे खेत लेकर इसमें गेहूं और अन्य अनाज बोया था। मौसम की मार से कुछ भी नहीं बचा। अब पूरे साल कैसे परिवार का खर्च चलेगा यह समस्या है।


राजपुर के मुन्नीलाल ने बताया कि उसने अधिया में खेत लेकर अरहर और गेहूं की फसल लगाई थी। पानी ने उसे चौपट कर दिया। किसानों को तो मुआवजा मिल जाएगा पर हम बटाईदारों का क्या होगा।

पराको की बक्का देवी ने बताया कि छह बीघा में गेहूं बोया था पर बमुश्किल एक क्विंटल गेहूं ही पूरे खेत से निकल पाएगा।

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