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महंती को लेकर विवाद, हुई नोकझोंक
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फोटो-5-महंती को लेकर विवाद होने पर दोनों पक्ष आमने सामने और मौजूद पुलिस टीम। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। परिक्रमा मार्ग पर स्थित बड़ा अखाड़ा खोही का नया महंत बनने के बाद गुरुवार को महंती को लेकर मंदिर परिसर में हंगामा हुआ। दूसरे पक्ष ने आकर खुद को महंत बताकर पहले वाले महंत को जाने को कहा। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत करा दिया है। कहा कि जब मामला कोर्ट में चल रहा है तो यहां कुछ निपटारा संभव नहीं है।
कंठी माला के बाद घोषित महंत बलदेव दास ने बताया कि गुरुवार की सुबह कुछ साधु संत शशि बिंदु दास के साथ पहुंचे और खुद को यहां का महंत बताकर मंदिर से जाने को कहा। इसे लेकर दोनों पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। नौबत मारपीट की भी बनने लगी, लेकिन सूचना मिलने पर कोतवाली व सीतापुर चौकी से पुलिस टीम पहुंची तो स्थिति नियंत्रित हुई।
गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2021 को बड़ा अखाड़ा तृतीय मुखारविंद के महंत कल्याण दास का आकस्मिक निधन हो जाने के बाद एक जनवरी को चित्रकूट के सभी अखाड़े और महंतों की मौजूदगी में श्याम दास को बड़े अखाड़ा का महंत बनाया गया था। उस समय कल्याण दास के पुत्र संतोष तिवारी ने महंत की मृत्यु पर सवाल खड़े किए थे। कहा था कि कल्याण दास ने मानसिक प्रताड़ना के चलते अपना जीवन त्याग दिया है। मृत्यु के बाद कमरे से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था जिसमें बड़े अखाड़े की संपत्ति उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम लिखी थी।
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कंठी माला के बाद घोषित महंत बलदेव दास ने बताया कि गुरुवार की सुबह कुछ साधु संत शशि बिंदु दास के साथ पहुंचे और खुद को यहां का महंत बताकर मंदिर से जाने को कहा। इसे लेकर दोनों पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। नौबत मारपीट की भी बनने लगी, लेकिन सूचना मिलने पर कोतवाली व सीतापुर चौकी से पुलिस टीम पहुंची तो स्थिति नियंत्रित हुई।
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गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2021 को बड़ा अखाड़ा तृतीय मुखारविंद के महंत कल्याण दास का आकस्मिक निधन हो जाने के बाद एक जनवरी को चित्रकूट के सभी अखाड़े और महंतों की मौजूदगी में श्याम दास को बड़े अखाड़ा का महंत बनाया गया था। उस समय कल्याण दास के पुत्र संतोष तिवारी ने महंत की मृत्यु पर सवाल खड़े किए थे। कहा था कि कल्याण दास ने मानसिक प्रताड़ना के चलते अपना जीवन त्याग दिया है। मृत्यु के बाद कमरे से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था जिसमें बड़े अखाड़े की संपत्ति उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम लिखी थी।
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