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पुलिस का दबाव या 11 लाख...

Fri, 23 Jun 2017 11:46 PM IST
चित्रकूट
चित्रकूट Updated Fri, 23 Jun 2017 11:46 PM IST
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Police pressure or 1.1 million ...
police raid in astrologer office
अमर उजाला ब्यूरो फालोअप
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चित्रकूट। बोरिंग कराने गए दो ठेकेदारों के अपहरण के बाद से लेकर छूटकर आने तक के मामले में पुलिस का दबाव डकैतों के सिर चढ़कर बोलने का दावा किया गया है। वहीं अपहृतों के कुछ परिजनों का कहना है कि डाकुओं ने अपना हिस्सा 11 लाख रुपये पहुंचने के बाद ही दोनों को रिहा किया है। यह भी सही है कि अपहरण की जानकारी के बाद से लगातार पुलिस बल ने जंगलों में नाकेबंदी कर डाकू गोप्पा गैंग से मुठभेड़ भी की लेकिन किस्मत का धनी सरगना बारिश के कारण बच निकला था।
    गुरुवार की रात को अपहृत मिथलेश उर्फ गप्पू पटेल और संदीप पटेल किसी तरह अपने-अपने घर पहुंचे तो परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलकने लगे। शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेेंद्र ने बताया कि पुलिस टीम के दबाव के कारण ही अपहृत दोनो युवकों को डाकू गोप्पा गैंग से सकुशल छुड़वाने में कामयाबी मिली है। बारिश के बीच डाकुओं के बच निकलने के बाद 22 की सुबह जब डकैतों ने बोरिंग मशीने व दो ट्रक फूंक दिए तो पुलिस लगातार उनका पीछा करती रही। जिससे भयवश डाकू युवकाें को छोड़कर भागे। इस दौरान गैंग के साथ ही दोनों अपहृतों के होने के कारण पुलिस सीधी फायरिंग नहीं कर पा रही थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मुख्य ठेकेदार मुख्यालय के पटेल तिराहा निवासी फ ूलचन्द्र सिंह पुत्र स्व. जगदीश सिंह चचेरे व फु फेरे भाई का  कर्का पडरिया में बोरिंग मशीन के काम करते समय अपह्त कर लिया गया था। इसके पीछे दस्यु रामगोपाल उर्फ गोप्पा उर्फ भोले से इनकी पुरानी रंजिश सामने आई है।
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        इसके विपरीत छूटकर आए युवकों के परिजनों ने नाम न छापने की शर्त पर नम आंखों से बताया कि डाकुओं ने अपनी मनमानी पूरी कर ही छोड़ा है। मुख्य ठेकेदार से औंझर में चेकडैम निर्माण के दौरान मांगी गई रंगदारी उधारी थी। जिसके लिए अपहरण किया गया था। इसके लिए 11 लाख रुपये पहले पहुंचाने का प्रयास किया गया था लेकिन उसी दिन पुलिस से मुठभेड़ होने पर मध्यस्थ लौट आए थे। पुलिस का तगड़ा दबाव तो था जिससे डाकुओं में खौफ था। कई बार फोन कर यह भी कहा कि पुलिस पीछे पड़ी है जल्दी रुपये पहुंचाओ। जब बोरिंग मशीनें जला दी गईं तो फिर किसी तरह 22 जून की शाम को रुपये पहुंचाए गए। इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी परिजनों ने नहीं दी है। पुलिस टीम के प्रयास से ही पकड़ छूटी है।
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-----------इनसेट
दोनों का पुलिस ने कराया मेडीकल
चित्रकूट(ब्यूरो)। शुक्रवार को डाकुओं क े चंगुल से छूटकर आए मिथलेश व संदीप का पुलिस ने जिला अस्पताल  में मेडीकल परीक्षण कराया। पुलिस व डाक्टरों के अनुसार दोनों के शरीर में चोट के निशान नहीं हैं।


चित्रकूट(ब्यूरो)। तीन दिनों तक डाकुओं के चंगुल में रहे मिथलेश व संदीप ने बताया कि उनके साथ मारपीट तो नहीं हुई लेकिन दिनरात जंगल में उन्हें घुमाया गया। रात को जंगल में ही भोजन बनाकर सबको खिलाया गया। एक रात तो किसी गांव के घर में कुछ डाकू रहे वहीं से भोजन आया था। मुठभेड़ के दौरान डाकुओं ने उन्हें खाली बंदूकें व बैग टांगने को दिया था। कुल सात डाकू थे जो हम दोनों को मुठभेड़ के बाद भी कवर किए थे। जिससे भागने में गोली लगने का डर लगता था। बोरिंग मशीन में जब आग लगाने आए तो वह भी डाकुओं के साथ थे। लगभग एक घंटे तक डाकू कर्का में रहकर मशीन जलाई और मौजूद रहा।

----------------इनसेट
लगातार होती रही कांबिंग
चित्रकूट(ब्यूरो)। शुक्रवार को भी दिन भर पुलिस टीमें कर्का व आसपास के जंगलों में डाकू गोप्पा गैंग की तलाश में कांबिंग करती रही। गांव में कुछ पुलिस कर्मी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। जली मशीन की रखवाली भी पुलिस कर रही है। ठेकेदार फूलचंद्र ने बताया कि फटे टायर व जली मशीनों के कारण अब उसे शहर तक या मिस्त्री तक ले जाना भी मुश्किल हो रहा है।
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